शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ माता, गौ हत्या कानून और संगम स्नान को लेकर सरकार पर निशाना साधा है. बीजेपी के राजनीतिक आरोप खारिज किए और सम्मानजनक समाधान की मांग की.
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार को लेकर तीखा बयान दिया है। उन्होंने गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने और गौ हत्या पर पूरी तरह से रोक लगाने के मुद्दे पर सरकार की नीयत और कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
शंकराचार्य का कहना है कि बीजेपी ने खुद अपने चुनावी वादों और सार्वजनिक मंचों से यह बात कही थी कि वह गौ माता को राष्ट्र माता बनाएगी और देश में गौ हत्या को पूरी तरह बंद करेगी, लेकिन अब सत्ता में होने के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने साफ शब्दों में कहा कि अगर सरकार गौ हत्या पूरी तरह बंद कर दे, तो उनका “मुंह अपने आप बंद हो जाएगा” और उन्हें इस मुद्दे पर बोलने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। उन्होंने इसे सरकार के लिए एक खुली चुनौती बताया। उनका कहना है कि वह किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत नहीं, बल्कि धर्म और समाज के हित में सवाल उठा रहे हैं। शंकराचार्य ने पूछा कि जब बीजेपी ने यह वादा किया था, तो अब उसे पूरा करने से क्यों पीछे हट रही है।
बीजेपी की ओर से यह आरोप लगाया जा रहा है कि शंकराचार्य राजनीति से प्रेरित होकर एक खास पार्टी को निशाना बना रहे हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि अगर सरकार अपने वादों को पूरा कर दे, तो उन्हें बोलने का अवसर ही नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि उनकी आवाज सरकार की निष्क्रियता की वजह से उठ रही है, न कि किसी राजनीतिक मजबूरी के कारण। शंकराचार्य ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी दल के विरोध में नहीं, बल्कि सरकार के फैसलों और नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं।

गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि यह केवल एक भावनात्मक मुद्दा नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि देश में करोड़ों लोग गाय को माता का दर्जा देते हैं और इसके बावजूद सरकार इस पर ठोस निर्णय लेने से बच रही है। उनका कहना है कि अगर सरकार सच में गौ रक्षा को लेकर गंभीर होती, तो अब तक इस दिशा में कानूनी और संवैधानिक कदम उठाए जा चुके होते।
इसके अलावा शंकराचार्य ने माघ मेला प्राधिकरण को लेकर भी तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि क्या मेला प्राधिकरण को यह अधिकार है कि वह शंकराचार्य की मर्यादा और गरिमा पर सवाल उठाए। उनके अनुसार, माघ मेला प्राधिकरण अपने अधिकार क्षेत्र और सीमाओं को भूल गया है। शंकराचार्य ने कहा कि सनातन परंपरा में शंकराचार्य का स्थान सर्वोच्च माना जाता है और किसी भी प्रशासनिक संस्था को उनकी भूमिका या मर्यादा पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासनिक संस्थाएं अक्सर धार्मिक मामलों में अनावश्यक दखल देती हैं, जिससे विवाद की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने कहा कि माघ मेले जैसे धार्मिक आयोजनों में संतों और धर्माचार्यों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अगर प्राधिकरण अपनी सीमाओं में रहकर काम करे, तो टकराव की स्थिति ही न बने।
इस पूरे बयान के बाद सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल जहां शंकराचार्य के बयान को सरकार की नाकामी से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं बीजेपी इसे अनावश्यक विवाद करार दे रही है। पार्टी का कहना है कि गौ संरक्षण को लेकर सरकार लगातार काम कर रही है और इस दिशा में कई राज्यों में सख्त कानून भी बनाए गए हैं।
फिलहाल, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने रुख पर कायम हैं। उनका कहना है कि जब तक गौ हत्या पर पूरी तरह से रोक नहीं लगती और गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने पर ठोस कदम नहीं उठते, तब तक वह इस मुद्दे को उठाते रहेंगे। उनका यह बयान आने वाले दिनों में धर्म और राजनीति के बीच बहस को और तेज कर सकता है।
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