चुनावी हार से आहत PK, अब मौन उपवास में डूबे !

बिहार विधानसभा चुनाव में जनसुराज पार्टी की करारी हार के बाद प्रशांत किशोर मौन उपवास पर बैठे हैं। वह पश्चिमी चंपारण के भितिहरवा गांधी आश्रम में आत्ममंथन कर रहे हैं।

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने जनसुराज पार्टी को गहरा झटका दिया है। पहली बार चुनावी मैदान में उतरी पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी, जिसके बाद इसके संस्थापक और प्रमुख चेहरा प्रशांत किशोर (PK) ने सार्वजनिक जीवन में एक अनोखा संदेश देते हुए मौन व्रत और उपवास का रास्ता चुना है। वे पिछले 24 घंटों से पश्चिमी चंपारण स्थित ऐतिहासिक भितिहरवा गांधी आश्रम में मौन उपवास पर बैठे हुए हैं, जहाँ वे पार्टी की हार और अपने अगले कदमों पर आत्ममंथन कर रहे हैं।

चुनावी हार से आहत PK, अब मौन उपवास में डूबे !
चुनावी हार से आहत PK, अब मौन उपवास में डूबे !

गांधी आश्रम में अकेले बैठकर आत्मचिंतन

गांधी आश्रम में अकेले बैठकर आत्मचिंतन
गांधी आश्रम में अकेले बैठकर आत्मचिंतन

गांधी आश्रम का यह वही स्थान है, जहाँ महात्मा गांधी ने चंपारण सत्याग्रह के दौरान कुछ समय बिताया था। PK का इसे आत्ममंथन का स्थल बनाना प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रशांत किशोर किसी भी राजनीतिक गतिविधि से दूरी बनाए हुए हैं और आश्रम में एक साधारण कमरे में बिना किसी राजनीतिक साथियों के मौजुदगी के उपवास कर रहे हैं। वे न कोई बयान दे रहे हैं, न ही मीडिया से बातचीत। वे केवल आश्रम के वातावरण में शांत मन से विचार-विमर्श में जुटे हैं।

हार की जिम्मेदारी स्वीकारते हुए आत्ममंथन

जनसुराज पार्टी की चुनावी रणनीति और लंबे समय तक चले बिहार पदयात्रा अभियान में प्रशांत किशोर ने अपनी पूरी ऊर्जा झोंक दी थी। वे लगातार दावा करते रहे थे कि बिहार में नई राजनीति की जमीन तैयार हो रही है।
लेकिन नतीजों ने पार्टी को करारी हार दी। इसके बाद PK ने हार की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए अपने समर्थकों से कहा था कि वे परिणामों पर भावनात्मक प्रतिक्रिया न दें, बल्कि ईमानदारी से आत्ममंथन करें।

मौन उपवास उसी प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है। PK चाहते हैं कि वह अपनी गलतियों, संगठन की कमियों और जनता के बीच पार्टी की कमजोर पकड़ को समझें। उन्होंने खुद कहा था कि “हमें जमीनी स्तर की वास्तविकता को बिना भावनाओं के स्वीकार करना होगा।”

24 घंटे से मौन—तस्वीर आई सामने

मौन व्रत पर बैठे प्रशांत किशोर की एक तस्वीर भी सामने आई है, जिसमें वे फर्श पर चटाई बिछाकर शांत मुद्रा में बैठे दिखाई दे रहे हैं। उनके सामने एक डायरी रखी हुई है, जिसे वे लगातार नोटबुक की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।
तस्वीर में उनका अंदाज़ बिल्कुल संयमित और ध्यानमग्न दिखाई देता है। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई है और लोग इसे “चुनाव की चोट के बाद मनन का क्षण” बता रहे हैं।

जनसुराज कार्यकर्ताओं में मिश्रित प्रतिक्रिया

PK के मौन व्रत को जनसुराज के कार्यकर्ता दो तरह से देख रहे हैं। कुछ इसे सकारात्मक कदम मानते हैं, उनका कहना है कि नेता अपने फैसलों और रणनीतियों पर विचार कर रहा है, जो एक अच्छे नेतृत्व की निशानी है।
वहीं कुछ कार्यकर्ताओं का मानना है कि पार्टी को अब भावनात्मक संदेशों से ज्यादा संगठनात्मक मजबूती की जरूरत है और PK का मौन इस समय उन्हें उपलब्ध नहीं करवाएगा।

इसके बावजूद कार्यकर्ताओं में PK के प्रति विश्वास कायम है और उनका कहना है कि पार्टी ने एक कठिन यात्रा तय की है जिसे आगे सुधारकर बढ़ाया जा सकता है।

राजनीतिक हलकों में हलचल

PK के मौन व्रत पर राजनीतिक वर्ग में भी प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। प्रतिद्वंद्वी दलों के कई नेताओं ने व्यंग्यात्मक टिप्पणियाँ की हैं, जबकि कुछ नेताओं ने इसे व्यक्तिगत आत्मचिंतन बताकर सम्मानजनक कदम कहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि PK इस हार के बाद जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करना चाहते। मौन व्रत का निर्णय एक सुनियोजित कदम भी हो सकता है, जिससे वे अगले चरण की राजनीति या संगठन की दिशा तय कर सकें।

आगे की राह क्या?

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मौन व्रत खत्म होने के बाद प्रशांत किशोर क्या बयान देते हैं।
क्या वे हार स्वीकार कर पीछे हटेंगे?
क्या वे संगठन को दोबारा खड़ा करने के लिए योजना पेश करेंगे?
या फिर वे बिहार राजनीति से खुद को थोड़े समय के लिए अलग कर लेंगे?

इन सवालों का जवाब PK की अगली गतिविधियों में मिलेगा।

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