डलमऊ तहसील में बड़ा एक्शन, विकलांग परिवार का आशियाना ढहा !

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न्याय की आस में विकलांग के साथ अन्य लोग भी दर-दर भटकने को मजबूर ,बल्कि उसी गाटा संख्या में कुछ लोगों का मकान अभी भी बना हुआ है..

नरेंद्र त्रिपाठी रायबरेली

रायबरेली जिले के डलमऊ तहसील क्षेत्र से एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां एक विकलांग व्यक्ति का आरोप है कि प्रशासन ने उसके साथ एकतरफा कार्रवाई करते हुए उसका आशियाना तो ढहा दिया, लेकिन उसी सरकारी जमीन पर बने अन्य पक्के मकानों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह मामला थाना जगतपुर क्षेत्र के ग्राम सेवरा का है, जिसने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

डलमऊ तहसील में बड़ा एक्शन, विकलांग परिवार का आशियाना ढहा !
डलमऊ तहसील में बड़ा एक्शन, विकलांग परिवार का आशियाना ढहा !

पीड़ित विकलांग व्यक्ति देवेंद्र कुमार ने इस संबंध में जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपते हुए बताया कि कुछ महीने पहले प्रशासन द्वारा धारा 67 के तहत सरकारी जमीन से अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई की गई थी। इस कार्रवाई में कुछ मकानों को बुलडोजर चलाकर गिरा दिया गया, लेकिन आज भी उसी भूमि पर कई मकान खड़े हैं, जिन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। देवेंद्र कुमार का आरोप है कि लेखपाल और डलमऊ तहसील प्रशासन की मिलीभगत के चलते कुछ लोगों को बचाया गया, जबकि उनके साथ सख्ती बरती गई।

पीड़ित के अनुसार, उनकी जमीन गाटा संख्या 221 में आती है, जो राजस्व रिकॉर्ड में खाद के गड्ढे के रूप में दर्ज है। प्रशासन की कार्रवाई के बाद वे बीते चार महीनों से खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि न तो जिला प्रशासन ने उनकी कोई सुनवाई की और न ही उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था या न्याय मिला। देवेंद्र कुमार ने सवाल उठाया कि जब उनके सिर से छत हटा दी गई, तो उसी जमीन पर बने अन्य मकानों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

इस मामले को लेकर ग्राम सेवरा के ग्रामीणों ने भी मीडिया के सामने अपनी पीड़ा जाहिर की। ग्रामीणों का कहना है कि गाटा संख्या 131, 221 और 222 में से कुछ हिस्सों में ही कार्रवाई हुई, जबकि कई जगह आज भी दो से तीन मंजिला पक्के मकान खड़े हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई चयनात्मक और एकतरफा रही, जिससे प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठना लाज़िमी है।

दरअसल, हर्षिता माथुर, जिलाधिकारी रायबरेली ने 23 अक्टूबर 2025 को आदेश जारी कर इन तीनों गाटा संख्याओं पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। राजस्व रिकॉर्ड के मुताबिक, गाटा संख्या 131 उसर भूमि, गाटा संख्या 222 खलिहान और गाटा संख्या 221 खाद के गड्ढे के रूप में दर्ज है। आदेश के अनुपालन में 26 अक्टूबर 2025 को सुबह करीब 11 बजे तीन-चार अधबने मकानों पर बुलडोजर चलाया गया था।

प्रशासन की ओर से उस समय यह भी कहा गया था कि जिन मकानों में केवल पिलर खड़े हैं या निर्माण अधूरा है, उन्हें गिराया जा रहा है और जो भी मकान सरकारी भूमि पर बने हैं, उन्हें जल्द हटाया जाएगा। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके बाद चार से पांच महीने बीत चुके हैं, बावजूद इसके कई पक्के और बहुमंजिला मकानों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

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ग्रामीणों और पीड़ित का आरोप है कि यदि प्रशासन निष्पक्ष होता, तो सभी अवैध निर्माणों पर समान रूप से कार्रवाई की जाती। उन्होंने आशंका जताई कि हल्का लेखपाल की भूमिका संदेह के घेरे में है और लेन-देन के चलते कुछ मकानों को जानबूझकर छोड़ा गया है।

अब यह मामला पूरी तरह से जिला प्रशासन की कार्यशैली और जवाबदेही से जुड़ गया है। पीड़ित विकलांग देवेंद्र कुमार का साफ कहना है कि उन्हें किसी से विशेष रियायत नहीं चाहिए, बस समान न्याय चाहिए। अब देखना यह होगा कि खबर के सामने आने के बाद जिला प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है और क्या बचे हुए अवैध निर्माणों पर वास्तव में कार्रवाई होती है या नहीं।

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