संभल जामा मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष जफर अली एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। अली सहित 50 से 60 समर्थकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। जिन लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ है, उन पर जुलूस निकालने का आरोप लगा है।
उत्तर प्रदेश के संभल शहर में आज एक नया विवाद जन्म ले चुका है, जहां संभल की शाही जामा मस्जिद प्रबंध समिति के अध्यक्ष ज़फर अली पर जेल से रिहाईं के बाद समर्थकों के साथ जुलूस निकालने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। इस घटना में ज़फर अली के अलावा तक़रीबन 50‑60 अज्ञात समर्थकों का भी जिक्र है, जिन्हें पुलिस के समक्ष खड़े पाया गया।

जुलूस का वीडियो सामने आने के बाद एक्शन
अली पिछले साल जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान हुई हिंसा के मामले में आरोपी हैं। वह इस मामले में 1 अगस्त को मुरादाबाद जेल से रिहा हुए थे। उनकी रिहाई के बाद मुरादाबाद से संभल के बीच करीब 40 किलोमीटर लंबा रोड शो निकाला गया था। रास्ते में उनके काफिले पर कई स्थानों पर पुष्पवर्षा की गई और स्वागत कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। जुलूस का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए यह कार्रवाई की है।

क्यों हुई थी गिरफ्तारी?
बता दें कि 24 नवंबर को जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुए बवाल में जफर अली पर साजिश रचने और गंभीर अपराध में झूठे बयान देने के आरोप लगे थे। इसी मामले में उन्हें 23 मार्च को गिरफ्तार कर मुरादाबाद जेल भेजा गया था। 1 अगस्त को उनकी रिहाई के बाद उन्होंने मुरादाबाद से संभल तक काफिले के साथ यात्रा की। इस दौरान जगह-जगह आतिशबाजी और नारेबाजी हुई, जिसे पुलिस ने कानून-व्यवस्था के लिए खतरा मानते हुए मामला दर्ज किया है।
2024 संभल हिंसा की पृष्ठभूमि
- इस मामले की जड़ें 24 नवम्बर 2024 को हुई संभल हिंसा में हैं, जो उस समय भड़की जब ASI की अदालत-निर्देशित सर्वे कार्यवाही के दौरान शाही जामा मस्जिद के वुज़ू खाने (ablution tank) को खोदने की अफवाह फैली। इससे भारी विवाद हुआ, जिसमें 5 लोगों की मौत हुई और दर्जनों पुलिस personnel घायल हुए थे।
- पुलिस ने इसमें कुल मिलाकर 12 FIR दर्ज की थी, जिसमें ज़फर अली के अलावा सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क सहित अन्य कई लोगों का नाम भी शामिल था।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
- ज़फर अली की इस रिहाई के बाद समर्थक जुलूस निकाला गया, जिसे प्रशासन ने कानून व्यवस्था और निषेधाज्ञा उल्लंघन मानते हुए मामला दर्ज किया है।
- यह घटना संवेदनशील माहौल में फिर से धार्मिक तनाव को भड़काने वाली ठहर सकती है, खासकर सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।
निष्कर्ष
ज़फर अली पर इस जुलूस मामले में दर्ज FIR ने इस विवाद को एक बार फिर राजनीति और कानून की दृष्टि से उजागर कर दिया है। जेल से रिहाईं के बाद मनाए गए उत्सव से संबंधित यह घटना निषेधाज्ञा की अनदेखी और संवेदनशील धार्मिक भावनाओं के संदर्भ में खतरनाक हो सकती है।
यदि आप चाहें, तो इस मामले में CCTV फुटेज, आरोपियों की पहचान, SIT की रिपोर्ट या प्रशासनिक जांच पर और गहराई से जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
Also Read :
“माला पहनाने के बहाने स्वामी प्रसाद मौर्या पर हमला – पीछे से युवक ने मारा थप्पड़”