अयोध्या में राम मंदिर के निकट अंगद टीले पर गिलहरी की एक मूर्ति स्थापित की गई है। इस मूर्ति की स्थापना श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट द्वारा करवाई गई। आइए ऐसे में जानते हैं कि रामायण में गिलहरी का क्या योगदान था।
अयोध्या में भव्य राम मंदिर के पास हाल ही में एक अनोखी और आकर्षक मूर्ति स्थापित की गई है। यह मूर्ति किसी देवता या वीर योद्धा की नहीं, बल्कि गिलहरी की है। गिलहरी की इस विशाल मूर्ति को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट द्वारा अंगद टीले पर स्थापित किया गया है। इसे देखकर पहली नज़र में यह साधारण प्रतीत हो सकता है, लेकिन रामायण में गिलहरी की भूमिका को देखते हुए इसे बेहद महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक माना जा रहा है।

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट ने गिलहरी की इस मूर्ति की स्थापना का मुख्य उद्देश्य रामायण में इसकी भूमिका को सम्मान देना बताया है। ऐसा कहा जाता है कि गिलहरी ने रामायण के युद्ध काल में भगवान राम और उनके सेनापति हनुमान के साथ महत्वपूर्ण सहयोग दिया था। यह न केवल एक जानवर की भूमिका थी, बल्कि यह मित्रता, निष्ठा और साहस का प्रतीक भी है। मंदिर परिसर में गिलहरी की मूर्ति इस तरह स्थापित की गई है कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे यह मंदिर को निहार रही हो, जो दर्शकों को गहरी भावना और स्मरण कराता है कि हर जीव का योगदान मायने रखता है।
रामायण में गिलहरी का योगदान विशेष रूप से राम और सीता के लिए संदेशवाहक और सूचनाएँ लाने वाले के रूप में रहा। गिलहरी ने अनेक बार भगवान राम की सेना और अन्य पात्रों को जरूरी जानकारी पहुँचाने में मदद की। इसके अलावा, गिलहरी ने संकट की घड़ी में अपने साहस और बुद्धिमत्ता से कई महत्वपूर्ण घटनाओं में योगदान दिया। यही वजह है कि मंदिर ट्रस्ट ने इसे मान्यता देने और श्रद्धांजलि स्वरूप मूर्ति स्थापित करने का निर्णय लिया।

इस मूर्ति की स्थापना न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पर्यटकों और भक्तों के लिए एक आकर्षक केंद्र भी बन गई है। मूर्ति की भव्यता और उसकी प्राकृतिक अभिव्यक्ति इसे देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर देती है। गिलहरी की मूर्ति के माध्यम से यह संदेश भी मिलता है कि रामायण में केवल भगवान राम या उनके प्रमुख सहायक ही नहीं, बल्कि छोटे छोटे जीव-जंतु भी कथा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम बच्चों और युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक है। यह उन्हें यह सिखाता है कि साहस, निष्ठा और समझदारी का महत्व किसी भी आकार या स्थिति से नहीं मापा जा सकता। गिलहरी की मूर्ति यह संदेश देती है कि रामायण जैसी महाकाव्य कथा में हर जीव का योगदान महत्व रखता है, चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न हो।
भक्तगण और पर्यटक अब राम मंदिर परिसर में गिलहरी की इस मूर्ति को देखने के लिए विशेष रूप से आते हैं। कई लोग इसे देखकर आश्चर्य और प्रसन्नता व्यक्त कर रहे हैं। वहीं, मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि भविष्य में वे रामायण के अन्य पात्रों और उनके योगदान को दर्शाने वाले स्मारक और मूर्तियों की स्थापना पर भी विचार कर रहे हैं।
इस प्रकार, अयोध्या में गिलहरी की मूर्ति केवल एक कलात्मक स्थापना नहीं, बल्कि यह रामायण के गहन संदेश और जीवन मूल्यों का प्रतीक बन गई है। यह मूर्ति भक्तों को याद दिलाती है कि भगवान राम के जीवन में हर जीव का महत्व था और उनकी निष्ठा और योगदान कथा में अमर है। गिलहरी की यह मूर्ति आज राम मंदिर परिसर में श्रद्धा, सांस्कृतिक गौरव और कथा की जीवंत स्मृति का प्रतीक बनकर खड़ी है।
इस कदम से अयोध्या न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी समृद्ध हो रही है। गिलहरी की यह मूर्ति दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि रामायण केवल युद्ध और वीरता की कहानी नहीं, बल्कि मित्रता, निष्ठा, सहयोग और हर जीव के योगदान की कहानी भी है।
अंततः, गिलहरी की यह मूर्ति राम मंदिर परिसर में एक अनोखा आकर्षण बन चुकी है, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए न केवल देखने योग्य है, बल्कि रामायण की गहन शिक्षाओं को समझने का अवसर भी प्रदान करती है।