लखनऊ में हंगामा: UGC के नए नियमों का सवर्ण समाज ने किया विरोध !

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वर्ण मोर्चा के सदस्य पहले परिवर्तन चौक पर शांतिपूर्वक धरने पर बैठे और यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ नारेबाजी की. प्रदर्शनकारियों ने शंखनाद कर अपना विरोध दर्ज कराया.

राजधानी लखनऊ में शनिवार, 21 फरवरी को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब परिवर्तन चौक पर सवर्ण मोर्चा के बैनर तले विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया गया। बड़ी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों को देखते हुए पुलिस ने एहतियातन सख्त रुख अपनाया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया। कुछ समय के लिए इलाके में यातायात और सामान्य गतिविधियां भी प्रभावित रहीं।

लखनऊ में हंगामा: UGC के नए नियमों का सवर्ण समाज ने किया विरोध !
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प्राप्त जानकारी के अनुसार, सवर्ण मोर्चा से जुड़े कार्यकर्ता पहले परिवर्तन चौक पर शांतिपूर्वक धरने पर बैठे थे। उन्होंने यूजीसी के हालिया नियमों के खिलाफ नारेबाजी की और शंखनाद कर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी किए गए नए नियम सवर्ण समाज के हितों के खिलाफ हैं और इससे उच्च शिक्षा व नौकरियों में संतुलन बिगड़ने का खतरा है। उनका आरोप था कि इन नियमों के जरिए एक विशेष वर्ग को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, जिसे वे स्वीकार नहीं करेंगे।

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प्रदर्शन के दौरान हाल ही में सरकारी नौकरी से इस्तीफा देने वाले अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री भी मौके पर पहुंचे। उनके पहुंचते ही प्रदर्शनकारियों का उत्साह और बढ़ गया। अलंकार अग्निहोत्री ने भी यूजीसी के नए नियमों पर सवाल उठाते हुए इसे समाज के एक बड़े वर्ग के साथ अन्याय बताया। उनके समर्थन में नारे लगाए गए और प्रदर्शन कुछ और उग्र होता नजर आया।

इसके बाद सवर्ण मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने परिवर्तन चौक से मार्च निकालने की कोशिश की। हालांकि, पुलिस ने पहले से ही बैरिकेटिंग कर रखी थी और उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया गया। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेट पर चढ़कर नारेबाजी करते दिखे, जिससे माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए लोगों को बसों के जरिए इको गार्डन भेजा गया, जहां उन्हें अस्थायी रूप से रखा गया।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई पूरी तरह से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से की गई। अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन की अनुमति एक सीमित दायरे में थी, लेकिन जब प्रदर्शनकारी मार्च निकालने और बैरिकेडिंग तोड़ने का प्रयास करने लगे, तब पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस का कहना है कि किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए समय रहते कदम उठाया गया।

वहीं, सवर्ण मोर्चा के नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की है। उनका कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें रोका। मोर्चा के नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि यूजीसी के नए नियमों पर सरकार और आयोग ने पुनर्विचार नहीं किया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह के प्रदर्शन किए जा सकते हैं।

फिलहाल परिवर्तन चौक पर भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। यातायात व्यवस्था को भी धीरे-धीरे सामान्य कर दिया गया है। प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और खुफिया एजेंसियों को भी सतर्क किया गया है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की अव्यवस्था को रोका जा सके।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूजीसी के नए नियमों को लेकर अलग-अलग सामाजिक संगठनों में असंतोष बढ़ रहा है। ऐसे में राजधानी लखनऊ में हुआ यह प्रदर्शन आने वाले समय में एक बड़े आंदोलन का रूप भी ले सकता है। फिलहाल प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बना हुआ है, लेकिन स्थिति फिलहाल काबू में बताई जा रही है।

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