जनपद के हैदरगढ़ क्षेत्र में नेशनल हाईवे-731 के टोल प्लाजा पर बुधवार को टोल कर्मचारियों ने एक वकील के साथ कथित मारपीट की. जिसके बाद हैदरगढ़ तहसील बार एसोसिएशन के वकीलओं का गुस्सा फूट पड़ा.
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जनपद के हैदरगढ़ क्षेत्र में नेशनल हाईवे-731 पर स्थित गोतौना टोल प्लाजा एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। बुधवार (14 जनवरी) को लखनऊ हाईकोर्ट जा रहे एक अधिवक्ता के साथ टोल प्लाजा कर्मचारियों द्वारा कथित तौर पर की गई मारपीट के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया। घटना की सूचना मिलते ही वकीलों में आक्रोश फैल गया और बड़ी संख्या में अधिवक्ता कोतवाली पहुंचकर प्रदर्शन करने लगे।

जानकारी के मुताबिक प्रतापगढ़ जनपद के थाना हथगवा क्षेत्र निवासी रत्नेश शुक्ला लखनऊ हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं। बुधवार को वह अपने निजी वाहन से लखनऊ स्थित हाईकोर्ट में न्यायिक कार्यवाही में शामिल होने जा रहे थे। जैसे ही उनका वाहन हैदरगढ़ क्षेत्र के गोतौना टोल प्लाजा पर पहुंचा, वहां मौजूद टोल कर्मियों ने उन्हें बताया कि उनके वाहन का फास्टैग वैध नहीं है और उसकी अवधि समाप्त हो चुकी है।
इस पर अधिवक्ता रत्नेश शुक्ला ने टोल कर्मियों से नकद भुगतान कर रसीद काटने और वाहन आगे बढ़ाने का अनुरोध किया। आरोप है कि नकद भुगतान की रसीद मांगने पर टोल कर्मी उग्र हो गए। पहले दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते गाली-गलौज में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब वकील ने इसका विरोध किया तो टोल कर्मचारियों ने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी।
बताया जा रहा है कि टोल कर्मियों ने लाठी-डंडों से हमला किया, जिससे अधिवक्ता को गंभीर चोटें आईं। घटना के बाद खून से लथपथ वकील को देखकर कुछ देर के लिए टोल प्लाजा पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह बीच-बचाव किया, जिसके बाद घायल वकील को इलाज के लिए ले जाया गया।

घटना की जानकारी मिलते ही हैदरगढ़ तहसील बार एसोसिएशन में आक्रोश फैल गया। बार एसोसिएशन अध्यक्ष अचल कुमार मिश्रा के नेतृत्व में सैकड़ों अधिवक्ता कोतवाली पहुंच गए और टोल प्लाजा प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वकीलों ने आरोप लगाया कि टोल कर्मियों द्वारा की गई यह मारपीट न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि अधिवक्ताओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करती है।
प्रदर्शन कर रहे वकीलों का कहना था कि जब न्याय व्यवस्था से जुड़े लोग ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। अधिवक्ताओं ने पुलिस प्रशासन पर भी लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि टोल प्लाजा पर पहले भी विवाद होते रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
वकीलों ने मांग की कि मारपीट में शामिल सभी टोल कर्मियों की तत्काल पहचान कर उनके खिलाफ सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए और जल्द से जल्द गिरफ्तारी की जाए। इसके साथ ही टोल प्लाजा पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
वहीं, इस पूरे मामले को लेकर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना की जानकारी मिलते ही जांच शुरू कर दी गई है। तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आरोपियों की पहचान की जा रही है। पुलिस का दावा है कि दोषियों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल गोतौना टोल प्लाजा पर हुई इस घटना ने प्रशासन और टोल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिवक्ताओं का आक्रोश और प्रदर्शन यह संकेत दे रहा है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला और तूल पकड़ सकता है।
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