माता प्रसाद पांडेय का सरकार पर निशाना, भर्ती नियम बदलने का दावा !

माता प्रसाद पांडेय ने कहा, “हमारी संस्थाएं कमजोर हो जाएंगी, तो न हम रहेंगे, न आप. आपके पास बड़ा भारी मंदिर है, आप पूजा करेंगे, आपके दस लोग पैर छुएंगे. लेकिन हम लोग सड़क पर उतर जाएंगे.

उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान बुधवार को सदन में उस समय तीखी बहस देखने को मिली, जब नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष पद पर पूर्व डीजीपी प्रशांत कुमार की नियुक्ति को लेकर कड़ा विरोध जताया और इसे नियमों के खिलाफ बताया। नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि सरकार ने इस नियुक्ति के लिए कानून तक में बदलाव कर दिया, जो न केवल अनुचित है, बल्कि संवैधानिक मूल्यों के भी विपरीत है।

माता प्रसाद पांडेय का सरकार पर निशाना, भर्ती नियम बदलने का दावा !
माता प्रसाद पांडेय का सरकार पर निशाना, भर्ती नियम बदलने का दावा !

कानून बदलकर नियुक्ति का आरोप

माता प्रसाद पांडेय ने सदन में कहा कि शिक्षा सेवा चयन आयोग जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील संस्थान का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना और योग्य उम्मीदवारों का निष्पक्ष चयन करना है। ऐसे में आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति पूरी तरह पारदर्शी और निर्धारित नियमों के अनुसार होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि एक पूर्व पुलिस अधिकारी को शिक्षा सेवा चयन आयोग का अध्यक्ष बनाना किस आधार पर उचित ठहराया जा सकता है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “सरकार ने प्रशांत कुमार को अध्यक्ष बनाने के लिए आयोग से जुड़े कानून में बदलाव कर दिया। यह साफ दर्शाता है कि नियम व्यक्ति के अनुसार बदले जा रहे हैं, न कि व्यक्ति को नियमों के अनुसार चुना जा रहा है।” उन्होंने इस कदम को गलत परंपरा करार दिया।

शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि शिक्षा सेवा चयन आयोग का सीधा संबंध शिक्षकों की भर्ती और शिक्षा की गुणवत्ता से है। ऐसे में आयोग के नेतृत्व में ऐसे व्यक्ति को बैठाना, जिसका शिक्षा क्षेत्र से सीधा अनुभव नहीं रहा हो, कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने आशंका जताई कि इससे आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता पर असर पड़ सकता है।

सरकार से जवाब की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से इस नियुक्ति पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि आखिर किन परिस्थितियों में कानून में बदलाव किया गया और क्या यह बदलाव सिर्फ एक व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगा और जरूरत पड़ी तो इसे जनता के बीच भी ले जाएगा।

विज्ञापनों में हिस्सेदारी की मांग

इसके साथ ही माता प्रसाद पांडेय ने सदन में एक और मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले विज्ञापनों में भी विपक्ष की हिस्सेदारी होनी चाहिए। उनका तर्क था कि सरकारी विज्ञापन जनता के पैसों से दिए जाते हैं और इनका इस्तेमाल केवल सत्ता पक्ष के प्रचार के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि विपक्ष को भी इसमें उचित स्थान दिया जाए, ताकि लोकतांत्रिक संतुलन बना रहे।

आखिरी दिन गर्माया सदन

शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन पक्ष और विपक्ष के बीच माहौल काफी गर्म रहा। शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और अन्य अहम मुद्दों पर लंबी बहस हुई। विपक्ष ने जहां सरकार पर मनमानी और नियमों को तोड़ने के आरोप लगाए, वहीं सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताया।

कई अहम मुद्दों पर हुई चर्चा

सत्र के दौरान राज्य की शिक्षा व्यवस्था, कानून-व्यवस्था, रोजगार और विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। विपक्ष ने सरकार से जवाबदेही की मांग की, जबकि सरकार ने अपने फैसलों का बचाव करते हुए कहा कि सभी कदम कानून के दायरे में उठाए गए हैं।

सियासी असर की संभावना

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर उठे इस विवाद का सियासी असर आगे भी देखने को मिल सकता है। विपक्ष इसे आने वाले समय में बड़ा मुद्दा बना सकता है, खासकर तब जब शिक्षक भर्ती और शिक्षा सुधार जैसे सवाल पहले से ही चर्चा में हैं।

कुल मिलाकर, शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन यह मुद्दा सदन की बहस का केंद्र बना रहा और सरकार तथा विपक्ष के बीच टकराव को और तीखा कर गया।

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