G राम G पर सियासी संग्राम, विपक्षी सांसद वेल में, कार्यवाही बाधित !

 चर्चा के दौरान विपक्ष और अधिक बहस की मांग करता रहा. अपनी मांगें न माने जाने से नाराज विपक्षी सांसद वेल में उतर आए, जिससे सदन में हंगामे की स्थिति बन गई.

संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान जी राम जी बिल पर चर्चा की शुरुआत होते ही लोकसभा का माहौल गरमा गया। सरकार जहां इस बिल को देशहित में एक अहम कदम बता रही है, वहीं विपक्ष ने इसके प्रावधानों पर गंभीर सवाल उठाते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। चर्चा के दौरान विपक्षी सांसदों ने न केवल अपनी आपत्तियां सामने रखीं, बल्कि इस बिल को ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमिटी (जेपीसी) को भेजने की जोरदार मांग भी की।

G राम G पर सियासी संग्राम, विपक्षी सांसद वेल में, कार्यवाही बाधित !
G राम G पर सियासी संग्राम, विपक्षी सांसद वेल में, कार्यवाही बाधित !

विपक्ष का तीखा हमला

कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने सदन में बोलते हुए कहा कि जी राम जी बिल का प्रभाव देश के बड़े तबके पर पड़ेगा और ऐसे में इसे जल्दबाजी में पारित करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यह कोई साधारण विधेयक नहीं है, बल्कि इसके सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक प्रभाव दूरगामी हो सकते हैं।
वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि सरकार इस बिल को बिना पर्याप्त चर्चा और व्यापक परामर्श के पारित कराना चाहती है, जो संसदीय परंपराओं के विपरीत है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसे अहम बिल को जेपीसी के पास भेजा जाना चाहिए, ताकि सभी दलों के सांसद इसके हर पहलू की गहन समीक्षा कर सकें।

विपक्ष का तीखा हमला
विपक्ष का तीखा हमला

वेल में पहुंचे सांसद, बढ़ा हंगामा

चर्चा के दौरान विपक्षी दलों के कई सांसद अपनी सीटों से उठकर वेल में पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। “जेपीसी में भेजो बिल” और “बिना चर्चा नहीं चलेगा” जैसे नारों से सदन गूंज उठा। हालात ऐसे बन गए कि कुछ समय के लिए कार्यवाही बाधित करनी पड़ी।
विपक्ष का कहना था कि सरकार बहुमत के दम पर बिल को पारित कराना चाहती है, जबकि लोकतंत्र में संवाद और सहमति की अहम भूमिका होती है।

सरकार का पक्ष

सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री और संबंधित विभाग के मंत्री ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि जी राम जी बिल पर पहले भी कई स्तरों पर विचार-विमर्श किया जा चुका है और यह बिल पूरी तरह से संविधान के दायरे में है।
सरकार का तर्क है कि इस विधेयक से प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार होगा और आम लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। मंत्री ने यह भी कहा कि विपक्ष केवल राजनीतिक कारणों से भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है।

अन्य विपक्षी दलों का समर्थन

कांग्रेस के अलावा कई अन्य विपक्षी दलों ने भी जेपीसी की मांग का समर्थन किया। उनका कहना है कि इतने व्यापक असर वाले बिल को जल्दबाजी में पारित करना ठीक नहीं है। कुछ सांसदों ने यह भी आशंका जताई कि बिल के कुछ प्रावधानों का दुरुपयोग हो सकता है, इसलिए इसकी गहन जांच जरूरी है।

क्या होता है जेपीसी में

ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमिटी में लोकसभा और राज्यसभा के सांसद शामिल होते हैं। यह समिति किसी भी विधेयक के कानूनी, सामाजिक और आर्थिक पहलुओं की विस्तार से जांच करती है और फिर अपनी रिपोर्ट संसद में पेश करती है। विपक्ष का मानना है कि जी राम जी बिल को जेपीसी में भेजने से इससे जुड़े सभी संदेह दूर हो सकते हैं।

आगे की राह

फिलहाल, जी राम जी बिल पर चर्चा जारी है और यह साफ है कि आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है। सरकार जहां इसे जल्द पारित कराने के पक्ष में है, वहीं विपक्ष इसे रोकने या कम से कम जेपीसी के जरिए जांच कराने पर अड़ा हुआ है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर संसद में सरकार बनाम विपक्ष की सियासी खाई को उजागर कर दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या सरकार विपक्ष की मांग मानकर बिल को जेपीसी में भेजेगी या फिर अपने बहुमत के बल पर इसे पारित कराने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

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