UP BJP में नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया 12 से 14 दिसंबर तक चलेगी और 14 दिसंबर को आधिकारिक घोषणा होगी. इस चुनाव के लिए बीजेपी ने समय सारिणी जारी की है.
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से 12 दिसंबर से शुरू हो चुकी है और 14 दिसंबर को इसका अंतिम ऐलान किया जाएगा। यह चुनाव न केवल संगठनात्मक मजबूती से जुड़ा है, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष राज्य में पार्टी की दिशा, रणनीति और चुनावी एजेंडा तय करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है, इसलिए संगठन इसका चयन बेहद सावधानी और रणनीतिक सोच के साथ करता है।

लखनऊ में जारी है पूरी प्रक्रिया
पार्टी ने इस चयन प्रक्रिया के लिए राजधानी लखनऊ को केंद्र बनाया है। प्रदेशभर के पदाधिकारी और प्रतिनिधि इस प्रक्रिया में शामिल हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, संगठनात्मक चुनावों के इस चरण का उद्देश्य न केवल नया अध्यक्ष चुनना है, बल्कि आने वाले वर्षों में बीजेपी की जमीनी पकड़ को मजबूत करना भी है।
बीजेपी की संगठनात्मक संरचना में प्रदेश अध्यक्ष एक ऐसा पद है, जिसकी जिम्मेदारियों में बूथ स्तर तक की गतिविधियों की निगरानी, चुनावी तैयारियों की रूपरेखा, रणनीति निर्माण, पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखना और सरकार तथा संगठन के बीच समन्वय स्थापित करना शामिल है। ऐसे में इस पद पर किसे चुना जाता है, इसे लेकर पार्टी के भीतर और राजनीतिक गलियारों में खासा उत्साह है।
13 दिसंबर: नामांकन, जांच और वापसी की प्रक्रिया
प्रक्रिया के दूसरे दिन यानी 13 दिसंबर को सबसे महत्वपूर्ण गतिविधियां होंगी। नामांकन भरने का समय दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक तय किया गया है। इस दौरान सम्भावित उम्मीदवार अपनी दावेदारी पेश करेंगे। इसके बाद 3 से 4 बजे तक नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी की जाएगी, जिसमें उम्मीदवारों की पात्रता, औपचारिकताओं और दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
नामांकन वापस लेने की समय सीमा 4 से 5 बजे तक निर्धारित की गई है। माना जा रहा है कि यदि किसी एक नाम पर आम सहमति बन जाती है तो उसी दिन कई नामांकन वापस भी लिए जा सकते हैं और चुनाव की प्रक्रिया निर्विरोध संपन्न हो जाएगी।
14 दिसंबर को दोपहर 1 बजे घोषणा
चुनाव प्रक्रिया का अंतिम चरण 14 दिसंबर को पूरा होगा। दोपहर 1 बजे नए प्रदेश अध्यक्ष की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। यदि आवश्यक हुआ—यानी यदि एक से अधिक नाम मैदान में रहें—तो उसी दिन मतदान भी कराया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी चाहता है कि नया अध्यक्ष सर्वसम्मति से चुना जाए, ताकि संगठनात्मक एकता बनी रहे और आने वाले चुनावों में पार्टी बेहतर ढंग से तैयारी कर सके।
राष्ट्रीय नेतृत्व की निगरानी में चुनाव
इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े लखनऊ पहुंचेंगे। उनके मौजूद रहने से यह स्पष्ट है कि राष्ट्रीय नेतृत्व इस चुनाव को बहुत अहमियत दे रहा है। तावड़े संगठनात्मक चुनावों और आंतरिक प्रक्रियाओं के विशेषज्ञ माने जाते हैं, और पूरे देश में ऐसे चुनावों की निगरानी का दायित्व संभालते रहे हैं।
उनकी मौजूदगी से यह भी संकेत मिलता है कि बीजेपी एक मजबूत, स्वीकार्य और अनुभवी नेता को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपने के पक्ष में है, ताकि 2027 विधानसभा चुनावों से पहले संगठन में कोई अंतर्विरोध न रहे।
राजनीतिक महत्व क्यों बढ़ गया है?
उत्तर प्रदेश न केवल देश की सबसे बड़ी जनसंख्या वाला राज्य है, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी सबसे अहम है। केंद्र की राजनीति पर भी यूपी का सीधा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष का पद सिर्फ संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक रणनीतिक नेतृत्वकारी भूमिका भी है।
2027 के चुनावों में बीजेपी को सत्ता में वापसी दिलाने की जिम्मेदारी नए अध्यक्ष के कंधों पर होगी। यही कारण है कि पार्टी इसे बेहद सोच-समझकर तय कर रही है। पिछले कुछ वर्षों में बीजेपी ने यूपी में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है, और संगठन इसे आगे भी बनाए रखना चाहता है।
निष्कर्ष
12 से 14 दिसंबर तक चल रही यह पूरी प्रक्रिया बीजेपी के लिए केवल एक चुनाव नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों की राजनीतिक दिशा तय करने वाली रणनीतिक कवायद है। अब सबकी निगाहें 14 दिसंबर की घोषणा पर टिकी हैं, जब यह स्पष्ट हो जाएगा कि उत्तर प्रदेश की कमान किस नेता को सौंपी जाएगी। यह निर्णय न केवल प्रदेश, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।
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