पंजाब में ग्रीन अलर्ट, HC ने पेड़ कटान पर लगाई रोक !

पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 19 जनवरी को है. इस तारीख तक पंजाब में कोई भी पेड़ बिना कोर्ट की इजाजत के नहीं काटे जाएंगे.

पंजाब में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा और अहम फैसला सामने आया है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य में हर तरह के पेड़ों की कटाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह आदेश एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान दिया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई की तारीख 19 जनवरी तक पंजाब में किसी भी प्रकार का पेड़ अदालत की अनुमति के बिना नहीं काटा जाएगा। हाई कोर्ट के इस फैसले को पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक सख्त कदम माना जा रहा है।

पंजाब में ग्रीन अलर्ट, HC ने पेड़ कटान पर लगाई रोक !
पंजाब में ग्रीन अलर्ट, HC ने पेड़ कटान पर लगाई रोक !

जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान आदेश

यह मामला मोहाली में सड़क पर राउंडअबाउट (चौराहा) बनाने के लिए बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने से जुड़ा है। ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) ने इस परियोजना के तहत 251 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी थी। इसी फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है और इसके दीर्घकालिक दुष्परिणाम हो सकते हैं।

मोहाली में भी पेड़ कटाई पर रोक

मोहाली में भी पेड़ कटाई पर रोक
मोहाली में भी पेड़ कटाई पर रोक

हाई कोर्ट ने याचिका पर गंभीरता दिखाते हुए न केवल राज्यभर में पेड़ों की कटाई पर रोक लगाई, बल्कि मोहाली में प्रस्तावित 251 पेड़ों की कटाई पर भी अगली सुनवाई तक तत्काल रोक लगा दी। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक इस मामले में अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक किसी भी एजेंसी को पेड़ काटने की इजाजत नहीं होगी। अदालत ने इस दौरान यह भी संकेत दिया कि विकास परियोजनाओं में पर्यावरणीय संतुलन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

19 जनवरी तक लागू रहेगा आदेश

अदालत के आदेश के अनुसार, 19 जनवरी को इस मामले की अगली सुनवाई होगी। तब तक राज्य सरकार, विकास प्राधिकरणों और अन्य संबंधित एजेंसियों को पेड़ कटाई से संबंधित सभी कार्य रोकने होंगे। हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आदेश का उल्लंघन किया गया, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

सोहना में पहले ही कट चुके हैं कुछ पेड़

हालांकि इस बीच सोहना क्षेत्र में एक अलग स्थिति सामने आई है। यहां राउंडअबाउट निर्माण का कार्य चल रहा था और अदालत के आदेश से पहले ही कुछ पेड़ काट दिए गए। मौके पर मौजूद स्थिति से साफ पता चलता है कि पेड़ हाल ही में काटे गए हैं। कटे हुए ठूंठ और ताजा लकड़ी इस बात का संकेत देते हैं कि यह कार्रवाई कुछ ही दिन पहले हुई है। इस पर याचिकाकर्ताओं ने नाराजगी जताई है और मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

पर्यावरण संरक्षण पर कोर्ट की सख्ती

हाई कोर्ट का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब पंजाब समेत उत्तर भारत के कई राज्य पर्यावरण प्रदूषण, घटते हरित क्षेत्र और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। अदालत ने अपने आदेश के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन पेड़ों की अंधाधुंध कटाई किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है

सरकार और एजेंसियों पर बढ़ा दबाव

इस आदेश के बाद राज्य सरकार और विकास एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है कि वे वैकल्पिक उपायों पर विचार करें। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क, फ्लाईओवर और अन्य निर्माण परियोजनाओं की योजना बनाते समय पेड़ों को बचाने और ट्रांसप्लांट करने जैसे विकल्पों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

पर्यावरणविदों ने फैसले का किया स्वागत

पर्यावरण कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने हाई कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह आदेश आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली और पर्यावरण सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक मजबूत कदम है।

कुल मिलाकर, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का यह फैसला राज्य में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने की बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आया है। अब सबकी नजरें 19 जनवरी की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस मामले पर आगे की दिशा तय होगी।

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