दमघोंटू हवा से हाहाकार! नोएडा में लागू हुआ GRAP-3!

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बुधवार शाम को नोएडा सेक्टर एक मॉनिटरिंग स्टेशन पर एक्यूआई 407, सेक्टर 125 में 425, सेक्टर 62 में 388 और सेक्टर 116 में 415 था। GRAP का तीसरे चरण लागू होने से निर्माण समेत कई गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया है। नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक श्रेणी में पहुंच गया है। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने क्रमिक प्रतिक्रिया कार्य योजना (GRAP) के तीसरे चरण को लागू करने का आदेश जारी किया है। इसके साथ ही नोएडा प्राधिकरण ने शहर में निर्माण गतिविधियों, डीजल जनरेटरों और वाहनों की आवाजाही पर सख्त नियंत्रण लगाने की घोषणा की है।

दमघोंटू हवा से हाहाकार! नोएडा में लागू हुआ GRAP-3!
दमघोंटू हवा से हाहाकार! नोएडा में लागू हुआ GRAP-3!

हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में

पिछले कुछ दिनों से नोएडा और दिल्ली-एनसीआर की हवा में PM2.5 और PM10 कणों की मात्रा में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। गुरुवार को नोएडा के कई इलाकों में AQI 400 से ऊपर पहुंच गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सर्दी की शुरुआत, ठंडी हवाओं की कमी और पराली जलाने के बढ़ते मामलों ने मिलकर हवा को और जहरीला बना दिया है।

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हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में

सफर (SAFAR) और CPCB के आंकड़ों के अनुसार, नोएडा का औसत AQI 420 तक पहुंच गया है, जबकि दिल्ली में यह 450 के पार चला गया। इसका मतलब है कि वायु प्रदूषण का असर अब न केवल बच्चों और बुजुर्गों बल्कि स्वस्थ लोगों पर भी पड़ रहा है।

GRAP-3 के तहत लागू होंगे ये प्रतिबंध

GRAP यानी Graded Response Action Plan एक चरणबद्ध योजना है, जिसे वायु गुणवत्ता के बिगड़ते स्तर के अनुसार लागू किया जाता है। तीसरे चरण के लागू होने का मतलब है कि अब प्रदूषण ‘गंभीर’ स्तर पर है और तत्काल सख्त कदम उठाने जरूरी हैं।

नोएडा में GRAP-3 के तहत निम्नलिखित कदम लागू किए गए हैं —

  1. निर्माण और तोड़फोड़ (डिमोलिशन) गतिविधियों पर पूर्ण रोक। केवल सरकारी या आपातकालीन परियोजनाओं जैसे मेट्रो, रेलवे या अस्पताल निर्माण को छूट दी गई है।
  2. ईंट भट्टों, स्टोन क्रशर, हॉट मिक्स प्लांट और कंक्रीट मिक्सिंग यूनिट्स को तत्काल बंद करने के आदेश।
  3. डीजल जनरेटरों (DG sets) के उपयोग पर सख्त पाबंदी — केवल आपात सेवाओं को छूट।
  4. ट्रकों और भारी वाहनों की नोएडा में एंट्री पर प्रतिबंध, जब तक कि वे आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में शामिल न हों।
  5. सड़कों पर पानी का छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल बढ़ाने के निर्देश।
  6. सरकारी और निजी निर्माण परियोजनाओं को रोकने के साथ-साथ साइट पर प्रदूषण नियंत्रण मानकों की जांच के आदेश।

नोएडा प्राधिकरण और प्रशासन अलर्ट

नोएडा प्राधिकरण और जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से प्रदूषण नियंत्रण की मॉनिटरिंग तेज कर दी है। शहर में विशेष निगरानी दल बनाए गए हैं जो निर्माण स्थलों और औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण कर रहे हैं। प्रदूषण फैलाने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है।

प्राधिकरण की सीईओ रितु माहेश्वरी ने कहा, “प्रदूषण नियंत्रण की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि नागरिकों की भी है। हम हर स्तर पर कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन जब तक लोग सहयोग नहीं करेंगे, तब तक सुधार मुश्किल है।” उन्होंने यह भी बताया कि सभी वार्डों में एंटी-स्मॉग गन और वॉटर स्प्रिंकलर तैनात किए गए हैं, ताकि धूल कम की जा सके।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी

AIIMS और फोर्टिस अस्पतालों के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि बढ़ता प्रदूषण फेफड़ों, हृदय और आंखों पर गंभीर असर डाल सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। डॉक्टरों ने कहा है कि सुबह और शाम के समय बाहर निकलने से बचें, एन-95 मास्क का इस्तेमाल करें और घर में एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें।

पराली और मौसम भी बने कारण

विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर भारत के कई हिस्सों में पराली जलाने के मामलों में बढ़ोतरी और मौसम की स्थिरता ने प्रदूषण को और खतरनाक बना दिया है। ठंडी हवाएं और नमी प्रदूषक तत्वों को ऊपर उठने नहीं दे रहीं, जिससे जहरीली हवा जमीन के स्तर पर ठहर गई है।

लोगों से अपील

प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे वाहनों का कम से कम इस्तेमाल करें, कारपूलिंग और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें। इसके अलावा कूड़ा, प्लास्टिक या सूखी पत्तियों को जलाने से सख्ती से बचने के निर्देश दिए गए हैं।

नोएडा में GRAP-3 के लागू होने के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि क्या इन सख्त कदमों से हवा की गुणवत्ता में सुधार आएगा या नहीं। लेकिन फिलहाल, दिल्ली-एनसीआर के लोग उसी जहरीली हवा में जीने को मजबूर हैं, जिसमें हर सांस एक चुनौती बन चुकी है।

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