SIR ऑपरेशन से दहशत, 500+ बांग्लादेशियों ने छोड़ा भारत!

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पश्चिम बंगाल में लगभग 500 अवैध बांग्लादेशी नागरिक SIR अभियान के डर से बांग्लादेश लौटने की कोशिश कर रहे हैं. वे पहले भारत में अवैध रूप से आए थे और अब डर के कारण वापस जा रहे हैं.

पश्चिम बंगाल-बांग्लादेश सीमा के पास स्थित हाकिमपुर बॉर्डर आउटपोस्ट (उत्तर 24 परगना) के इलाके में इन दिनों असामान्य हलचल देखी जा रही है। सड़क किनारे बैठे महिलाओं, पुरुषों और छोटे बच्चों के चेहरों पर गहरी दहशत साफ दिखाई दे रही है। उनके पास बिखरे पड़े बैग, कंबल और प्लास्टिक के बक्से इस बात का संकेत दे रहे हैं कि वे जल्दबाज़ी में अपने घरों से निकलकर बॉर्डर की ओर पहुंचे हैं—ताकि किसी तरह जल्दी से बांग्लादेश लौट सकें।

SIR ऑपरेशन से दहशत, 500+ बांग्लादेशियों ने छोड़ा भारत!
SIR ऑपरेशन से दहशत, 500+ बांग्लादेशियों ने छोड़ा भारत!

अधिकारियों का कहना है कि यह ‘उलटा पलायन’ (Reverse Migration) पिछले कुछ दिनों में अचानक तेजी से बढ़ा है। ये वही लोग हैं जो वर्षों पहले अवैध रूप से भारत में घुस आए थे, लेकिन अब भारत में चल रहे SIR—Special Intensive Revision (विशेष गहन संशोधन) अभियान के कारण डर में हैं और वापस लौटने की कोशिश कर रहे हैं।

क्यों बढ़ रहा है उलटा पलायन?

केंद्र और राज्य एजेंसियों द्वारा हाल ही में अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए चलाया गया SIR अभियान, खासकर सीमावर्ती जिलों में लगातार सक्रिय है। इसमें दस्तावेजों की जांच, पहचान सत्यापन, किरायेदारों की सूची की पड़ताल और संदिग्ध व्यक्तियों पर नजर रखी जा रही है।

इसी अभियान ने अवैध रूप से भारत में रह रहे बांग्लादेशियों में भय पैदा कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, पिछले 10–12 दिनों में 500 से अधिक ऐसे लोग विभिन्न बॉर्डर पॉइंट्स पर पहुंचकर अपने देश की ओर पलायन कर चुके हैं। कई लोग रात के अंधेरे में सीमा पार करने की कोशिश कर रहे हैं।

‘सुबह-सुबह घर छोड़कर निकल आए… डर लग रहा है’

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में अब्दुल मोमिन, जो अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ हाकिमपुर पहुंचा था, ने कहा कि वह पांच साल पहले बांग्लादेश के सतखीरा जिले से भारत आया था। वह एक दलाल के माध्यम से हावड़ा के डोमजूड़ में मजदूरी करने पहुंचा था।

मोमिन ने बताया:

“दो दिन से मोहल्ले में पुलिस और जांच टीम घूम रही थी। सब लोग कह रहे थे कि दस्तावेज़ मांगेंगे और पकड़कर भेज देंगे। डर लग रहा था… इसलिए सुबह-सुबह परिवार को लेकर यहाँ चला आया। जो कुछ था, वही बैग में डाल लिया।”

मोमिन ही नहीं, बल्कि कई परिवारों की कहानी ऐसी ही है। कुछ लोगों ने बताया कि वे वर्षों से भारत में मजदूरी, घरेलू काम या स्थानीय फैक्ट्रियों में काम कर रहे थे। उनके पास किसी तरह का वैध दस्तावेज़ नहीं है, जिसके चलते SIR अभियान ने उनके बीच भारी भय पैदा किया है।

सीमा पर बैठे परिवारों में भारी बेचैनी

हाकिमपुर बॉर्डर के पास सड़क के किनारे दर्जनों परिवार बैठकर इंतजार कर रहे हैं कि कब सीमा सुरक्षा बल की गतिविधियाँ कम हों और वे किसी तरह बांग्लादेश वाले हिस्से में प्रवेश कर सकें। कई बच्चे भूखे बैठे हैं, कई महिलाएँ अपने सामान की गठरी पकड़े आसमान की ओर चिंतित नज़र से देख रही हैं।

स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले 72 घंटों में बॉर्डर के पास ऐसे परिवारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई लोग अपने रिश्तेदारों को फोन कर बताते सुने गए कि “जल्दी निकलो… हालात ठीक नहीं।”

अधिकारियों की प्रतिक्रिया

बीएसएफ अधिकारियों ने स्वीकार किया कि अवैध प्रवासियों में डर बढ़ने के कारण बॉर्डर पर लोगों की भीड़ दिख रही है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमा पार करना कानूनी प्रक्रियाओं के तहत ही संभव है, और बिना दस्तावेज़ के ऐसा करना अपराध है।

स्थानीय प्रशासन भी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों ने कहा कि SIR अभियान का मकसद केवल दस्तावेज़ सत्यापन है, न कि किसी समुदाय को डराना। लेकिन इसके बावजूद सीमावर्ती इलाकों में रह रहे अवैध प्रवासियों पर इसका असर साफ दिख रहा है।

आगे क्या?

भारत-बांग्लादेश सीमा पर हो रही यह हलचल प्रशासन के साथ-साथ सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी चुनौती है। अवैध प्रवासियों द्वारा अचानक पलायन से सुरक्षा जोखिम, मानवीय संकट और सीमा प्रबंधन से जुड़े कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

फिलहाल हाकिमपुर और अन्य बॉर्डर आउटपोस्ट के आसपास हालात तनावपूर्ण और बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। आने वाले दिनों में SIR अभियान की कठोरता के आधार पर यह ‘उल्टा पलायन’ कम हो सकता है या और भी बढ़ सकता है।

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