एकादशी के पावन पर्व के अवसर पर भी संगम तट पर सुबह से ही घाटों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है और “हर हर गंगे” के जयघोष से पूरा मेला क्षेत्र गूंज रहा है.
प्रयागराज में विश्व प्रसिद्ध माघ मेले का शुभारंभ 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा के पावन स्नान पर्व के साथ भव्य रूप से हो चुका है। संगम की पवित्र रेती पर इन दिनों श्रद्धा, भक्ति और सनातन संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचकर त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं और पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर उमड़ी यह भीड़ माघ मेले की आध्यात्मिक महत्ता को एक बार फिर प्रमाणित कर रही है।

माघ मेले के दौरान हर दिन कोई न कोई धार्मिक पर्व पड़ रहा है, जिससे श्रद्धालुओं का उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है। आज एकादशी के पावन पर्व के अवसर पर भी संगम तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। सुबह से ही विभिन्न घाटों पर स्नान करने वालों का तांता लगा हुआ है। “हर हर गंगे” और “जय मां गंगा” के जयघोष से पूरा मेला क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा हुआ है। श्रद्धालु स्नान के बाद दान-पुण्य, पूजा-अर्चना और कल्पवास से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान कर आध्यात्मिक शांति का अनुभव कर रहे हैं।
माघ मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपराओं का जीवंत प्रतीक भी है। संगम तट पर साधु-संतों के शिविर, अखाड़ों की परंपरागत छावनियां, यज्ञ-हवन और प्रवचन श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं। कल्पवासी श्रद्धालु यहां पूरे एक माह तक नियम-संयम के साथ जीवन व्यतीत करते हैं, जिसे विशेष पुण्यदायी माना जाता है। गंगा तट पर सुबह और शाम होने वाली आरती भी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
मकर संक्रांति को लेकर इस बार श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। माघ मेले का यह पर्व सबसे महत्वपूर्ण स्नान पर्वों में से एक माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष मकर संक्रांति पर एक दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने से देवताओं का दिन प्रारंभ होता है, जिससे इस पर्व का महत्व और भी बढ़ जाता है।
मकर संक्रांति पर संगम स्नान का शुभ मुहूर्त रात 12 बजकर 03 मिनट से प्रारंभ होकर 16 जनवरी की रात 12 बजकर 03 मिनट तक रहेगा। इस पूरे समय को स्नान, दान और जप-तप के लिए विशेष फलदायी बताया जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस दुर्लभ संयोग में किया गया गंगा स्नान, तिल, गुड़, अन्न और वस्त्र का दान कई गुना पुण्य प्रदान करता है। इसी कारण मकर संक्रांति के दिन संगम पर श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
प्रशासन भी माघ मेले को लेकर पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम स्नान और यातायात व्यवस्था को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए हैं। घाटों पर अतिरिक्त पुलिस बल, गोताखोर और मेडिकल टीमों की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
कुल मिलाकर, प्रयागराज का माघ मेला इन दिनों आस्था, भक्ति और सनातन संस्कृति का जीवंत उत्सव बन गया है। संगम तट पर उमड़ता श्रद्धालुओं का जनसैलाब यह दर्शाता है कि आधुनिकता के इस दौर में भी धार्मिक परंपराओं और आस्था की जड़ें कितनी गहरी हैं। मकर संक्रांति के साथ माघ मेले की रौनक और बढ़ने वाली है, जहां लाखों श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाकर आध्यात्मिक ऊर्जा और पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे।
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