दिल्ली में एयर प्यूरीफायर सस्ता करने की मांग, 9 जनवरी को सुनवाई !

दिल्ली में प्रदूषण के बीच एयर प्यूरी फायर की कीमतों में जीएसटी घटाने संबंधी याचिका पर हाईकोर्ट ने जवाब मांगा हबै. अब इस मामले में 9 जनवरी को सुनवाई होगी.

दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच एयर प्यूरीफायर पर लगाए गए जीएसटी (GST) को कम करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है और स्पष्ट किया है कि 10 दिनों के भीतर अपना पक्ष अदालत में दाखिल किया जाए। इस याचिका पर अगली सुनवाई 9 जनवरी को निर्धारित की गई है। इस फैसले से दिल्ली-एनसीआर के लाखों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है, जो प्रदूषण से बचाव के लिए एयर प्यूरीफायर का सहारा लेने को मजबूर हैं।

दिल्ली में एयर प्यूरीफायर सस्ता करने की मांग, 9 जनवरी को सुनवाई !
दिल्ली में एयर प्यूरीफायर सस्ता करने की मांग, 9 जनवरी को सुनवाई !

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है। ऐसे हालात में एयर प्यूरीफायर कोई लग्जरी वस्तु नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा का आवश्यक साधन बन चुका है। इसके बावजूद एयर प्यूरीफायर पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाया जा रहा है, जिससे इसकी कीमत आम लोगों की पहुंच से बाहर हो जाती है। याचिका में मांग की गई है कि एयर प्यूरीफायर को जीवन रक्षक उपकरण मानते हुए उस पर जीएसटी दर कम की जाए।

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि जब प्रदूषण को लेकर खुद सरकारें गंभीर चिंता जता रही हैं, तब एयर प्यूरीफायर जैसे उपकरणों को महंगे टैक्स स्लैब में क्यों रखा गया है। कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा सीधे तौर पर जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है और इस पर स्पष्ट नीति की जरूरत है। इसी के तहत अदालत ने केंद्र सरकार को 10 दिनों के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए वकील ने अदालत को बताया कि जीएसटी दरों में किसी भी तरह का बदलाव एक जटिल प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सहमति आवश्यक होती है। इसके अलावा जीएसटी काउंसिल की बैठक बुलाकर उस पर निर्णय लेना पड़ता है। केंद्र सरकार के वकील ने यह भी कहा कि किसी एक वस्तु पर टैक्स कम करने का फैसला तुरंत नहीं लिया जा सकता, क्योंकि इससे राजस्व और अन्य वस्तुओं की टैक्स संरचना पर भी असर पड़ता है।

हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को सुनने के बाद भी केंद्र से स्पष्ट जवाब देने को कहा है कि क्या एयर प्यूरीफायर को आवश्यक स्वास्थ्य उपकरण की श्रेणी में लाया जा सकता है या नहीं। अदालत ने संकेत दिया कि वह इस मुद्दे को केवल कर नीति के तौर पर नहीं, बल्कि जन स्वास्थ्य के नजरिए से भी देख रही है।

गौरतलब है कि दिल्ली और आसपास के इलाकों में हर साल सर्दियों के मौसम में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। स्कूलों को बंद करना, निर्माण कार्य रोकना और ट्रैफिक पर पाबंदियां लगाना जैसे कदम उठाए जाते हैं। ऐसे में घरों, स्कूलों और दफ्तरों में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। लेकिन इसकी ऊंची कीमतें और उस पर लगने वाला जीएसटी कई परिवारों के लिए इसे खरीदना मुश्किल बना देता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी मानना है कि गंभीर प्रदूषण की स्थिति में एयर प्यूरीफायर अस्थमा, एलर्जी और सांस की अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए बेहद जरूरी हो जाता है। ऐसे में टैक्स में राहत देकर सरकार ज्यादा लोगों को इसे अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है।

अब सभी की नजरें 9 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। यदि अदालत केंद्र सरकार को इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाने के संकेत देती है या जीएसटी काउंसिल के समक्ष मामला रखने को कहती है, तो इससे आम जनता को बड़ी राहत मिल सकती है। फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट का यह कदम इस बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आया है कि क्या स्वच्छ हवा अब भी सुविधा है या इसे बुनियादी अधिकार और आवश्यकता माना जाना चाहिए।

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