‘तेरे इश्क में’ रिव्यू: पुराना जादू नहीं, लेकिन दिल छूने में कामयाब !

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धनुष और कृति सेनन की इंटेंस रोमांटिक ड्रामा फिल्म तेरे इश्क में रिलीज हो गई है. देखने की प्लानिंग है तो पहले इसका रिव्यू पढ़ लीजिए.

फिल्म ‘तेरे इश्क में’ की कहानी एक ऐसे इश्क से शुरू होती है, जो प्यार से ज्यादा जुनून, पागलपन और टूटन की तरफ बढ़ता है। फिल्म का पहला ही डायलॉग दर्शक को चौंका देता है—
“अगर मैं प्यार में पड़ गया, तो पूरी दिल्ली जला दूंगा।”
जब यह बात शंकर कहता है, तो साफ हो जाता है कि यह कहानी किसी मासूम प्रेम कहानी की नहीं, बल्कि उस आशिक की है, जो इश्क में सब कुछ दांव पर लगाने को तैयार है। यहीं से फिल्म का टोन और प्लॉट सेट हो जाता है।

‘तेरे इश्क में’ रिव्यू: पुराना जादू नहीं, लेकिन दिल छूने में कामयाब !
‘तेरे इश्क में’ रिव्यू: पुराना जादू नहीं, लेकिन दिल छूने में कामयाब !

कहानी की शुरुआत

कहानी की शुरुआत होती है लेह–लद्दाख की बर्फीली वादियों से। भारतीय वायुसेना का पायलट शंकर गुरुक्कल (धनुष) अपने सीनियर्स के आदेश नहीं मानता। वह गुस्सैल, हिंसक और मानसिक तनाव से जूझता हुआ दिखाया गया है। उसके व्यवहार को देखते हुए उसे एक साइकोलॉजिस्ट मुक्ति (कृति सेनन) के पास भेजा जाता है।
शंकर को देखते ही मुक्ति भावुक हो जाती है और यहीं से कहानी फ्लैशबैक में सात साल पीछे चली जाती है।

कहानी की शुरुआत
कहानी की शुरुआत

दिल्ली यूनिवर्सिटी का दौर

फिल्म का बड़ा हिस्सा दिल्ली यूनिवर्सिटी के माहौल में सेट है। यहां मुक्ति साइकोलॉजी में पीएचडी कर रही होती है और शंकर लॉ का छात्र है। शंकर का स्वभाव शुरू से ही आक्रामक और हिंसक दिखाया गया है। मुक्ति अपनी थिसिस के लिए उसे एक केस स्टडी के रूप में चुनती है। उसका मकसद है—
एक हिंसक युवक को शांत और संतुलित इंसान में बदलना।

यहीं से कहानी का असली ड्रामा शुरू होता है। मुक्ति के व्यवहार, उसकी समझदारी और सहानुभूति से शंकर धीरे-धीरे उसके करीब आने लगता है। वह उसे अपना सब कुछ मान बैठता है। लेकिन यह इश्क एकतरफा है। मुक्ति शंकर को एक विषय, एक प्रयोग और एक मरीज से ज्यादा नहीं मानती।

एकतरफा प्यार का जुनून

शंकर का प्यार धीरे-धीरे जुनून में बदलने लगता है। वह पहले ही कह चुका है कि अगर उसे प्यार हुआ, तो वह सब कुछ जला सकता है। फिल्म इसी चेतावनी को आगे बढ़ाती है।
यहां शंकर सिर्फ एक आशिक नहीं, बल्कि एक बेटा भी है, जो अपने अतीत, परिवार और अंदर के दर्द से लड़ रहा है। यही परतें उसके किरदार को गहराई देती हैं।

अभिनय

धनुष एक बार फिर साबित करते हैं कि वह इंटेंस किरदारों के मास्टर हैं। उनका गुस्सा, टूटन, प्यार और पागलपन—सब कुछ आंखों से झलकता है। ‘रांझणा’ की याद जरूर आती है, लेकिन यह शंकर उससे कहीं ज्यादा खतरनाक और डार्क है।
कृति सेनन मुक्ति के किरदार में संयमित और सधी हुई नजर आती हैं। एक साइकोलॉजिस्ट के तौर पर उनका ठहराव और भावनात्मक उलझन कहानी को संतुलन देती है।

निर्देशन और टोन

फिल्म का टोन लगातार भारी और बेचैन करने वाला है। यह फिल्म प्यार को खूबसूरत सपना नहीं, बल्कि विनाश की वजह के तौर पर पेश करती है। निर्देशक ने रोमांस को ग्लैमराइज करने की बजाय उसकी खतरनाक साइड दिखाई है।
हालांकि, फिल्म की रफ्तार कुछ जगहों पर धीमी पड़ती है और कहानी खिंची हुई महसूस होती है।

संगीत और सिनेमैटोग्राफी

फिल्म का संगीत इमोशन को सपोर्ट करता है, लेकिन ‘रांझणा’ जैसी यादगार एल्बम की कमी खलती है। लेह–लद्दाख और दिल्ली की सिनेमैटोग्राफी शानदार है और कहानी के मूड को मजबूती देती है।

फैसला

‘तेरे इश्क में’ ‘रांझणा’ नहीं है, लेकिन अगर आपको इंटेंस, डार्क और जुनूनी प्रेम कहानियां पसंद हैं, तो यह फिल्म आपको सोचने पर मजबूर करेगी। यह फिल्म प्यार में पड़ने की खूबसूरती नहीं, बल्कि उसके खतरनाक अंजाम को दिखाती है।
कमियां होने के बावजूद, यह फिल्म इश्क में पड़ने का मन जरूर करवा देती है—लेकिन डर के साथ।

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