सदन में गरमाहट: वंदे मातरम विवाद पर बोले JP नड्डा !

 संसद के शीतकालीन सत्र में वंदे मातरम पर जमकर बहस हो रही है. बीजेपी वंदे मातरम के अपमान का जिम्मेदार नेहरू को मानती है. इसे लेकर जेपी नड्डा ने कहा कि वह सरकार के सरदार थे.

संसद के शीतकालीन सत्र के नौवें दिन लोकसभा में वंदे मातरम को लेकर बहस अचानक तेज हो गई। जैसे-जैसे चर्चा आगे बढ़ी, माहौल और तीखा होता गया। बहस के केंद्र में रहे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद जेपी नड्डा, जिन्होंने ऐतिहासिक संदर्भों के साथ विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी पूर्व प्रधानमंत्री को बदनाम करना नहीं, बल्कि इतिहास को रिकॉर्ड पर लाना और राष्ट्रगीत को उसका योग्य सम्मान दिलाना है।

सदन में गरमाहट: वंदे मातरम विवाद पर बोले JP नड्डा !
सदन में गरमाहट: वंदे मातरम विवाद पर बोले JP नड्डा !

जेपी नड्डा ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा,
“हमारा उद्देश्य भारत के पूर्व प्रधानमंत्री को बदनाम करना नहीं है। लेकिन इतिहास को सही रूप में देश के सामने रखना आवश्यक है।”
उन्होंने कहा कि जब कोई महत्वपूर्ण घटना होती है, तो उसके लिए उस समय के नेतृत्व की जिम्मेदारी तय होती है। कांग्रेस कार्यकाल की बात करते हुए नड्डा ने कहा कि उस दौर में देश के शासक जवाहरलाल नेहरू थे, इसीलिए राष्ट्रगीत को उचित सम्मान न मिलने की जवाबदेही भी उन्हीं पर आती है।

नड्डा ने स्पष्ट कहा कि यह मुद्दा किसी व्यक्ति को कटघरे में खड़ा करने का नहीं, बल्कि राष्ट्रगीत के सम्मान का है।
उन्होंने कहा, “जब घटना घटती है तो जिम्मेदार वही होता है जो उस समय सत्ता में होता है। कांग्रेस पार्टी श्रेय लेने में आगे रहती है, लेकिन जिम्मेदारी से भागती है। इतिहास को सुविधानुसार मोड़ा नहीं जा सकता।”

वंदे मातरम के सम्मान पर जताई चिंता

चर्चा के दौरान भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि वंदे मातरम को वह सम्मान और स्थान कभी नहीं मिला, जिसका वह हकदार था। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जिस गीत ने देशभक्ति की आग जगाई, उसे आजादी के बाद वह प्राथमिकता नहीं दी गई जो अपेक्षित थी।

नड्डा ने कहा,
“वंदे मातरम ने भारत की आजादी की नींव रखी। लेकिन जिस सम्मान का वह पात्र था, उसे वह नहीं दिया गया। उस समय के शासक इसके लिए जिम्मेदार थे।”

उनके इस बयान पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। विपक्ष के सांसदों ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए नड्डा को रोकने की कोशिश की, जिसके बाद सदन में कुछ देर के लिए शोर-शराबा होने लगा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि बीजेपी इतिहास की आड़ लेकर स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री की छवि धूमिल करने की कोशिश कर रही है।

हंगामे के बीच भी नड्डा ने जारी रखा भाषण

जैसे-जैसे विपक्ष ने आपत्ति दर्ज कराई, सदन में माहौल और उत्तेजित होता गया। हंगामे के बीच भी जेपी नड्डा ने अपना भाषण जारी रखा। उन्होंने कहा कि वह किसी व्यक्ति को निशाना नहीं बना रहे, लेकिन ऐतिहासिक तथ्य छुपाए नहीं जा सकते।

उन्होंने विपक्ष की ओर देखते हुए कहा,
“मेरी सीधापन का इतना नाजायज फायदा न उठाइए। आप बार-बार रोकते हैं, लेकिन देश को सच जानने का अधिकार है।”

सदन में कई बार सांसदों को संयम बरतने की अपील की गई। हालांकि माहौल लगातार गरमाता रहा। कुछ समय के लिए कार्यवाही बाधित भी हुई, लेकिन बाद में इसे दोबारा शुरू किया गया।

विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने

इस मुद्दे को लेकर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष एक बार फिर टकराव के मोड में दिखाई दिए। विपक्ष ने कहा कि राष्ट्रगीत और राष्ट्रीय प्रतीकों पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए, जबकि बीजेपी ने आरोप लगाया कि ऐतिहासिक तथ्यों से बचने का प्रयास किया जा रहा है।

विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने
विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने

विशेषज्ञों का मानना है कि वंदे मातरम के सम्मान का मुद्दा राजनीतिक से अधिक वैचारिक बहस का विषय है। यह बहस आगे भी जारी रह सकती है, क्योंकि यह केवल इतिहास की समीक्षा नहीं बल्कि सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय प्रतीकों की भूमिका को लेकर भी बड़े विमर्श से जुड़ा है।

निष्कर्ष

शीतकालीन सत्र के बीच उभरा यह नया विवाद दर्शाता है कि राष्ट्रगीत, राष्ट्रीय धरोहरों और ऐतिहासिक निर्णयों की राजनीति आने वाले समय में संसद में और भी गहराई से उठ सकती है। जेपी नड्डा के बयान ने एक बार फिर इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।

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