अखिलेश के चाचा शिवपाल ने साफ किया सपा का स्टैंड!

UP News: शिवपाल यादव ने आरोप लगाया है कि बीजेपी चुनाव में मशीनरी, प्रशासनिक अफसरों और पैसों के दम पर गलत तरीके अपनाती है, लेकिन समाजवादी पार्टी मुकाबला करेगी और जीत हासिल करेगी.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राज्य की राजनीति में अभी से सरगर्मी तेज हो गई है। भले ही चुनाव में अभी वक्त हो, लेकिन सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी रणनीति को धार देने में जुट चुके हैं। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय महासचिव और अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव का एक बयान इन दिनों खासा चर्चा में है। कानपुर दौरे के दौरान दिए गए उनके बयान ने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि सपा की टिकट रणनीति को लेकर अटकलों का बाजार भी गर्म कर दिया है।

अखिलेश के चाचा शिवपाल ने साफ किया सपा का स्टैंड!
अखिलेश के चाचा शिवपाल ने साफ किया सपा का स्टैंड!

दरअसल, शिवपाल सिंह यादव हाल ही में कानपुर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने सपा के कद्दावर मुस्लिम नेता इरफान सोलंकी और सीसामऊ विधानसभा सीट से विधायक नसीम सोलंकी से मुलाकात की। यह मुलाकात राजनीतिक रूप से इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि इरफान सोलंकी और नसीम सोलंकी दोनों ही कानपुर की राजनीति में मजबूत पकड़ रखते हैं। खासतौर पर मुस्लिम वोट बैंक पर उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस मुलाकात के कई सियासी मायने निकाले जाने लगे।

मुलाकात के बाद जब पत्रकारों ने शिवपाल सिंह यादव से सवाल किया कि क्या समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में सोलंकी परिवार को दो टिकट देने की तैयारी कर रही है, तो उनके जवाब ने सबका ध्यान खींच लिया। शिवपाल यादव ने इस सवाल पर स्पष्ट शब्दों में कहा कि समाजवादी पार्टी में टिकट किसी परिवार के नाम पर नहीं, बल्कि पार्टी की नीति और उम्मीदवार की क्षमता के आधार पर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि सपा में एक सीट पर एक ही उम्मीदवार चुनाव लड़ता है और दो टिकट देने जैसी कोई बात नहीं है।

शिवपाल सिंह यादव ने यह भी कहा कि पार्टी का उद्देश्य चुनाव जीतना और प्रदेश में मजबूत सरकार बनाना है। इसके लिए हर सीट पर सबसे मजबूत और लोकप्रिय उम्मीदवार को मैदान में उतारा जाएगा। उन्होंने इशारों-इशारों में यह साफ कर दिया कि सोलंकी परिवार को लेकर जो चर्चाएं चल रही हैं, वे केवल अटकलें हैं और पार्टी ने ऐसा कोई फैसला नहीं किया है।

हालांकि, उनके इस बयान के बावजूद राजनीतिक हलकों में चर्चा थमने का नाम नहीं ले रही है। विपक्षी दल इसे सपा के भीतर अंदरूनी खींचतान और टिकट बंटवारे को लेकर असमंजस से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं, सपा समर्थकों का कहना है कि शिवपाल यादव का बयान पार्टी की अनुशासित और स्पष्ट नीति को दर्शाता है, जिसमें परिवारवाद से ऊपर संगठन और जीत को प्राथमिकता दी जाती है।

इरफान सोलंकी और नसीम सोलंकी की मुलाकात को लेकर भी अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात 2027 की तैयारियों का हिस्सा है और सपा अपने मजबूत नेताओं के साथ जमीनी स्तर पर समीकरण साधने में जुटी है। कानपुर जैसे शहरी क्षेत्र में सोलंकी परिवार का प्रभाव रहा है और ऐसे में सपा उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकती।

शिवपाल सिंह यादव ने अपने बयान में यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाली पार्टी है। उन्होंने कहा कि सपा की राजनीति विकास, सामाजिक न्याय और समानता पर आधारित है। पार्टी किसी एक वर्ग या परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि हर उस व्यक्ति को मौका देती है, जो जनता के बीच मजबूत पकड़ रखता हो और पार्टी की विचारधारा से जुड़ा हो।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शिवपाल यादव का यह बयान आने वाले समय में सपा की टिकट वितरण नीति की झलक देता है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि पार्टी नेतृत्व 2027 के चुनाव में किसी भी तरह का विवाद या असंतोष पैदा नहीं होने देना चाहता। शिवपाल यादव, जो खुद लंबे समय से संगठन और चुनावी राजनीति का अनुभव रखते हैं, इस तरह के बयानों के जरिए पार्टी के भीतर संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं।

कुल मिलाकर, कानपुर दौरे के दौरान शिवपाल सिंह यादव का यह बयान सपा की चुनावी रणनीति, टिकट बंटवारे और आंतरिक संतुलन को लेकर कई संकेत देता है। भले ही उन्होंने दो टिकट की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया हो, लेकिन इतना तय है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ऐसे बयान और मुलाकातें प्रदेश की राजनीति को लगातार गर्माती रहेंगी।

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