बस्ती: जनसेवा केंद्र की आड़ में बड़ा फर्जीवाड़ा !

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बस्ती में फर्जी दस्तावेज गिरोह का भंडाफोड़,जनसेवा केंद्र से चलता था अवैध कारोबार

उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद में फर्जी सरकारी दस्तावेज तैयार करने वाले एक अंतर-जनपदीय गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ कर दिया है। परसरामपुर थाना पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने साहसिक कार्रवाई करते हुए इस संगठित जालसाजी नेटवर्क को उजागर किया, जो जनसेवा केंद्र की आड़ में लंबे समय से सरकारी योजनाओं को नुकसान पहुंचा रहा था। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई।

 बस्ती: जनसेवा केंद्र की आड़ में बड़ा फर्जीवाड़ा !
बस्ती: जनसेवा केंद्र की आड़ में बड़ा फर्जीवाड़ा !

पुलिस को बीते कुछ समय से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि क्षेत्र में फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र, आय-जाति प्रमाण पत्र और अन्य सरकारी दस्तावेज तैयार कर सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है। इन सूचनाओं को गंभीरता से लेते हुए थानाध्यक्ष विश्वमोहन राय के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसमें एसओजी और सर्विलांस सेल को भी शामिल किया गया। गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने परसरामपुर बाजार स्थित एक सहज जनसेवा केंद्र पर छापा मारने की योजना बनाई।

जैसे ही पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने जनसेवा केंद्र पर दबिश दी, वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। कुछ आरोपी मौके से फरार होने की कोशिश करने लगे, लेकिन पहले से की गई घेराबंदी के चलते पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। केंद्र के अंदर का नजारा देख अधिकारी भी हैरान रह गए। वहां सरकारी विभागों के अधिकारियों की नकली मोहरें, कूटरचित दस्तावेज और आधुनिक उपकरण खुलेआम पड़े मिले, जो बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े की ओर इशारा कर रहे थे।

तलाशी के दौरान पुलिस ने उप-जिलाधिकारी, तहसीलदार और पुलिस अधिकारियों के नाम की हूबहू नकली मोहरें बरामद कीं। इसके अलावा अत्याधुनिक लैपटॉप, दो हाई-क्वालिटी प्रिंटर, लेमिनेशन मशीन, इंक पैड और बड़ी संख्या में खाली व भरे हुए फर्जी फॉर्म भी जब्त किए गए। मौके से दर्जनों फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और आय-जाति प्रमाण पत्र बरामद होना इस बात का प्रमाण है कि गिरोह काफी समय से सक्रिय था और बड़े पैमाने पर दस्तावेज तैयार कर रहा था।

पूछताछ में गिरोह के काम करने के तरीके का भी खुलासा हुआ। आरोपी गरीब और अनपढ़ लोगों को अपना निशाना बनाते थे। उन्हें सरकारी पेंशन, मुफ्त सुविधाएं और अन्य लाभ दिलाने का लालच देकर फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र बनवाए जाते थे। इसके बदले में प्रत्येक व्यक्ति से 5 से 10 हजार रुपये तक की वसूली की जाती थी। इन फर्जी प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल न केवल पेंशन लेने में, बल्कि रेल यात्रा में रियायत और भीख मांगने जैसे कार्यों में भी किया जा रहा था।

इस कार्रवाई में पकड़े गए चार अभियुक्तों में से तीन पड़ोसी जनपद गोंडा के निवासी हैं, जबकि एक आरोपी बस्ती का स्थानीय रहने वाला है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह में एक नाबालिग को शामिल किया गया था, ताकि शक की सुई उन पर न जाए। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं इस पूरे फर्जीवाड़े में किसी सरकारी विभाग के कर्मचारी की संलिप्तता तो नहीं है।

पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह ने इस बड़ी सफलता पर टीम की सराहना करते हुए कहा कि जांच अभी जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने इन फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सरकारी लाभ उठाया है, उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अब उन सभी लाभार्थियों की सूची तैयार कर रही है, जिन्होंने इस जनसेवा केंद्र से प्रमाण पत्र बनवाए थे। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

इस कार्रवाई के बाद जिले में सक्रिय जालसाजों के हौसले जरूर पस्त हुए हैं और पुलिस ने साफ संदेश दिया है कि सरकारी योजनाओं और दस्तावेजों के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

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