“कांग्रेस CWC बैठक में केंद्र सरकार घिरी, मनरेगा पर खरगे का तीखा बयान”

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CWC की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मनरेगा, लोकतंत्र, संविधान और मतदाता अधिकारों पर मोदी सरकार को घेरा है. देशव्यापी आंदोलन और चुनावी रणनीति का ऐलान किया.

कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की अहम बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ आक्रामक तेवर अपनाते हुए लोकतंत्र, संविधान और गरीबों के अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े किए। बैठक में खरगे ने कहा कि देश इस समय एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां लोकतांत्रिक संस्थाओं को लगातार कमजोर किया जा रहा है, संवैधानिक मूल्यों को चोट पहुंचाई जा रही है और आम नागरिकों के अधिकार सिमटते जा रहे हैं। उनके अनुसार यह समय सिर्फ हालात की समीक्षा का नहीं, बल्कि आने वाले बड़े राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष की दिशा तय करने का निर्णायक मोड़ है।

“कांग्रेस CWC बैठक में केंद्र सरकार घिरी, मनरेगा पर खरगे का तीखा बयान”
“कांग्रेस CWC बैठक में केंद्र सरकार घिरी, मनरेगा पर खरगे का तीखा बयान”

खरगे ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों से देश के गरीब, मजदूर, किसान और वंचित वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार असहमति की आवाजों को दबाने और संस्थाओं को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश कर रही है। चाहे संसद हो, मीडिया हो या संवैधानिक संस्थाएं, हर जगह दबाव और हस्तक्षेप साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत सवाल पूछने और जवाब मांगने में होती है, लेकिन आज सवाल करने वालों को ही निशाना बनाया जा रहा है।

मनरेगा को लेकर खरगे का हमला सबसे तीखा रहा। उन्होंने संसद के शीतकालीन सत्र का जिक्र करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने मनरेगा जैसी ऐतिहासिक और जनहितकारी योजना को कमजोर कर दिया है। उनके मुताबिक मनरेगा सिर्फ एक रोजगार योजना नहीं, बल्कि करोड़ों गरीबों, मजदूरों और ग्रामीण परिवारों की जीवनरेखा है। इसे कमजोर करना सीधे तौर पर गरीबों की रोजी-रोटी पर हमला है। खरगे ने इसे “गरीबों के पेट पर लात और पीठ में छुरा घोंपने” जैसा कदम बताया।

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खरगे ने कहा कि मनरेगा महात्मा गांधी के विचारों और दर्शन से जुड़ी योजना है, जिसका मकसद ग्रामीण भारत को सम्मानजनक रोजगार देना और पलायन को रोकना था। ऐसे में इस योजना को खत्म करने या कमजोर करने की कोशिश सिर्फ आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि गांधीजी के विचारों और उनके सम्मान पर भी सीधा हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बजट में कटौती, भुगतान में देरी और नियमों को सख्त बनाकर मनरेगा को धीरे-धीरे निष्प्रभावी करना चाहती है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि जब देश में बेरोजगारी चरम पर है और महंगाई आम लोगों की कमर तोड़ रही है, ऐसे समय में रोजगार योजनाओं को कमजोर करना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार को गरीबों और मजदूरों की चिंता होती, तो वह मनरेगा को और मजबूत करती, न कि उसे खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाती।

CWC की बैठक में खरगे ने पार्टी नेताओं से आह्वान किया कि वे जमीनी स्तर पर उतरकर जनता के बीच जाएं और केंद्र सरकार की नीतियों की सच्चाई सामने रखें। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का इतिहास गरीबों, किसानों और मजदूरों के हक की लड़ाई से जुड़ा रहा है और पार्टी इस रास्ते से पीछे नहीं हटेगी। आने वाले समय में कांग्रेस सड़कों से लेकर संसद तक जनता की आवाज बुलंद करेगी।

खरगे ने यह भी साफ किया कि यह लड़ाई सिर्फ कांग्रेस की नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान को बचाने की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि अगर आज चुप रहे, तो कल अधिकार पूरी तरह खत्म हो जाएंगे। इसलिए हर लोकतांत्रिक ताकत को एकजुट होकर सरकार की जनविरोधी नीतियों का विरोध करना होगा।

कुल मिलाकर, CWC की बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे का संदेश साफ था कि कांग्रेस आने वाले दिनों में केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रामक रणनीति अपनाएगी। मनरेगा, लोकतंत्र और संविधान जैसे मुद्दों को लेकर पार्टी संघर्ष के लिए तैयार है और इस लड़ाई को देश के हर कोने तक ले जाने का संकल्प लिया गया है।

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