सीतापुर में मदरसे को जमींदोज कर एक बीघा सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। सरकारी दर के हिसाब से खाली कराई गई जमीन की कीमत सवा करोड़ रुपये बताई जा रही है।
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में प्रशासन ने बुधवार को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए सरकारी भूमि पर बने एक अवैध मदरसे को ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई जिले के डीएम के निर्देश पर की गई, जिसमें करीब एक बीघा जमीन पर बने मदरसा हुसैनिया तकमिलुल उलूम को पूरी तरह गिरा दिया गया। वर्षों से सरकारी भूमि पर चल रहे इस अवैध निर्माण को लेकर प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद यह कदम उठाया गया। कार्रवाई के बाद खाली कराई गई जमीन की अनुमानित कीमत सवा करोड़ रुपये के आसपास बताई गई है।

प्रशासन के अनुसार यह भूमि राजस्व विभाग की रिकॉर्डेड जमीन है, जिस पर बिना अनुमति शिक्षण संस्थान का निर्माण किया गया था। अधिकारियों ने कहा कि नोटिस दिए जाने और कार्रवाई की जानकारी देने के बावजूद अवैध निर्माण नहीं हटाया गया, जिसके बाद बुलडोज़र कार्रवाई ही अंतिम विकल्प बचा। सुबह से ही प्रशासनिक टीम और राजस्व विभाग के अधिकारी साइट पर मौजूद रहे, जबकि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया।

कार्रवाई शुरू होते ही अवैध कब्जाधारकों ने इसका विरोध किया और प्रशासनिक टीम को रोकने की कोशिश की। मौके पर उपस्थित लोगों का कहना था कि मदरसे में बच्चों की शिक्षा चल रही थी और इसे हटाना उचित नहीं है। विरोध बढ़ता देख तहसीलदार मनीष त्रिपाठी अतिरिक्त पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और परिस्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने विरोध कर रहे लोगों को समझाकर वहाँ से हटाया, ताकि बुलडोज़र कार्रवाई बिना किसी व्यवधान के पूरी की जा सके।
कार्रवाई के दौरान सुरक्षा की दृष्टि से क्षेत्र में माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया था, लेकिन पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रियता से स्थिति नियंत्रण में रही। स्थानीय प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि किसी भी तरह की अफरा-तफरी या भीड़ एकत्र होने की स्थिति न बने। अधिकारी लगातार लोगों को समझाते रहे कि यह कार्रवाई न्यायालय एवं प्रशासनिक नियमों के अनुरूप हो रही है।
मदरसा हुसैनिया तकमिलुल उलूम को हटाए जाने के बाद जमीन को औपचारिक रूप से अतिक्रमण मुक्त घोषित कर दिया गया है। प्रशासन के मुताबिक, राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार यह जमीन हमेशा से सरकारी थी, जिस पर लंबे समय से कब्जा कर अवैध ढांचा खड़ा किया गया था। जिला प्रशासन ने बताया कि आने वाले दिनों में इसी तरह की और भी अवैध कब्जों पर कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह किसी भी श्रेणी के व्यक्तियों या संस्थानों द्वारा की गई हो।
स्थानीय ग्रामीणों के बीच इस कार्रवाई को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोग प्रशासन की सख्ती को सराह रहे हैं और इसे कानून व्यवस्था को मजबूत करने वाला कदम बता रहे हैं, वहीं कुछ लोगों का कहना है कि यदि मदरसा अवैध था तो पहले वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए थी। हालांकि, प्रशासन का दावा है कि उन्हें इस अवैध निर्माण के खिलाफ पहले भी नोटिस दिया गया था, जिसे अनदेखा किया गया।
जिले के प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डीएम कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि जिले में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान को आगे और तेज किया जाएगा। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि सरकारी जमीन पर बने अन्य विवादित ढांचों की भी जाँच की जा रही है और जल्द ही उन पर भी कार्रवाई हो सकती है।
सीतापुर की यह कार्रवाई एक बार फिर उत्तर प्रदेश में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ सरकार की नीति को रेखांकित करती है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन का संरक्षण राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसे किसी भी परिस्थिति में निजी हितों के लिए उपयोग नहीं होने दिया जाएगा।
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