लखनऊ की राजनीति में नया मोड़ ! 2022 में सपा-BJP की जीती सीटों पर चौंकाने वाले आंकड़े

यूपी की राजधानी लखनऊ की जिन सीटों पर वर्ष 2022के चुनाव में सपा और बीजेपी ने जीत हासिल की थी, वहां एसआईआर का असर क्या है?

भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के क्रम में उत्तर प्रदेश में कराए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदाता सूची की पहली ड्राफ्ट सूची 6 जनवरी को जारी की गई। इस सूची के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। खासतौर पर राजधानी लखनऊ के जिलावार आंकड़े चौंकाने वाले माने जा रहे हैं, जहां लगभग सभी विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता संख्या में उल्लेखनीय परिवर्तन दर्ज किया गया है। राजनीतिक दल इन आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण कर रहे हैं, क्योंकि आने वाले चुनावों में इसका सीधा असर सीटों के गणित पर पड़ सकता है।

लखनऊ की राजनीति में नया मोड़ ! 2022 में सपा-BJP की जीती सीटों पर चौंकाने वाले आंकड़े
लखनऊ की राजनीति में नया मोड़ ! 2022 में सपा-BJP की जीती सीटों पर चौंकाने वाले आंकड़े

लखनऊ जिले की कुल 9 विधानसभा सीटों में से वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में 7 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और 2 सीटों पर समाजवादी पार्टी (SP) के विधायक निर्वाचित हुए थे। अब SIR के बाद सामने आए नए आंकड़ों ने इन सीटों पर मतदाता संरचना को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है, तो कुछ सीटों पर बड़ी संख्या में नाम कटने या संशोधित होने की बात सामने आ रही है।

लखनऊ की राजनीति में नया मोड़ ! 2022 में सपा-BJP की जीती सीटों पर चौंकाने वाले आंकड़े
लखनऊ की राजनीति में नया मोड़ ! 2022 में सपा-BJP की जीती सीटों पर चौंकाने वाले आंकड़े

मलिहाबाद (SC) विधानसभा सीट, जहां से बीजेपी विधायक जय देवी प्रतिनिधित्व कर रही हैं, वहां मतदाता सूची में बदलाव को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं। ग्रामीण इलाकों और शहरी सीमाओं में पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में नए मतदाता जोड़े गए हैं, जबकि कुछ पुराने नाम हटाए जाने की भी बात सामने आई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसका असर दलित और पिछड़ा वर्ग के वोट बैंक पर पड़ सकता है।

बक्शी का तालाब विधानसभा क्षेत्र, जहां बीजेपी विधायक योगेश शुक्ला हैं, वहां भी मतदाता संख्या में उल्लेखनीय परिवर्तन दर्ज किया गया है। शहरी विस्तार और नई कॉलोनियों के जुड़ने से यहां नए मतदाताओं की संख्या बढ़ी है। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि कुछ इलाकों में वास्तविक मतदाताओं के नाम कटे हैं, जिसे लेकर आपत्तियां दर्ज कराई जा रही हैं।

सरोजनीनगर सीट, जहां से बीजेपी विधायक राजेश्वर सिंह चुने गए थे, राजधानी की सबसे संवेदनशील सीटों में गिनी जाती है। यहां SIR के बाद मतदाता सूची में बदलाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में प्रवासी और नौकरीपेशा मतदाता हैं, जिनके पते और दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान कई नामों में संशोधन हुआ है।

लखनऊ पश्चिम विधानसभा क्षेत्र, जो समाजवादी पार्टी के विधायक अरमान खान का क्षेत्र है, वहां मतदाता सूची में हुए बदलाव को लेकर सपा खासा सतर्क नजर आ रही है। पार्टी का दावा है कि मुस्लिम बहुल इलाकों में मतदाताओं के नामों में कटौती की गई है, जबकि प्रशासन इसे नियमित प्रक्रिया बता रहा है।

लखनऊ उत्तर सीट, जहां से बीजेपी विधायक डॉ. नीरज बोरा निर्वाचित हुए हैं, वहां शहरी मतदाताओं की संख्या में उतार-चढ़ाव देखा गया है। नए मतदाताओं के पंजीकरण के साथ-साथ मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जाने से कुल आंकड़ों में बदलाव आया है।

इसी तरह लखनऊ पूर्व से बीजेपी विधायक ओ.पी. श्रीवास्तव, लखनऊ मध्य से सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा, लखनऊ कैंट से बीजेपी विधायक व उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, और मोहनलालगंज (SC) से बीजेपी विधायक अमरेश कुमार के क्षेत्रों में भी मतदाता सूची में संशोधन हुआ है। खासकर मोहनलालगंज जैसी ग्रामीण और अर्ध-शहरी सीटों पर SIR का असर अधिक स्पष्ट माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, लखनऊ की सभी 9 विधानसभा सीटों पर SIR के बाद सामने आए आंकड़े राजनीतिक दलों के लिए नई रणनीति तय करने का आधार बन सकते हैं। अभी यह केवल ड्राफ्ट सूची है, जिस पर आपत्तियां और दावे दर्ज किए जा सकते हैं। अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इन बदलावों का वास्तविक चुनावी असर किस दिशा में जाएगा, लेकिन इतना तय है कि राजधानी की राजनीति में SIR ने नई बहस और हलचल पैदा कर दी है।

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