गुजराती भक्तिमय फिल्म ‘लालो’ ने हिंदी दर्शकों के बीच बनाई पहचान , लखनवी चाट, चाय और अपनापन—‘लालो’ की टीम हुई लखनऊ पर फिदा !
लखनऊ ने तो मेरा दिल जीत लिया है—यह शब्द अभिनेता श्रुहद गोस्वामी के हैं, जिन्होंने हाल ही में नवाबों के शहर लखनऊ में बिताए अपने अनुभव को बेहद भावुक अंदाज़ में साझा किया। गुजराती भाषा की भक्तिमय ड्रामा फिल्म ‘लालो – श्री कृष्ण सदा सहायते’ के प्रचार के सिलसिले में फिल्म की पूरी टीम राजधानी लखनऊ पहुँची, जहाँ उन्हें दर्शकों का भरपूर प्रेम और अपनापन मिला।
फिल्म के मुख्य कलाकार श्रुहद गोस्वामी, करण जोशी और निर्देशक अंकित सखिया ने लखनऊ में बिताए अपने प्रवास को यादगार बताया। यह फिल्म अब देशभर में हिंदी दर्शकों के बीच भी अपनी अलग पहचान बना रही है, और इसी क्रम में लखनऊ प्रमोशन टूर का अहम पड़ाव बना।

लखनऊ प्रवास के दौरान कलाकारों ने शहर की मशहूर लखनवी चाट और चाय का स्वाद लिया और नवाबी मेहमाननवाज़ी का अनुभव किया। इसके साथ ही उन्होंने वेव मॉल में प्रशंसकों से मुलाकात की, जहाँ बड़ी संख्या में दर्शक फिल्म से जुड़ते नज़र आए। प्रशंसकों के उत्साह, तालियों और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं ने पूरी टीम को अभिभूत कर दिया।
अभिनेता श्रुहद गोस्वामी ने कहा,
“लखनऊ ने तो मेरा दिल जीत लिया है—यहाँ की गर्मजोशी, स्वादिष्ट चाट और अनगिनत कप चाय। वेव मॉल में हमारे प्रशंसकों से मिलना बेहद खास रहा, जिन्होंने पूरे दिल से हमारी फिल्म देखी और अपार प्रेम दिया। इस शहर की ऊर्जा और अपनापन लंबे समय तक याद रहेगा।”
वहीं अभिनेता करण जोशी ने लखनऊ की तारीफ करते हुए कहा,
“लखनऊ की मेहमाननवाज़ी बेमिसाल है—खाने से लेकर लोगों तक, सब कुछ अपनापन देता है। वेव मॉल में दर्शकों से मिला प्यार अविस्मरणीय है। मैं फिर यहां आने के लिए उत्सुक हूँ।”
फिल्म के निर्देशक अंकित सखिया ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा,
“लखनऊ ने हमें खुले दिल से अपनाया—शानदार भोजन, अद्भुत अपनापन और ढेर सारा स्नेह। वेव मॉल में दर्शकों को फिल्म से जुड़ते देखना हमारे इस सफर को और भी सार्थक बना गया।”
‘लालो – श्री कृष्ण सदा सहायते’ मैनिफेस्ट फिल्म्स द्वारा प्रस्तुत की गई है, जिसके निर्माता पडारिया और जय व्यास हैं। फिल्म में रीवा रच्छ, श्रुहद गोस्वामी और करण जोशी प्रमुख भूमिकाओं में नजर आते हैं। यह फिल्म वर्ष 2025 में रिलीज़ हुई एक भारतीय गुजराती भाषा की भक्तिमय ड्रामा फिल्म है, जिसने अपनी संवेदनशील कहानी और आध्यात्मिक गहराई के कारण दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है।

फिल्म की आत्मा है लालो—एक साधारण पारिवारिक व्यक्ति और रिक्शा चालक, जो जीवन की कठिनाइयों और अपने अतीत की छाया से जूझ रहा है। परिस्थितियाँ जब उसके नियंत्रण से बाहर जाती प्रतीत होती हैं, तो उसका संसार भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर बिखरने लगता है। इसी संघर्ष के बीच जीवन एक अप्रत्याशित मोड़ लेता है, जब उसका सामना दैवीय शक्ति से होता है।
इसके बाद शुरू होती है आस्था, भय, अंतर्द्वंद्व और आशा की एक गहन और सशक्त यात्रा। यह यात्रा न केवल लालो के विश्वास को चुनौती देती है, बल्कि उसे आत्मिक रूप से परिवर्तित भी करती है। यथार्थ से जुड़ी और गहराई से आध्यात्मिक यह फिल्म दर्शकों को लालो के मन और आत्मा की यात्रा में सहभागी बनाती है, जहाँ खोज अंत तक जारी रहती है।
लखनऊ में मिले अपार प्रेम और समर्थन ने यह साबित कर दिया कि ‘लालो – श्री कृष्ण सदा सहायते’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि आस्था और मानव संघर्ष की ऐसी कहानी है, जो भाषा की सीमाओं से परे जाकर सीधे दिल से जुड़ती है।
रिपोर्ट
अनिल कुमार सैनी
9935090081
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