छतरपुर के बागेश्वर धाम में दर्शन करने आए राजस्थान के एक परिवार के साथ दुखद हादसा हुआ। 2 साल का राघव खौलते तेल की कढ़ाई में गिरने से बुरी तरह झुलस गया। उसे बचाने की कोशिश में दादी के भी हाथ जल गए।
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के प्रसिद्ध बागेश्वर धाम में बुधवार को एक दिल दहला देने वाला हादसा हो गया। यहां दर्शन के लिए आए एक परिवार के दो सदस्य—एक दो साल का मासूम बच्चा और उसकी दादी—खौलते तेल में झुलस गए। यह दर्दनाक घटना मंदिर परिसर के पास स्थित एक समोसे की दुकान पर हुई, जहां अचानक हुई इस दुर्घटना ने मौके पर मौजूद लोगों को सन्न कर दिया।

हादसे का विवरण
जानकारी के अनुसार, परिवार बागेश्वर धाम में दर्शन करने आया था। धाम के प्रवेश द्वार के पास कुछ दुकानदार प्रसाद, स्नैक्स और नाश्ते की दुकानें चलाते हैं। इन्हीं में से एक दुकान पर गर्म तेल में समोसे तले जा रहे थे। उसी दौरान करीब दो साल का मासूम बच्चा खेलते-खेलते दुकान के पास पहुंच गया और अचानक फिसलकर गर्म तेल से भरी कढ़ाई में गिर पड़ा। यह घटना इतनी तेज़ी से हुई कि कोई भी उसे रोक नहीं सका।

बच्चे की चीख सुनकर उसकी दादी जो पास में ही खड़ी थीं, उसे बचाने के लिए तुरंत दौड़ीं। उन्होंने बिना कुछ सोचे-समझे बच्चे को बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन इस दौरान उनके दोनों हाथ और चेहरा भी झुलस गया। घटना देखकर मौके पर मौजूद लोगों में अफरातफरी मच गई।
अफरा-तफरी और तत्काल मदद
दुकानदारों और आसपास के श्रद्धालुओं ने तुरंत बच्चे और दादी को बाहर निकाला और ठंडे पानी से प्राथमिक उपचार करने की कोशिश की। बागेश्वर धाम के सेवादारों ने तुरंत एंबुलेंस बुलवाई और दोनों को जिला अस्पताल छतरपुर भेजा गया। डॉक्टरों के अनुसार, बच्चे के शरीर का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा जल गया है, जबकि दादी के हाथों और चेहरे पर गंभीर जलन है। दोनों को अस्पताल के बर्न वार्ड में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है।
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि फिलहाल दोनों की हालत स्थिर है, लेकिन बच्चे को विशेष निगरानी में रखा गया है। चिकित्सकों ने कहा कि बच्चे की उम्र कम होने के कारण संक्रमण का खतरा अधिक है, इसलिए उसे लगातार मॉनिटर किया जा रहा है।
स्थानीय प्रशासन और धाम प्रबंधन की प्रतिक्रिया
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन और बागेश्वर धाम के प्रबंधन ने तुरंत मौके का निरीक्षण किया। धाम प्रबंधन ने बताया कि यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और घायलों के इलाज का पूरा खर्च मंदिर ट्रस्ट उठाएगा। धाम के प्रमुख सेवादार ने कहा, “यह एक आकस्मिक घटना है। हमारी प्राथमिकता बच्चे और उसकी दादी के उपचार पर है। भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचाव के लिए दुकानों के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जाएंगे।”
प्रशासन ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि मंदिर परिसर के आसपास चल रही खाद्य दुकानों की जांच की जाएगी, यह सुनिश्चित करने के लिए कि कहीं पर भी खुले में खौलता तेल या आग श्रद्धालुओं के लिए खतरा न बने।
लोगों की भावनात्मक प्रतिक्रिया
हादसे के बाद सोशल मीडिया पर भी यह खबर तेजी से फैल गई। लोगों ने बच्चे के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और दादी के साहस की सराहना की। कई लोगों ने लिखा कि “दादी ने अपनी जान की परवाह किए बिना बच्चे को बचाने की कोशिश की, यह ममता का सबसे बड़ा उदाहरण है।”
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
यह घटना मंदिरों और धार्मिक स्थलों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाती है। बागेश्वर धाम जैसे भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थल पर प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु आते हैं, लेकिन वहां पर दुकानों के पास पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध नहीं दिखाई देते। विशेषज्ञों का कहना है कि भीड़भाड़ वाले स्थलों पर खुले तेल में खाना बनाना या तलना बेहद जोखिम भरा होता है।
प्रशासन ने अब निर्देश जारी किए हैं कि सभी दुकानदार अपने काउंटर सुरक्षित दूरी पर रखें और गैस स्टोव या कढ़ाई जैसी चीजें श्रद्धालुओं की पहुंच से बाहर हों। साथ ही, मंदिर परिसर में फायर सेफ्टी उपकरणों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी।
निष्कर्ष
बागेश्वर धाम में हुआ यह हादसा एक दर्दनाक चेतावनी है कि थोड़ी-सी लापरवाही किस तरह जानलेवा साबित हो सकती है। यह घटना न केवल प्रशासनिक सतर्कता की मांग करती है बल्कि यह भी दर्शाती है कि श्रद्धालुओं को भी ऐसे स्थलों पर बच्चों की सुरक्षा के प्रति सजग रहना चाहिए।
फिलहाल बच्चा और उसकी दादी दोनों जिला अस्पताल में उपचाराधीन हैं। पूरा जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन उनके इलाज में जुटा हुआ है। श्रद्धालु लगातार उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं।