महागठबंधन में शामिल भाकपा-माले ने 20 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है। इस लिस्ट में समाज के सभी वर्गों को टिकट दिया गया है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं। पहले चरण के नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन अब भी महागठबंधन (राजद, कांग्रेस, वामदल) ने यह आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं किया है कि कौन सी पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इस बीच महागठबंधन का अहम घटक दल भाकपा (माले) यानी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन ने अपने 20 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। पार्टी ने पहले और दूसरे चरण के लिए जिन उम्मीदवारों की घोषणा की है, वे राज्य के अलग-अलग इलाकों से मैदान में उतरेंगे।

भाकपा-माले की भूमिका और महागठबंधन में हिस्सेदारी

भाकपा-माले बिहार में वामपंथ की प्रमुख ताकत रही है और पिछले चुनावों में इसका प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा था। 2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 12 सीटें जीती थीं, जिनमें से अधिकांश सीटें भोजपुर, सीवान, दरभंगा और पटना के ग्रामीण इलाकों से थीं। इस बार भी पार्टी महागठबंधन का हिस्सा है और उसे करीब 20 सीटें दी गई हैं। पार्टी का कहना है कि वह जन मुद्दों पर मजबूती से लड़ाई लड़ेगी और बीजेपी-जेडीयू गठबंधन के खिलाफ मोर्चा संभालेगी।
पहले चरण में 14 सीटों पर उतरेगी भाकपा-माले
पहले चरण में भाकपा-माले ने 14 उम्मीदवारों की घोषणा की है। इनमें कई पुराने और चर्चित नाम शामिल हैं जो पहले भी विधानसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
घोषित उम्मीदवारों में भोर सीट से धनंजय, जिरदेई से अमरजीत कुशवाहा, दरौली से सत्यदेव राम, दारौंडा से अमरनाथ यादव, कल्याणपुर (SC) से रंजीत कुमार राम, वारिसनगर से फूलबाबू सिंह, राजगीर (SC) से विश्वनाथ चौधरी, दीघा से दिव्या गौतम, फुलवारी (SC) से गोपाल रविदास, पालीगंज से संदीप सौरभ, आरा से कयूमुद्दीन अंसारी, अगियॉं (SC) से शिव प्रकाश रंजन, तारारी से मदन सिंह, और डुमरांव से अजीत कुमार सिंह शामिल हैं।
इनमें कई उम्मीदवार वर्तमान विधायक हैं, जैसे संदीप सौरभ (पालीगंज) और अजीत कुमार सिंह (डुमरांव), जिन्होंने पिछले कार्यकाल में अपनी सक्रियता से पहचान बनाई है।
दूसरे चरण में 6 सीटों पर उतरेगी पार्टी
दूसरे चरण में भाकपा-माले ने छह उम्मीदवारों की घोषणा की है। इनमें सिकटा से वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता, पिपरा (सुपौल) से अनिल कुमार, बलरामपुर से महबूब आलम, करकट से अरुण सिंह, अरेवाल से महानंद सिंह, और घोसी से राम बली सिंह यादव को मैदान में उतारा गया है।
इन इलाकों में माले का पारंपरिक जनाधार रहा है और पार्टी को उम्मीद है कि पिछली बार की तरह इस बार भी उसे इन क्षेत्रों से बेहतर समर्थन मिलेगा।
पार्टी ने क्या कहा
सूची जारी करते हुए भाकपा-माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी का मुख्य लक्ष्य “जनता के मुद्दों को विधानसभा तक पहुंचाना” है। उन्होंने कहा कि माले किसान, मजदूर, बेरोजगारी और शिक्षा जैसे बुनियादी सवालों पर चुनाव लड़ेगी। साथ ही उन्होंने दावा किया कि बिहार में जनता बदलाव चाहती है और महागठबंधन को इस बार भारी बहुमत मिलेगा।
दीपंकर भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि भाकपा-माले महागठबंधन की प्रतिबद्ध इकाई है और वह राजद, कांग्रेस और वामपंथी एकता के साथ मिलकर बीजेपी-जेडीयू की नीतियों का विरोध करेगी।
सीट बंटवारे पर अब भी संशय
हालांकि भाकपा-माले ने अपने हिस्से की सीटों की घोषणा कर दी है, लेकिन बाकी दलों—राजद, कांग्रेस और सीपीआई—ने अभी तक आधिकारिक तौर पर सीट बंटवारे का एलान नहीं किया है। यह माना जा रहा है कि सीट बंटवारे पर शीर्ष स्तर पर अभी भी बातचीत जारी है।
सूत्रों के मुताबिक, पहले चरण की अधिकांश सीटों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन दूसरे चरण में कुछ सीटों को लेकर अब भी मतभेद बने हुए हैं।
मतदाताओं पर वामदलों का प्रभाव
बिहार में वामपंथी दलों का प्रभाव लंबे समय से रहा है, खासकर भोजपुर, सीवान, गया, दरभंगा और समस्तीपुर जिलों में। भाकपा-माले इन इलाकों में सक्रिय रूप से जन आंदोलनों से जुड़ी रही है, जिससे पार्टी को ग्रामीण और मजदूर वर्ग में मजबूत समर्थन प्राप्त है। इस बार भी पार्टी उसी जनाधार पर भरोसा कर रही है।
निष्कर्ष
भाकपा-माले की इस सूची के साथ बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन का वाम मोर्चा अब पूरी तरह तैयार दिखाई दे रहा है। भले ही महागठबंधन की सीटों का औपचारिक ऐलान बाकी है, लेकिन माले ने अपने 20 प्रत्याशियों की घोषणा कर चुनावी मैदान में तेजी ला दी है। अब देखना यह होगा कि पार्टी अपने पारंपरिक गढ़ों को बचाने और नए इलाकों में पैठ बनाने में कितनी सफल होती है।
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