UP Panchayat Election को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने नया दांव चला है. बीजेपी ने इस बार के बजट में विभागवार व्यय की मांगों में सबसे अधिक हिस्सा पंचायती राज विभाग को दिया है.
उत्तर प्रदेश सरकार ने बजट पेश करते हुए साफ संकेत दे दिए हैं कि आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव उसकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली सरकार ने इस बार बजट में पंचायती राज विभाग पर खास मेहरबानी दिखाई है। सरकार ने पंचायती राज विभाग के बजट में 67 प्रतिशत की भारी-भरकम बढ़ोतरी कर सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। इसे सीधे तौर पर पंचायत चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

प्रदेश सरकार के बजट में इस बार विभागवार व्यय की मांगों के लिए कुल 43,545.32 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा पंचायती राज विभाग को मिला है। इस विभाग के लिए 10,695 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो पिछले बजट की तुलना में रिकॉर्ड बढ़ोतरी मानी जा रही है।
पंचायत चुनाव को ध्यान में रखकर रणनीति
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सीधे असर डालने वाला पंचायती राज विभाग पंचायत चुनाव में अहम भूमिका निभाता है। गांवों में विकास कार्य, पंचायत भवन, संपर्क मार्ग, साफ-सफाई, जल निकासी और अन्य बुनियादी सुविधाएं इसी विभाग के माध्यम से संचालित होती हैं। ऐसे में बजट में बड़ी राशि देकर सरकार ने सीधे ग्रामीण मतदाताओं और पंचायत प्रतिनिधियों को साधने की कोशिश की है।
योगी सरकार पहले भी पंचायत चुनावों को गंभीरता से लेती रही है और इस बार बजट में किया गया यह प्रावधान उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। विपक्ष इसे चुनावी बजट करार दे रहा है, जबकि सरकार इसे ग्रामीण विकास को गति देने वाला कदम बता रही है।
PWD और नगर विकास पर भी फोकस
पंचायती राज विभाग के बाद दूसरे नंबर पर लोक निर्माण विभाग (PWD) को सबसे ज्यादा बजट मिला है। प्रदेश में भवन निर्माण, सड़कों और पुलों के विकास के लिए PWD को 9,072.93 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह आवंटन भी पंचायत और शहरी स्थानीय निकायों से जुड़ी राजनीति में अहम माना जा रहा है, क्योंकि सड़क और पुल जैसे मुद्दे सीधे जनता से जुड़े होते हैं।

वहीं नगर विकास विभाग को 4,484 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। शहरी क्षेत्रों में सफाई, पेयजल, सीवरेज और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए इस बजट को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा नियोजन विभाग को 3,830 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जिससे प्रदेश की दीर्घकालिक विकास योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।
ग्रामीण-शहरी संतुलन की कोशिश
बजट में पंचायती राज, PWD और नगर विकास जैसे विभागों पर जोर यह संकेत देता है कि सरकार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में संतुलन साधने की कोशिश कर रही है। खासकर ग्रामीण इलाकों में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका चुनावी माहौल बनाने में अहम होती है। ऐसे में पंचायतों को मजबूत करना राजनीतिक रूप से भी फायदे का सौदा माना जा रहा है।
विपक्ष का आरोप—चुनावी बजट
विपक्षी दलों ने बजट में की गई इस बढ़ोतरी को चुनावी रणनीति करार दिया है। उनका कहना है कि पंचायत चुनाव से पहले सरकार ने बजट के जरिए माहौल अपने पक्ष में करने की कोशिश की है। हालांकि सरकार का दावा है कि यह बजट विकास और सुशासन की नीति का हिस्सा है, न कि किसी चुनावी मजबूरी का परिणाम।
बीजेपी का सियासी गणित
बीजेपी के लिए पंचायत चुनाव बेहद अहम माने जाते हैं, क्योंकि यही चुनाव विधानसभा और लोकसभा चुनावों की जमीन तैयार करते हैं। पंचायत स्तर पर मजबूत पकड़ होने से पार्टी को संगठनात्मक मजबूती मिलती है। ऐसे में बजट के जरिए पंचायती राज विभाग को मजबूत करना बीजेपी के लॉन्ग टर्म सियासी फॉर्मूले का हिस्सा माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, यूपी सरकार का यह बजट केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि आगामी पंचायत चुनाव की राजनीतिक रणनीति भी माना जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बजट में किए गए ये प्रावधान जमीनी स्तर पर कितना असर दिखाते हैं और क्या बीजेपी इस फॉर्मूले के सहारे पंचायत चुनाव में बढ़त बना पाती है या नहीं।