मुजफ्फरनगर में RDF जलाने से बढ़ते प्रदूषण पर किसानों और फैक्ट्री मालिकों में टकराव हुआ. राकेश टिकैत ने मालिकों को आंदोलन की चेतावनी दी. इधर, मिल मालिकों ने फैक्ट्री बंद करने की बात कही.
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद में बढ़ते प्रदूषण ने प्रशासन, किसानों और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जिले में फैक्टरियों में RDF (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) के नाम पर बाहर से कचरा मंगाकर जलाए जाने के आरोपों ने हालात को बेहद गंभीर बना दिया है। स्थानीय ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि इस प्रक्रिया से जहरीली गैसें निकल रही हैं, जिससे हवा, जमीन और लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। लगातार बढ़ते प्रदूषण के चलते सांस संबंधी बीमारियों में भी इजाफा होने की बात कही जा रही है।

इसी मुद्दे को लेकर शुक्रवार को जिला प्रशासन की पहल पर जिला कलेक्ट्रेट स्थित पंचायत सभागार में एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में किसानों, फैक्ट्री मालिकों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच विस्तार से चर्चा हुई। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता और वरिष्ठ किसान नेता राकेश टिकैत भी इस बैठक में मौजूद रहे। बैठक का उद्देश्य RDF जलाने से जुड़े विवाद का समाधान निकालना और प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के उपाय तलाशना था।
हालांकि बैठक के दौरान माहौल काफी गर्म रहा। किसानों और फैक्ट्री मालिकों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। किसानों ने साफ तौर पर आरोप लगाया कि कुछ फैक्ट्रियां नियमों को ताक पर रखकर दूसरे जिलों और राज्यों से कचरा मंगवा रही हैं और उसे ईंधन के रूप में जला रही हैं। उनका कहना है कि RDF के नाम पर जो कचरा जलाया जा रहा है, वह पर्यावरण मानकों पर खरा नहीं उतरता और इससे जहरीला धुआं निकलता है।
किसान नेता राकेश टिकैत ने बैठक में बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अब मुजफ्फरनगर जनपद में बाहर से कचरा लाकर जलाने की अनुमति किसी भी कीमत पर नहीं दी जाएगी। टिकैत ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर बाहर से ट्रक भरकर कचरा लाया गया, तो किसान आंदोलन तेज करेंगे। उन्होंने फैक्ट्री मालिकों को ललकारते हुए कहा, “अगर हिम्मत है तो बाहर से कचरा लाकर दिखाएं, किसान चुप नहीं बैठेंगे।”

राकेश टिकैत ने कहा कि किसान अपनी जमीन, फसल और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ उद्योगपति मुनाफे के लिए पूरे इलाके को प्रदूषण की आग में झोंक रहे हैं। टिकैत के मुताबिक RDF जलाने से निकलने वाला धुआं न सिर्फ इंसानों बल्कि पशुओं और खेती पर भी बुरा असर डाल रहा है। खेतों की उपज प्रभावित हो रही है और पानी भी प्रदूषित हो रहा है।
वहीं फैक्ट्री मालिकों ने अपने बचाव में कहा कि वे सरकारी नियमों और पर्यावरण मानकों के तहत ही RDF का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका दावा है कि RDF वैकल्पिक ईंधन है और इससे कोयले की खपत कम होती है। फैक्ट्री मालिकों का यह भी कहना है कि RDF जलाने से रोजगार मिलता है और उद्योगों का संचालन संभव हो पाता है। हालांकि किसानों ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
बैठक में मौजूद जिला प्रशासन के अधिकारियों ने दोनों पक्षों की बात सुनी और स्थिति को शांत करने का प्रयास किया। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि RDF जलाने से जुड़े सभी मामलों की जांच की जाएगी और यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी हालत में जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुजफ्फरनगर में RDF जलाने को लेकर यह विवाद अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि किसान आंदोलन का रूप लेता नजर आ रहा है। राकेश टिकैत की चेतावनी के बाद फैक्ट्री मालिकों में भी चिंता बढ़ गई है। आने वाले दिनों में प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या RDF जलाने पर पूरी तरह रोक लगती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। फिलहाल इतना तय है कि अगर समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो मुजफ्फरनगर में हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो सकते हैं।