“सीएम योगी की समीक्षा बैठक से गैरहाज़िर रहे 5 अफसर, कमिश्नर ने तुरंत दिखाया सख्त रुख”

सीएम योगी की समीक्षा बैठक में पांच अधिकारी अनुपस्थित रहे। इन सभी अधिकारियों के खिलाफ मंडलायुक्त ने एक्शन लिया है। इन सभी का एक दिन का वेतन रोकने का आदेश जारी किया गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी सख़्त कार्यशैली और अनुशासनप्रिय छवि के लिए जाने जाते हैं। उनकी प्राथमिकताओं में विकास कार्यों की समयबद्ध समीक्षा और अधिकारियों की जवाबदेही सबसे अहम मानी जाती है। इसी क्रम में मंगलवार को राजधानी लखनऊ में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उस समय हैरानी हुई, जब पांच वरिष्ठ अधिकारी अनुपस्थित पाए गए। बैठक की गंभीरता और महत्व को देखते हुए यह अनुपस्थिति न केवल सवाल खड़े करती है बल्कि शासन-प्रशासन की संवेदनशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।

"सीएम योगी की समीक्षा बैठक से गैरहाज़िर रहे 5 अफसर, कमिश्नर ने तुरंत दिखाया सख्त रुख"
“सीएम योगी की समीक्षा बैठक से गैरहाज़िर रहे 5 अफसर, कमिश्नर ने तुरंत दिखाया सख्त रुख”

मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक का महत्व

मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक का महत्व
मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक का महत्व

इस बैठक में सीएम योगी प्रदेश के विभिन्न विकास कार्यों, कानून-व्यवस्था की स्थिति और केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करने वाले थे। सभी जिलों के अधिकारी और विभागीय प्रमुखों को स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि बैठक में समय पर उपस्थित रहें और विभागीय प्रगति रिपोर्ट लेकर आएं। मुख्यमंत्री योगी की बैठकों में आमतौर पर समय की पाबंदी और सख्ती के लिए जाना जाता है।

अनुपस्थित रहे पांच अफसर

जब बैठक शुरू हुई तो पाया गया कि पांच अहम अधिकारी बैठक में मौजूद नहीं हैं। इनमें एक जिले के डीएम, दो विभागीय प्रमुख और दो वरिष्ठ अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। इन अधिकारियों की अनुपस्थिति से न केवल मुख्यमंत्री नाराज हुए बल्कि बैठक की कार्यवाही पर भी असर पड़ा। सूत्रों के अनुसार, कुछ अधिकारियों ने अनुपस्थिति का कोई ठोस कारण भी नहीं बताया था।

कमिश्नर का तुरंत एक्शन

जैसे ही मामला सामने आया, बैठक की देखरेख कर रहे मण्डलायुक्त (कमिश्नर) ने त्वरित कार्रवाई की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब किया और चेतावनी जारी की कि भविष्य में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कमिश्नर ने सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिया कि मुख्यमंत्री की बैठक सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें अनुपस्थित रहने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तय है।

सीएम योगी का सख्त संदेश

मुख्यमंत्री योगी ने बैठक में ही दो टूक कहा कि जनता की सेवा और विकास कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा—
“जो भी अधिकारी जनता से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा बैठक को गंभीरता से नहीं लेगा, वह जिम्मेदारी निभाने के लायक नहीं है। अनुशासनहीनता और लापरवाही की कोई जगह प्रशासन में नहीं हो सकती।”

अधिकारियों पर गिरेगी गाज?

अनुपस्थित अधिकारियों के खिलाफ क्या सख्त कदम उठाए जाएंगे, इस पर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि शासन स्तर से इन अधिकारियों की रिपोर्ट मांगी गई है और जल्द ही कार्रवाई हो सकती है। संभावना जताई जा रही है कि कुछ अधिकारियों का तबादला या निलंबन भी किया जा सकता है।

जनता और कर्मचारियों की प्रतिक्रिया

इस घटना पर आम लोगों और सरकारी कर्मचारियों ने भी प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने कहा कि जब मुख्यमंत्री खुद विकास की समीक्षा के लिए समय निकालते हैं, तो अधिकारियों का गैरहाजिर रहना बेहद गैरजिम्मेदाराना है। वहीं कर्मचारियों का कहना था कि इस तरह की सख्ती जरूरी है ताकि जनता से जुड़े मुद्दों पर समय पर काम हो सके।

पहले भी दे चुके हैं चेतावनी

यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताई हो। इससे पहले भी कई बार बैठक या निरीक्षण के दौरान गैरमौजूद पाए जाने वाले अधिकारियों को फटकार लगाई गई है। मुख्यमंत्री ने कई मौकों पर साफ कहा है कि उनकी प्राथमिकता जनता और विकास है, और इस काम में किसी भी तरह की कोताही स्वीकार नहीं होगी।

प्रशासन में बढ़ी सख्ती

कमिश्नर की तत्काल कार्रवाई के बाद अब जिलों और विभागों में भी अफसरों पर दबाव बढ़ गया है। सभी अधिकारियों को साफ संदेश मिल गया है कि मुख्यमंत्री की बैठकों में लापरवाही अब महंगी साबित हो सकती है। प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि आने वाले समय में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

निष्कर्ष

सीएम योगी की समीक्षा बैठक से अनुपस्थित रहे पांच अधिकारियों का मामला एक बड़ा सबक है। यह साफ दिखाता है कि मुख्यमंत्री की नज़र में जवाबदेही सर्वोपरि है। कमिश्नर की तुरंत की गई कार्रवाई ने संदेश दे दिया है कि प्रशासन में अब ढिलाई की कोई जगह नहीं। यह घटना अधिकारियों के लिए चेतावनी है कि जनता की योजनाओं और विकास कार्यों को हल्के में लेना अब भारी पड़ सकता है।

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