राहुल गांधी के बयान पर बवाल, BJP नेताओं का फूटा गुस्सा !

राहुल गांधी की पीएम मोदी और छठ को लेकर की गई टिप्पणी पर हंगामा हो गया है। राहुल के बयान पर बीजेपी नेताओं ने निशाना साधा है और जमकर खरी-खोटी सुनाई है।

बिहार और उत्तर भारत में आस्था के महापर्व छठ पूजा के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी के एक बयान ने सियासी गलियारों में तूफान खड़ा कर दिया है। राहुल गांधी ने हाल ही में एक सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और छठ पर्व का उल्लेख करते हुए जो टिप्पणी की, उस पर भाजपा नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा का कहना है कि राहुल गांधी ने करोड़ों लोगों की आस्था का अपमान किया है। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।

राहुल गांधी के बयान पर बवाल, BJP नेताओं का फूटा गुस्सा !
राहुल गांधी के बयान पर बवाल, BJP नेताओं का फूटा गुस्सा !

क्या कहा राहुल गांधी ने?

दरअसल, राहुल गांधी ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था, “प्रधानमंत्री मोदी हर त्योहार और परंपरा को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करते हैं। अब छठ पूजा को भी राजनीति से जोड़ दिया गया है। आस्था को राजनीति का औजार बनाना गलत है।”

राहुल ने आगे कहा कि “छठ पूजा हो या दीपावली – ये हमारे सांस्कृतिक पर्व हैं, न कि किसी पार्टी की संपत्ति। जनता का धर्म और संस्कृति किसी एक नेता की नहीं हो सकती।”

उनके इस बयान के तुरंत बाद भाजपा नेताओं ने इसे “छठ पूजा और हिंदू भावनाओं पर हमला” बताते हुए कड़ा विरोध जताया।

भाजपा नेताओं का पलटवार

राहुल गांधी के बयान पर भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा, “राहुल गांधी को समझना चाहिए कि छठ पूजा राजनीति नहीं, श्रद्धा का प्रतीक है। यह उस माँ की आस्था का पर्व है जो अपने परिवार की सलामती के लिए उपवास रखती है। ऐसे पवित्र पर्व को लेकर राजनीति करना शर्मनाक है।”

भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, “राहुल गांधी को न आस्था की समझ है, न संस्कृति की। जब पूरा देश छठ मइया की अराधना में जुटा है, तब वो इस पर्व को ‘राजनीतिक औजार’ कहकर उसका अपमान कर रहे हैं। कांग्रेस का यही असली चेहरा है।”

बिहार भाजपा के नेता गिरिराज सिंह ने तो इसे “बिहार की अस्मिता पर हमला” बताया। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी को बिहार की संस्कृति का सम्मान करना चाहिए। छठ सिर्फ एक पूजा नहीं, बल्कि बिहार की आत्मा है। ऐसे में उनके बयान से पूरे प्रदेश की भावनाएं आहत हुई हैं।”

कांग्रेस का जवाब – बयान का गलत अर्थ निकाला गया

भाजपा के हमलों के बाद कांग्रेस ने भी पलटवार किया। पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि राहुल गांधी के बयान को जानबूझकर तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी ने किसी धर्म या पर्व का अपमान नहीं किया। उन्होंने केवल यह कहा कि प्रधानमंत्री मोदी धार्मिक आयोजनों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए करते हैं। छठ पूजा को लेकर भाजपा झूठ फैला रही है ताकि असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके।”

कांग्रेस के अनुसार, राहुल गांधी का बयान राजनीति और धर्म के बीच की दीवार को मजबूत करने का था, लेकिन भाजपा उसे सांप्रदायिक मुद्दा बनाने में जुटी है।

सोशल मीडिया पर मचा बवाल

राहुल गांधी के बयान का वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। ट्विटर (X) और फेसबुक पर भाजपा समर्थकों ने राहुल पर “हिंदू विरोधी” होने का आरोप लगाया, जबकि कांग्रेस समर्थकों ने बचाव में कहा कि राहुल गांधी ने केवल राजनीतिक दुरुपयोग की बात की थी।

कुछ यूजर्स ने राहुल गांधी की पुराने बयानों से तुलना करते हुए कहा कि यह कांग्रेस की “परंपरागत सोच” को दर्शाता है, जबकि कई लोगों ने भाजपा पर “हर त्योहार का राजनीतिकरण” करने का आरोप लगाया।

राजनीतिक मायने और असर

विश्लेषकों का मानना है कि बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में छठ पूजा का गहरा सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव है। ऐसे में इस बयान का राजनीतिक असर भी हो सकता है। भाजपा इस बयान को मुद्दा बनाकर कांग्रेस पर “आस्था विरोधी” होने का ठप्पा लगाने की कोशिश कर रही है, खासकर उन राज्यों में जहां छठ पर्व को लेकर बड़ी जनसंख्या भावनात्मक रूप से जुड़ी है।

वहीं, कांग्रेस यह कहने की कोशिश में है कि राहुल गांधी के बयान का मकसद धार्मिक आस्था को नहीं, बल्कि उसके राजनीतिक दुरुपयोग को उजागर करना था।

निष्कर्ष

राहुल गांधी के इस बयान ने छठ पूजा जैसे आस्था के पर्व को सियासी बहस के केंद्र में ला दिया है। भाजपा इसे भावनात्मक मुद्दा बनाकर जनता के बीच ले जाने की रणनीति में है, जबकि कांग्रेस इसे “गलत व्याख्या” बताकर बचाव कर रही है। लेकिन इतना तय है कि बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की राजनीति में छठ को लेकर उठी यह बहस आने वाले चुनावी महीनों में खूब गूंजेगी।

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