SIR अपडेट में फर्जी कॉल-मैसेज का दौर, पुलिस ने चेताया

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एसीपी साइबर क्राइम ने स्पष्ट किया है कि SIR का ऑनलाइन फॉर्म भरते समय किसी भी स्टेप में ओटीपी की डिमांड नहीं की जाती, सिर्फ एक सामान्य फॉर्म भरवाया जाता है.

उत्तर प्रदेश में इस समय SIR (Special Summary Revision) प्रक्रिया जारी है, जिसके तहत राज्यभर में मतदाता सूची को अपडेट किया जा रहा है। हर साल की तरह इस बार भी नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, मृत व्यक्तियों के नाम हटाने, पते में बदलाव करने और अन्य सुधार करने का काम तेजी से किया जा रहा है। चुनाव आयोग ने लोगों के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन—दोनों विकल्प उपलब्ध कराए हैं, जिससे वे अपनी सुविधानुसार SIR के लिए आवेदन कर सकें। लेकिन इसी प्रक्रिया के बीच एक नया जोखिम सामने आया है, जिसने पुलिस और प्रशासन को सतर्क कर दिया है।

SIR अपडेट में फर्जी कॉल-मैसेज का दौर, पुलिस ने चेताया
SIR अपडेट में फर्जी कॉल-मैसेज का दौर, पुलिस ने चेताया

मतदाता सूची में नाम जोड़ने या उसमें सुधार कराने के लिए जब बड़ी संख्या में लोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं, तो साइबर ठग भी सक्रिय हो जाते हैं। हाल के दिनों में कई लोगों ने शिकायत की है कि SIR प्रक्रिया में मदद के नाम पर उनसे OTP (वन टाइम पासवर्ड) मांगा जा रहा है। कुछ लोग कॉल कर रहे हैं, कुछ सोशल मीडिया के ज़रिए संपर्क कर रहे हैं, तो कुछ फर्जी वेबसाइट्स या लिंक भेजकर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए वाराणसी पुलिस ने एक महत्वपूर्ण अपील जारी की है।

पुलिस ने साफ तौर पर कहा है कि SIR की पूरी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की OTP की आवश्यकता नहीं होती है। चाहे आप नया वोटर आईडी के लिए आवेदन कर रहे हों, पता बदलने का अनुरोध कर रहे हों, फोटो अपडेट करवा रहे हों या किसी का नाम सूची से हटाने की प्रक्रिया कर रहे हों—इनमें से किसी भी चरण में चुनाव आयोग या उसके किसी भी अधिकृत प्लेटफ़ॉर्म द्वारा OTP नहीं मांगा जाता। यदि किसी व्यक्ति को फोन, व्हाट्सऐप, मैसेज या लिंक के माध्यम से OTP डाला जाता है, तो समझना चाहिए कि यह सीधे तौर पर फ्रॉड है।

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वाराणसी पुलिस ने कहा है कि साइबर अपराधी इस समय SIR प्रक्रिया की आड़ लेकर लोगों से उनके मोबाइल नंबर, आधार नंबर, वोटर आईडी विवरण और बैंकिंग से जुड़े OTP तक हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। कई मामलों में लोग यह मानकर OTP बता देते हैं कि यह चुनाव आयोग से संबंधित प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इसी OTP के जरिए ठग उनके बैंक खाते खाली कर देते हैं या डिजिटल वॉलेट से पैसा निकाल लेते हैं।

पुलिस ने नागरिकों से इन बातों का पालन करने की अपील की है:

  1. SIR से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया में OTP की जरूरत नहीं होती—इसलिए इसे कभी साझा न करें।
  2. यदि कोई व्यक्ति फोन करके खुद को चुनाव आयोग का कर्मचारी या एजेंट बताकर OTP मांगता है, तो तुरंत कॉल काट दें।
  3. किसी भी फर्जी लिंक पर क्लिक न करें और केवल आधिकारिक वेबसाइट—www.nvsp.in या **www.eci.gov.in**—का ही उपयोग करें।
  4. सोशल मीडिया पर फैल रहे फॉर्म, लिंक, या ऐप डाउनलोड करने के निर्देशों से बचें।
  5. यदि किसी संदिग्ध कॉल या मैसेज मिले, तो तुरंत सायबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।
  6. स्थानीय पुलिस स्टेशन में भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है ताकि ठगों पर कार्रवाई की जा सके।

पुलिस ने यह भी बताया कि साइबर अपराधी अक्सर चुनाव से पहले या किसी बड़ी सरकारी प्रक्रिया के दौरान अधिक सक्रिय हो जाते हैं, क्योंकि इस समय लोग नए-नए अपडेट और सुधार कराने में लगे होते हैं और ठग इसी अवसर का फायदा उठाते हैं। इसके अलावा कई लोग डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग पहली बार करते हैं, जिससे वे फ्रॉड का आसान शिकार बन जाते हैं।

वाराणसी पुलिस का कहना है कि किसी भी सरकारी प्रक्रिया में OTP केवल तभी इस्तेमाल होता है जब आप स्वयं कोई डिजिटल भुगतान कर रहे हों या अपना खाता सत्यापित कर रहे हों। लेकिन वोटर लिस्ट अपडेट की प्रक्रिया में ऐसा कुछ नहीं होता। इसलिए यदि कोई OTP मांगता है, तो यह निश्चित रूप से एक धोखाधड़ी है।

अंत में, पुलिस ने सभी मतदाताओं से यह भी अपील की है कि SIR प्रक्रिया से संबंधित किसी भी समस्या या जानकारी के लिए केवल आधिकारिक हेल्पलाइन और वेबसाइट का ही उपयोग करें। जागरूक रहें, सावधान रहें और दूसरों को भी इस बारे में जानकारी दें ताकि कोई भी साइबर ठगी का शिकार न हो सके।

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