लखनऊ में 21 साल की एमबीए की छात्रा खुशी की मौत मामले में नया मोड़ आ गया है. पिता ने बेटी की हत्या की तहरीर दी है लेकिन पुलिस ने इसे आत्महत्या के लिए उकसाने की एफआईआर दर्ज की है.
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बाबू बनारसी दास (BBD) यूनिवर्सिटी की एमबीए छात्रा खुशी की मौत ने अचानक नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में छात्रा के पिता ने अपनी बेटी की मौत को हत्या का मामला बताया है, जबकि पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान रही है। इस घटनाक्रम ने न केवल विश्वविद्यालय परिसर बल्कि पूरे लखनऊ में चर्चा का विषय बन गया है और सवाल खड़े कर दिए हैं कि वास्तव में इस मौत के पीछे क्या कारण है।

खुशी के पिता चंद्रप्रकाश ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी की हत्या उसके तीन दोस्तों रोहित, शुभांशु और आलोक तथा हॉस्टल की वार्डन सुषमा ने मिलकर की। चंद्रप्रकाश ने दावा किया कि ये लोग अपनी साजिश के तहत खुशी को मौत के घाट उतारने की योजना बना रहे थे। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी को जानबूझकर मार डाला गया और यह कोई आकस्मिक घटना नहीं थी। इसी आधार पर उन्होंने लखनऊ के चिनहट थाने में इन सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।
पिता के अनुसार, उनके पास इस हत्या का ठोस सबूत है, जिसमें कुछ डिजिटल और संदिग्ध गतिविधियां शामिल हैं, जो यह संकेत देती हैं कि छात्रा के दोस्तों और हॉस्टल स्टाफ ने मिलकर उसे नुकसान पहुँचाया। चंद्रप्रकाश ने पुलिस और प्रशासन से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच हो और दोषियों को कठोर सजा दी जाए। उनका कहना है कि बेटी खुशी की हत्या के मामले में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।
वहीं, पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच के आधार पर यह मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है। लखनऊ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि जब मृतका के कमरे और हॉस्टल की स्थिति का निरीक्षण किया गया, तो ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला जो हत्या की ओर इशारा करता हो। पुलिस के अनुसार, शुरुआती पोस्टमार्टम और साक्ष्य यह संकेत दे रहे हैं कि छात्रा ने आत्महत्या की है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मामले की जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और सभी पहलुओं को गंभीरता से देखा जा रहा है।
बीबीडी यूनिवर्सिटी की छात्रा खुशी के निधन से विश्वविद्यालय परिसर में शोक की लहर दौड़ गई है। छात्रों और शिक्षकों ने इस घटना पर दुख जताया है और प्रशासन से पूर्ण जांच की मांग की है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने बयान में कहा कि उन्हें घटना की जानकारी मिली है और वे पुलिस जांच में सहयोग कर रहे हैं। साथ ही यह भी कहा कि छात्रा के लिए मानसिक और भावनात्मक सहायता प्रदान करने की व्यवस्था की जा रही है।
राजनीतिक और सामाजिक वर्ग भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं ने परिवार के साथ समर्थन जताते हुए कहा कि इस तरह के मामलों में जल्दबाजी में निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए और जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। उन्हें आशंका है कि यदि मामला ठीक से नहीं सुलझा, तो न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठ सकते हैं।
इस बीच, खुशी के पिता का कहना है कि उन्हें न्याय चाहिए और वे चाहते हैं कि दोषियों को कठोर सजा मिले। उन्होंने मीडिया के माध्यम से जनता से भी अपील की है कि मामले को संवेदनशीलता और तथ्य के आधार पर देखा जाए। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी की मौत सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि युवाओं और छात्र जीवन की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
अब सभी की नजरें चिनहट थाने और पुलिस की आगामी जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। पुलिस को इस मामले में डिजिटल सबूत, दोस्त और हॉस्टल स्टाफ से पूछताछ, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों का गहन विश्लेषण करना है। इसके आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकलेगा कि यह मामला वास्तव में आत्महत्या है या हत्या।
कुल मिलाकर, बीबीडी यूनिवर्सिटी की छात्रा खुशी की मौत का यह मामला सिर्फ एक व्यक्तिगत घटना नहीं रह गया है, बल्कि पूरे शहर और राजनीतिक-सामाजिक परिदृश्य में चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले समय में इस मामले की जांच, रिपोर्ट और कोर्ट की कार्रवाई यह तय करेगी कि न्याय किसे मिलेगा और इस घटना की सच्चाई जनता के सामने कैसे आएगी।