“आर्ट जैम 2025: नन्हें कलाकारों ने बिखेरी रंगों की खुशियां”

लखनऊ के मॉडर्न स्कूल के सारनाथ हॉल में 6 सितम्बर का दिन उत्साह, उमंग और रचनात्मकता से भरा हुआ नजर आया। अवसर था आर्ट जैम 2025 का, जहां शहरभर से आए लगभग 200 बच्चों ने अपने रंगों और कल्पनाशक्ति से एक खाली दीवार को खुशियों और सपनों से भरे भव्य म्यूरल (भित्ति-चित्र) में बदल दिया।

"आर्ट जैम 2025: नन्हें कलाकारों ने बिखेरी रंगों की खुशियां"
“आर्ट जैम 2025: नन्हें कलाकारों ने बिखेरी रंगों की खुशियां”

बच्चों का रंगों से संवाद

इस आयोजन में 4 वर्ष से लेकर 15 वर्ष तक के नन्हें-मुन्ने कलाकारों ने भाग लिया। दीवार पर ब्रश और रंगों की छटाओं ने मिलकर ऐसी कहानी कही, जिसमें खुशियां, दोस्ती, प्रकृति और सपनों का संसार झलक उठा। बच्चों ने अपनी कल्पनाओं के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि कला सिर्फ चित्र बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भावनाओं और सोच को व्यक्त करने का एक जीवंत माध्यम है।

विभिन्न विद्यालयों की भागीदारी

विभिन्न विद्यालयों की भागीदारी
विभिन्न विद्यालयों की भागीदारी

आर्ट जैम 2025 में शहर के कई प्रतिष्ठित विद्यालयों के छात्र-छात्राएँ शामिल हुए। इनमें सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (सी.एम.एस.), ला मार्टिनियर और सेठ एम.आर. जयपुरिया जैसे नामी स्कूलों के बच्चे प्रमुख रूप से मौजूद रहे। सभी बच्चों ने मिलकर इस विशाल म्यूरल को तैयार किया, जिसमें किसी की कल्पना में उड़ते परिंदे थे, तो किसी ने इंद्रधनुषी सपनों का संसार सजाया।

कला के माध्यम से एकता और टीमवर्क

कला के माध्यम से एकता और टीमवर्क
कला के माध्यम से एकता और टीमवर्क

इस आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि इसमें किसी तरह की प्रतिस्पर्धा नहीं थी। बच्चे अपनी-अपनी कल्पना को रंगों में ढालते हुए एक-दूसरे के साथ सहयोग कर रहे थे। यह केवल कला प्रदर्शन नहीं, बल्कि टीमवर्क, सहयोग और सामूहिक रचनात्मकता का अनूठा उदाहरण था। आयोजकों ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में आत्मविश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण का विकास करना है।

बच्चों की कल्पनाओं में छिपा संदेश

दीवार पर बने चित्रों में जहां एक तरफ प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश था, वहीं दूसरी ओर भाईचारे और शांति की भावना भी झलक रही थी। कई बच्चों ने अपने चित्रों में पेड़-पौधे, नदियाँ और पक्षियों को प्रमुखता दी, तो कुछ ने भविष्य के सपनों का संसार गढ़ा। इस दौरान उपस्थित अभिभावकों और शिक्षकों ने बच्चों की रचनात्मकता की जमकर सराहना की।

उत्साह और उमंग का संगम

सारनाथ हॉल में रंग-बिरंगे रंगों की खुशबू और बच्चों की खिलखिलाहट से वातावरण जीवंत हो उठा। बच्चों की उत्साहपूर्ण भागीदारी और उनकी आंखों में चमक इस बात का सबूत थी कि कला उनके लिए केवल एक शौक नहीं, बल्कि आनंद और आत्मअभिव्यक्ति का जरिया है।

आयोजकों की पहल

आयोजकों का कहना था कि आर्ट जैम जैसे कार्यक्रमों का उद्देश्य बच्चों की रचनात्मकता को मंच प्रदान करना है। इससे न केवल बच्चों की सोच का विकास होता है बल्कि उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ता है। आयोजकों ने यह भी बताया कि आने वाले वर्षों में इस कार्यक्रम को और बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल सके।

बच्चों की मुस्कान में झलकी सफलता

जब कार्यक्रम का समापन हुआ और सभी बच्चों ने अपनी कलाकृतियों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं, तो उनके चेहरे पर गजब की खुशी थी। यह खुशी सिर्फ चित्र बनाने की नहीं थी, बल्कि अपने अंदर के कलाकार को खोजने और उसे दूसरों के सामने व्यक्त करने की संतुष्टि की थी।

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