अक्षरधाम और आनंद विहार में AQI 400+, जानिए राजधानी के अन्य हिस्सों का हाल !

CPCB के अनुसार अक्षरधाम और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 403 दर्ज़ किया गया जो ‘गंभीर’ श्रेणी में है। जबकि कुछ इलाकों में AQI बहुत खराब श्रेणी में दर्ज किया गया।

राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। आज सुबह पर्यावरण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, अक्षरधाम और आनंद विहार में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार पहुंच गया है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर (Severe) श्रेणी में आता है। वहीं, शहर के अन्य इलाकों में भी हवा की गुणवत्ता चिंताजनक बनी हुई है, जिससे आम लोगों और विशेषकर बुजुर्गों, बच्चों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं वाले लोगों के लिए सतर्क रहने की आवश्यकता है।

अक्षरधाम और आनंद विहार में AQI 400+, जानिए राजधानी के अन्य हिस्सों का हाल !
अक्षरधाम और आनंद विहार में AQI 400+, जानिए राजधानी के अन्य हिस्सों का हाल !

दिल्ली के अन्य इलाकों का हाल

दिल्ली के अन्य इलाकों का हाल
दिल्ली के अन्य इलाकों का हाल

हालांकि अक्षरधाम और आनंद विहार सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, लेकिन दिल्ली के कई अन्य इलाकों में भी वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है। जैसे कि लोधी रोड, आनंद विहार, आईटीओ, कनॉट प्लेस और सरोजिनी नगर में AQI 300-350 के बीच दर्ज किया गया है। इन क्षेत्रों में हवा में धूल और हानिकारक कणों (PM2.5 और PM10) की मात्रा बढ़ी हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह वृद्धि विशेष रूप से सर्दियों के मौसम, कम हवा की गति और बढ़ते वाहन व औद्योगिक प्रदूषण के कारण हुई है। इसके अलावा, पड़ोसी राज्यों से उड़ती धूल और पराली जलाने की गतिविधियां भी दिल्ली की हवा को दूषित कर रही हैं।

स्वास्थ्य पर प्रभाव

एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 से ऊपर होने पर सभी लोगों के लिए स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ जाता है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि जब तक हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं आता, बाहर निकलते समय मास्क पहनें, बच्चों को बाहरी खेलकूद से रोकें और घर के अंदर एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें।

डॉक्टरों के अनुसार, गंभीर वायु प्रदूषण से सांस लेने में तकलीफ, आंखों और गले में जलन, खांसी और अस्थमा जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। यदि लंबे समय तक इस प्रदूषण में रहने का असर हो तो हृदय और फेफड़ों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

सरकारी उपाय और चेतावनी

दिल्ली सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने शहर में वायु प्रदूषण को लेकर सावधानी बढ़ा दी है। स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों को सलाह दी गई है कि वे बच्चों को बाहरी गतिविधियों से रोकें। इसके अलावा, सड़क किनारे धूल और प्रदूषण को कम करने के लिए जल छिड़काव और सड़क साफ-सफाई की प्रक्रिया तेज़ कर दी गई है।

सड़क परिवहन और औद्योगिक विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे वाहनों की जाँच और औद्योगिक उत्सर्जन पर कड़ी नजर रखें। वहीं, आम लोगों से अपील की गई है कि अग्निकांड, पराली जलाने और अन्य प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों से बचें।

पराली जलाने का असर

हर साल अक्टूबर-नवंबर के दौरान पंजाब और हरियाणा के किसान खेतों की पराली जलाते हैं। इससे PM2.5 और PM10 कणों की संख्या बढ़ती है, जो दिल्ली में हवा की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या सर्दियों में और गंभीर हो जाती है क्योंकि ठंडी हवा और कम हवाओं के कारण प्रदूषक कण शहर में फंस जाते हैं।

भविष्य के लिए सुझाव

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि वायु प्रदूषण की यह प्रवृत्ति जारी रही, तो राजधानी में सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट की स्थिति बन सकती है। उन्होंने नागरिकों से कहा कि वे वाहनों का कम उपयोग करें, मास्क पहनें और घर में पौधों का उपयोग बढ़ाएं, जो प्राकृतिक तरीके से हवा को शुद्ध कर सकते हैं।

साथ ही, सरकार को चाहिए कि हर साल पराली जलाने पर रोक, सड़कों पर धूल कम करने और शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने जैसी रणनीतियों को लागू करें। इससे वायु गुणवत्ता में सुधार संभव है और दिल्लीवासियों को स्वास्थ्य संबंधी जोखिम से बचाया जा सकता है।

निष्कर्ष

दिल्ली के अक्षरधाम और आनंद विहार में AQI 400 पार होना गंभीर संकेत है कि राजधानी की हवा तेजी से जहरीली होती जा रही है। शहर के अन्य इलाकों में भी वायु गुणवत्ता कमजोर बनी हुई है। नागरिकों को स्वास्थ्य संबंधी सतर्कता बरतनी होगी, वहीं सरकार को प्रदूषण कम करने के लिए ठोस और त्वरित कदम उठाने होंगे।

दिल्लीवासियों के लिए यह वक्त है सुरक्षित रहने और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को कम करने का। अगर इन सावधानियों और सरकारी उपायों को गंभीरता से अपनाया गया, तो आगामी दिनों में वायु गुणवत्ता में सुधार की संभावना बनी रह सकती है।

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