उपराष्ट्रपति पद पर सीपी राधाकृष्णन का कब्जा, 452 वोट से सफलता !

सीपी राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति का चुनाव जीत गए हैं। विपक्षी इंडिया अलायंस की ओर से बी सुदर्शन रेड्डी को हार मिली है। सीपी राधाकृष्णन को 452 वोट मिले हैं। विपक्ष के उम्मीदवार रेड्डी को 300 वोट मिले हैं।

भारत ने नया उपराष्ट्रपति चुन लिया है। शनिवार को हुए चुनाव में एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने शानदार जीत दर्ज की। उन्हें कुल 452 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंदी उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट प्राप्त हुए। इस तरह राधाकृष्णन ने स्पष्ट बहुमत के साथ विजय हासिल करते हुए देश के अगले उपराष्ट्रपति बनने का गौरव प्राप्त किया।

उपराष्ट्रपति पद पर सीपी राधाकृष्णन का कब्जा, 452 वोट से सफलता !
उपराष्ट्रपति पद पर सीपी राधाकृष्णन का कब्जा, 452 वोट से सफलता !

संसद भवन में हुआ मतदान

उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों द्वारा किया गया। सांसद सुबह से ही संसद भवन में वोट डालने पहुंचे। मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई और शाम को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतगणना की गई। नतीजों की घोषणा होते ही एनडीए खेमे में जश्न का माहौल छा गया।

भारी बहुमत से जीत

सीपी राधाकृष्णन की जीत को भारी बहुमत कहा जा सकता है। 452 वोटों के साथ उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी पर स्पष्ट बढ़त बनाई। बी. सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट मिले, जिससे साफ हो गया कि विपक्ष ने भी मजबूती से मुकाबला किया, लेकिन एनडीए का आंकड़ा कहीं अधिक रहा। चुनाव परिणाम ने यह भी दिखा दिया कि संसद में एनडीए का प्रभावी दबदबा बरकरार है।

कौन हैं सीपी राधाकृष्णन?

सीपी राधाकृष्णन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता हैं। वे लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहे हैं और संगठनात्मक स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। तमिलनाडु से ताल्लुक रखने वाले राधाकृष्णन अपनी साफ-सुथरी छवि और अनुभव के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने संसद में सांसद और पार्टी संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है। अब उपराष्ट्रपति के रूप में वे उच्च सदन राज्यसभा के सभापति का दायित्व भी संभालेंगे।

बी. सुदर्शन रेड्डी का संघर्ष

विपक्ष ने बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाया था। रेड्डी ने चुनाव में पूरा दम लगाया और उन्हें 300 सांसदों का समर्थन भी मिला। हालांकि, यह आंकड़ा जीत दिलाने के लिए पर्याप्त नहीं रहा। विपक्ष की ओर से चुनावी नतीजे को “लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा” बताते हुए स्वीकार किया गया।

उपराष्ट्रपति पद का महत्व

भारत का उपराष्ट्रपति संविधान में दूसरा सबसे बड़ा पद है। उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति होते हैं और सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से संचालित करने की जिम्मेदारी उन्हीं पर होती है। इस लिहाज से राधाकृष्णन का कार्यकाल बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संसद में कई अहम विधेयकों और नीतिगत निर्णयों के दौरान उनकी भूमिका निर्णायक होगी।

एनडीए खेमे में जश्न

चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद भाजपा और एनडीए खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई। नेताओं ने राधाकृष्णन को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर उन्हें शुभकामनाएं दीं। वहीं, तमिलनाडु में भी उनके समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों और मिठाइयों के साथ जश्न मनाया।

आगे की राह

सीपी राधाकृष्णन के सामने अब बड़ी चुनौती होगी कि वे राज्यसभा को सुचारु ढंग से चलाएं। हाल के वर्षों में संसद में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और गतिरोध देखने को मिले हैं। ऐसे में सभापति के रूप में उनकी भूमिका बेहद अहम होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि राधाकृष्णन का अनुभव और शांत स्वभाव उन्हें इस जिम्मेदारी को निभाने में मदद करेगा।

Also Read :

“सपा नेता ने की नितिन गडकरी की तारीफ, बोले- ‘सबसे अच्छा काम किया है’”