बिहार में सीएम नीतीश ने डोमिसाइल नीति लागू करने का ऐलान कर बड़ा चुनावी दांव चला है, खासकर युवाओं को बड़ी खुशखबरी दी है। जानें क्या है डोमिसाइल नीति, इससे किसे और कितना होगा फायदा?
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शिक्षा विभाग में 40% डोमिसाइल आरक्षण लागू करने का ऐलान किया। यह नीति आगामी TRE‑4 (Teacher Recruitment Exam‑4) से प्रभावी होगी, जिसका आयोजन 2025 में किया जाना है । कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे अधिकारिक रूप से लागू किया गया, जिसमें अब शिक्षा विभाग की स्थायी नियुक्तियों में बिहार निवासियों को प्राथमिकता दी जाएगी।

इससे पहले भी नीतीश ने कई ऐलान किये हैं लेकिन नीतीश के इस दांव का काट विपक्ष के लिए खोजना मुश्किल होगा। मंगलवार को नीतीश कैबिनेट ने फैसला लिया कि शिक्षा विभाग के अधीन अध्यापक नियुक्तियों में 98 प्रतिशत सीट बिहार के लोगों के आरक्षित होंगी। मंत्रिमंडल ने बिहार राज्य विद्यालय अध्यापक नियुक्ति स्थानांतरण अनुशासनात्मक कार्रवाई एवं सेवा शर्त संशोधन नियमावली 2025 की मंजूरी दे दी।
डोमिसाइल नीति क्या है?
डोमिसाइल का मतलब है—किसी व्यक्ति का स्थायी निवास, जैसे कि वह क्षेत्र जहां वह जन्मा, पढ़ा या नौकरी करता है। डोमिसाइल नीति के तहत, सरकारी भर्ती में केवल वही उम्मीदवार आरक्षित श्रेणी में आते हैं जो उस राज्य के वास्तविक निवासी हैं
नीति की संरचना: किसे मिलेगा लाभ?
- शिक्षा विभाग में 40% सीटें बिहार के निवासियों के लिए आरक्षित रहेंगी, जो बिहार में मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षा पास किए हों ।
- पहले से लागू जातिगत आरक्षण (50%) और EWS (10%) के बाद 35% महिला क्षैतिज आरक्षण भी बिहार निवासियों के लिए लागू है। इसके परिणामस्वरूप लगभग 98% पद बिहारियों के लिए सुनिश्चित हो गए हैं, और सिर्फ 15.6% सीटें बाहरी उम्मीदवारों के लिए बची हैं ।
राजनीतिक प्रभाव और आगामी चुनौतियाँ
- सरकार का दावा है कि यह कदम युवा वर्ग को केंद्र में रखते हुए हुआ है, जिससे NDA गठबंधन को चुनाव में लाभ मिल सकता है।
- वहीं, विपक्षी महागठबंधन ने आरोप लगाया है कि यह नीतिगत निर्णय उनकी घोषणाओं को ही “अपना” बताकर लागू किया गया है—विरोधियों ने इसे राजनीतिक जीत की बाबत बताया है ।
नीतीश के ऐलान पर गरमाई सियासत

बिहार में डोमिसाइल नीति की घोषणा पर राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा, “जहां तक डोमिसाइल की बात है, हमने इस बात को पहले ही कहा था कि जब हमारी सरकार आएगी , तो हम इसे लागू करेंगे। यह सरकार वही कर रही है जो तेजस्वी कह रहा है। आने वाले दिनों में आप देखना कि वे ‘माई बहन मान’ योजना की भी कॉपी करेंगे। उनके पास अपना कोई विजन या रोडमैप नहीं है…”
सीएम नीतीश के इस फैसले पर प्रशांत किशोर ने कहा कि यह लोकतंत्र की जीत है, जनता की जीत है। उन्होंने सीएम नीतीश पर करारा हमला बोला और कहा, 20 साल में इन्होंने कुछ नहीं किया, डोमिसाइल के लिए छात्र संघर्ष कर रहे थे। जब इन्होंने देख लिया है कि जनता ने उन्हें हटाने का मन बना लिया है, तो अब डोमिसाइल नीति लागू कर रहे हैं। अब बिहार में डोमिसाइल लागू करने से जनता भ्रम में आने वाली नहीं है।
वहीं, जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि सीएम नीतीश ने राज्यहित में डोमिसाइल नीति लागू करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। हमने तो ये बड़ा फैसला बिहार के युवाओं के हित में लिया है लेकिन अब विपक्ष, खास कर राजद यह नजीर पेश करे कि हरियाणा से लाकर आप राज्यसभा में लोगों को नामित नहीं करेंगे, ये लोग बिहार के कार्यकर्ताओं की हाकमरी करते हैं। ऐसा करना कब बंद करेंगे।
बिहार में डोमिसाइल का मुद्दा नया नहीं
डोमिसाइल का मुद्दा बिहार के लिए नया नहीं है। यह पहले से ही नीतीश के लिए चुनावी मुद्दा रहा है। साल 2020 के विधानसभा चुनाव में भी सीएम नीतीश कुमार ने डोमिसाइल नीति लागू करने का वादा किया था। लेकिन, जब जीत मिली और नीतीश की सरकार बनी तो सीएम नीतीश ने इसे लागू भी कर दिया। मगर ये लंबे समय तक नहीं रह पाया और ढाई साल बाद जुलाई 2023 में इसे खत्म भी कर दिया गया था। उस वक्त सरकार ने तर्क दिया था कि स्कूलों में मैथ्स और साइंस पढ़ाने के लिए अच्छे टीचर्स नहीं मिल रहे थे।
डोमिसाइल नीति हटाने के बाद प्रदेश में लंबे समय तक छात्रों ने आंदोलन भी किया और विरोध प्रदर्शन के साथ नारा दिया गया था- ‘वोट दे बिहारी और नौकरी ले बाहरी, अब ये नहीं चलेगा।’ अब सीएम नीतीश का ये फैसला ऐसे समय में आया है, जब राज्य में चुनावी माहौल गरम है और विपक्ष लगातार सरकार पर रोजगार और शिक्षा के मोर्चे पर विफल रहने के आरोप लगा रहा है।
डोमिसाइल पॉलिसी लागू करना जरूरी क्यों
- उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी बिहार में आवेदन करते थे, इससे स्थानीय युवाओं को अपने ही राज्य में नौकरी नहीं मिल रही थी।
- बिहार में बेरोजगारी से राहत मिलेगी और बाहरी अभ्यर्थियों की नियुक्ति से स्थानीय युवाओं को नौकरी में प्राथमिकता मिलेगी।
- बिहार के स्कूलों में पढ़ाने के लिए स्थानीय भाषा, बोली को जानना जरूरी है, बाहरी अभ्यर्थियों को यह समझ अपेक्षाकृत कम होती है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
- उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान जैसे राज्यों में शिक्षक भर्ती में डोमिसाइल नीति पहले से अनिवार्य है। ऐसे में बिहार में डोमिसाइल लागू करना जरूरी था।
- डोमिसाइल लागू होने से बिहार के छात्रों को राहत मिलेगी, लेकिन यह शिक्षा व्यवस्था की व्यापक सुधार प्रक्रिया का सिर्फ एक हिस्सा होगी।
- हालांकि डोमिसाइल नीति लागू होने के बाद नौकरी के लिए भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता, पाठ्यक्रम की गुणवत्ता और प्रशिक्षण तंत्र जैसे पहलुओं पर भी समान रूप से ध्यान देना जरूरी होगा।
ऐसे में कुल मिलाकर, सीएम नीतीश का ये बड़ा चुनावी दांव बिहार के युवाओं को स्थानीय अवसरों में प्राथमिकता देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले विधानसभा चुनाव में भी साफ देखा जा सकता है और जदयू नीत एनडीए को मिल सकता है।
Also Read :
“राज्यसभा में जोरदार हंगामा – विपक्ष के विरोध से कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित”