पंजाब में सियासी हलचल, MNREGA मुद्दे पर विशेष सत्र का ऐलान !

पंजाब सरकार की ओर से कैबिनेट मीटिंग में विशेष सत्र बुलाने का फैसला लिया गया. सरकार की ओर से मनरेगा में बदलाव के खिलाफ यह फैसला लिया गया.

पंजाब सरकार ने मनरेगा (MNREGA) में किए जा रहे बदलावों के विरोध में विशेष विधानसभा सत्र बुलाने का फैसला किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह विशेष सत्र 30 दिसंबर को आयोजित किया जाएगा, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा में किए गए संशोधनों और उनके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इस संबंध में निर्णय शनिवार (20 दिसंबर) को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में लिया गया।

पंजाब में सियासी हलचल, MNREGA मुद्दे पर विशेष सत्र का ऐलान !

कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि केंद्र सरकार मनरेगा के स्वरूप में बदलाव करके गरीबों और मजदूर वर्ग के अधिकारों पर सीधा हमला कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन बदलावों से ग्रामीण गरीबों को मिलने वाला रोजगार और उनकी आय दोनों प्रभावित होंगी। चीमा ने कहा कि पंजाब सरकार इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी और राज्य के हितों की रक्षा के लिए विधानसभा के मंच पर इसे मजबूती से उठाएगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के करोड़ों गरीब परिवारों की जीवनरेखा है। यह योजना बेरोजगारी के समय में लोगों को न्यूनतम आय का सहारा देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा किए गए हालिया बदलावों से इस योजना की मूल भावना कमजोर हो रही है। पंजाब सरकार का मानना है कि इन संशोधनों से काम के दिनों में कटौती, भुगतान प्रक्रिया में जटिलता और राज्यों के अधिकारों में हस्तक्षेप जैसी समस्याएं पैदा होंगी।

हरपाल चीमा ने बताया कि विशेष विधानसभा सत्र में मनरेगा से जुड़े सभी प्रस्तावित और लागू बदलावों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही केंद्र सरकार से इन निर्णयों पर पुनर्विचार करने की मांग की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो पंजाब सरकार अन्य राज्यों को भी साथ लाकर संयुक्त रूप से केंद्र के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेगी।

पंजाब सरकार का आरोप है कि केंद्र सरकार मनरेगा के बजट में लगातार कटौती कर रही है, जिससे राज्यों को समय पर फंड नहीं मिल पा रहा है। इसके कारण मजदूरों को मजदूरी भुगतान में देरी हो रही है और ग्रामीण इलाकों में असंतोष बढ़ रहा है। सरकार का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो मनरेगा का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा।

राज्य सरकार ने यह भी संकेत दिए हैं कि विशेष सत्र में केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव या प्रस्तावना (रिज़ॉल्यूशन) के जरिए संदेश भेजा जा सकता है। इस प्रस्ताव के माध्यम से पंजाब विधानसभा केंद्र से मांग कर सकती है कि मनरेगा को कमजोर करने वाले सभी बदलाव वापस लिए जाएं और योजना को पहले की तरह प्रभावी रूप से लागू किया जाए।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह सत्र काफी अहम माना जा रहा है। आम आदमी पार्टी की सरकार पहले से ही केंद्र सरकार पर राज्यों के अधिकारों में हस्तक्षेप का आरोप लगाती रही है। मनरेगा का मुद्दा ग्रामीण और गरीब वर्ग से सीधे जुड़ा हुआ है, ऐसे में सरकार इसे एक बड़े जनहित के विषय के रूप में सामने लाना चाहती है।

विपक्षी दलों की नजर भी इस विशेष सत्र पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि विपक्ष भी मनरेगा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सरकार का समर्थन कर सकता है, हालांकि सत्र के दौरान तीखी बहस होने की भी पूरी संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सत्र केवल पंजाब तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका संदेश राष्ट्रीय स्तर पर जाएगा।

कुल मिलाकर, 30 दिसंबर को होने वाला पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र मनरेगा को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बढ़ते मतभेदों को उजागर करेगा। यह देखना अहम होगा कि इस सत्र के बाद केंद्र सरकार इस मुद्दे पर कोई नरम रुख अपनाती है या नहीं। पंजाब सरकार ने साफ कर दिया है कि वह गरीबों के अधिकारों से जुड़े इस मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं है।

Also Read :

आज तय होगी नगरों की सरकार, महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव !