अखिलेश यादव ने नीतीश कुमार को शपथ पर बधाई देते हुए पुरानी तस्वीरें शेयर कीं. उन्होंने कहा कि वे उन्हें पीएम बनाना चाहते थे, लेकिन नीतीश फिर सीएम ही बने.
बिहार में नई एनडीए सरकार के गठन और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ऐतिहासिक दसवें शपथ ग्रहण के बाद विपक्ष की प्रतिक्रिया लगातार तेज होती जा रही है। बुधवार को इस राजनीतिक माहौल में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व यूपी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने नई हलचल पैदा कर दी है। अखिलेश ने अपने ‘एक्स’ अकाउंट पर दो पुरानी तस्वीरें साझा करते हुए नीतीश कुमार को बधाई दी, लेकिन साथ ही एक ऐसा राजनीतिक संदेश भी दिया जिसने सियासी चर्चाओं को और हवा दे दी।

पुरानी तस्वीरें, नया तंज—अखिलेश का खास अंदाज़
अखिलेश यादव ने जो तस्वीरें साझा कीं, वे उन दिनों की हैं जब इंडिया अलायंस का गठन हो रहा था और नीतीश कुमार विपक्षी एकजुटता के प्रमुख सूत्रधार के रूप में काम कर रहे थे। उन बैठकों में अखिलेश, नीतीश और अन्य विपक्षी नेता एक मंच पर दिखाई देते थे। उस समय नीतीश कुमार को विपक्ष का बड़ा चेहरा माना जा रहा था और चर्चा थी कि वे प्रधानमंत्री पद के दावेदारों में शामिल हो सकते हैं।
अखिलेश यादव ने इन तस्वीरों के साथ एक दिलचस्प और राजनीतिक संकेतों से भरा संदेश लिखा—
“हम तो इन्हें पीएम बनाना चाहते थे, लेकिन नीतीश कुमार सीएम ही रह गए.”
यह टिप्पणी सीधे नीतीश कुमार के राजनीतिक फैसलों और बार-बार के पाला बदलने को इंगित करती है। अखिलेश के इस बयान को विपक्षी राजनीति में तीखा तंज माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने नीतीश के निर्णयों को लेकर अपनी निराशा भी ज़ाहिर की और व्यंग्य भी किया।
नीतीश को दी ‘विशेष’ बधाई
तंज के साथ-साथ अखिलेश यादव ने शालीनता से नीतीश कुमार को बधाई भी दी। उन्होंने लिखा कि बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने पर नीतीश कुमार को शुभकामनाएँ। उन्होंने आने वाले पांच वर्षों के लिए एक “जनहितकारी, सकारात्मक और समाजवादी विचारधारा पर आधारित स्वतंत्र शासन” चलाने की आशा व्यक्त की।

अखिलेश का यह संदेश दो अलग-अलग राजनीति का मिश्रण है—एक तरफ पुरानी यादों और गठबंधन की कोशिशों का स्मरण, दूसरी तरफ वर्तमान राजनीतिक समीकरणों पर टिप्पणी और एक तीसरी तरफ शिष्टाचार के तहत दी गई औपचारिक बधाई।
नीतीश के ‘यू-टर्न’ पर विपक्ष का पुराना हमला
अखिलेश का यह पोस्ट इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि नीतीश कुमार पर कई बार गठबंधन बदलने और राजनीतिक दिशा बदलने को लेकर विपक्ष लगातार हमला करता रहा है। इंडिया अलायंस की बैठकों में सबसे आगे दिखने वाले नीतीश कुमार ने अचानक मोड़ लेते हुए एनडीए में वापसी की थी, जिसके बाद विपक्ष उन्हें राजनीतिक रूप से अविश्वसनीय बताने लगा।
अखिलेश की पोस्ट उनके इसी पुराने रुख की याद दिलाती है कि एक समय विपक्ष ने उन्हें प्रधानमंत्री पद तक ले जाने की योजना बनाई थी, लेकिन आज परिस्थितियाँ पूरी तरह बदल चुकी हैं और नीतीश एनडीए के शीर्ष नेतृत्व के साथ अपनी सियासी यात्रा आगे बढ़ा रहे हैं।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
अखिलेश के इस पोस्ट को केवल बधाई संदेश नहीं माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इसमें छिपा संकेत विपक्ष के भीतर की हताशा को दर्शाता है। इंडिया अलायंस का गठन जिस उत्साह के साथ शुरू हुआ था, वह धीरे-धीरे कमजोर पड़ा और नीतीश का बाहर आना इसकी सबसे बड़ी वजह माना गया।
पोस्ट के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा चल रही है कि अखिलेश ने सिर्फ नीतीश की आलोचना नहीं की, बल्कि विपक्षी एकता की विफलता का कारण भी अप्रत्यक्ष रूप से दिखाया।
बिहार में नई सरकार, विपक्ष की नई रणनीति
नीतीश कुमार के दसवीं बार मुख्यमंत्री बनने के बाद बिहार में एनडीए की सरकार मजबूत मानी जा रही है। वहीं विपक्ष की कोशिश है कि वह नीतीश के इस कदम को जनता के सामने राजनीतिक अवसरवाद के रूप में प्रस्तुत करे। अखिलेश जैसे नेताओं की इस तरह की पोस्ट उसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें वे जनता के बीच नीतीश की बदलती प्राथमिकताओं को सवालों के घेरे में ला सकें।
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