पंजाब में MNREGA बदलाव पर सियासी संग्राम, दलित हितों पर चोट की बात !

पंजाब विधानसभा में MNREGA में बदलाव के खिलाफ प्रस्ताव पेश हुआ, जिसे दलित और गरीब विरोधी बताया गया. सरकार ने केंद्र के फैसले को रोजगार और सामाजिक न्याय पर सीधा हमला करार दिया.

पंजाब में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MNREGA) में किए गए हालिया बदलावों को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। राज्य सरकार ने इन बदलावों के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने 30 दिसंबर को पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में इस मुद्दे पर एक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें केंद्र सरकार के फैसले को सीधे तौर पर दलित विरोधी और गरीब विरोधी करार दिया गया।

पंजाब में MNREGA बदलाव पर सियासी संग्राम, दलित हितों पर चोट की बात !
पंजाब में MNREGA बदलाव पर सियासी संग्राम, दलित हितों पर चोट की बात !

प्रस्ताव में कहा गया है कि MNREGA में किए गए बदलाव न केवल ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को कमजोर करेंगे, बल्कि इससे सामाजिक समानता और सम्मान पर भी गहरा असर पड़ेगा। पंजाब सरकार का आरोप है कि केंद्र सरकार की नीतियों के चलते मनरेगा जैसी अहम योजना को धीरे-धीरे कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

ग्रामीण रोजगार और सामाजिक सम्मान पर खतरा

ग्रामीण रोजगार और सामाजिक सम्मान पर खतरा
ग्रामीण रोजगार और सामाजिक सम्मान पर खतरा

विधानसभा में प्रस्ताव रखते हुए मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि मनरेगा केवल एक रोजगार योजना नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण गरीबों, खासकर दलित समुदाय के लिए आजीविका, आत्मसम्मान और सामाजिक सुरक्षा का साधन है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों परिवारों को साल में कम से कम 100 दिन का रोजगार मिलता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति को सहारा मिलता है।

मंत्री ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार द्वारा किए गए बदलाव लागू हुए तो इससे ग्रामीण रोजगार व्यवस्था चरमरा जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे मजदूरी भुगतान, काम की उपलब्धता और पंचायतों की भूमिका पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।

दलित समुदाय पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर

प्रस्ताव में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि MNREGA में बदलावों का सबसे अधिक असर दलित समुदाय पर पड़ेगा। पंजाब सरकार के अनुसार, राज्य में मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों का बड़ा हिस्सा दलित वर्ग से आता है। यह योजना उनके लिए स्थायी आय का स्रोत है।

तरुणप्रीत सिंह सौंद ने कहा, “दलित समुदाय के लिए मनरेगा सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि सम्मान से जुड़ा मुद्दा है। इस योजना को कमजोर करना सीधे तौर पर दलितों की आजीविका पर हमला है।” उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां गरीब और हाशिए पर खड़े वर्गों के हितों के खिलाफ जा रही हैं।

मनरेगा को खत्म करने की साजिश का आरोप

प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि MNREGA में किए जा रहे बदलाव एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हैं, जिसका मकसद इस योजना को धीरे-धीरे समाप्त करना है। पंजाब सरकार का आरोप है कि केंद्र सरकार फंडिंग, काम की शर्तों और प्रशासनिक ढांचे में बदलाव कर मनरेगा को अप्रभावी बनाना चाहती है।

राज्य सरकार ने कहा कि अगर समय रहते इन बदलावों का विरोध नहीं किया गया, तो आने वाले समय में ग्रामीण गरीबों के लिए रोजगार के अवसर और भी सीमित हो जाएंगे।

विधानसभा में राजनीतिक टकराव

इस प्रस्ताव के बाद विधानसभा में राजनीतिक बहस भी तेज हो गई। सत्तारूढ़ दल के विधायकों ने केंद्र सरकार पर तीखे आरोप लगाए और कहा कि गरीबों की योजनाओं में कटौती कर उन्हें हाशिए पर धकेला जा रहा है। वहीं विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राय रखी, हालांकि कई विपक्षी विधायकों ने माना कि मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

केंद्र से फैसले पर पुनर्विचार की मांग

प्रस्ताव के जरिए पंजाब विधानसभा ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह MNREGA में किए गए बदलावों पर पुनर्विचार करे और राज्यों से सलाह-मशविरा कर ही कोई फैसला ले। राज्य सरकार ने साफ कहा कि वह ग्रामीण गरीबों और दलित समुदाय के हितों से कोई समझौता नहीं करेगी।

पंजाब सरकार का कहना है कि मनरेगा जैसी योजनाएं संघीय ढांचे की भावना के अनुरूप चलनी चाहिए और राज्यों को इनके क्रियान्वयन में पर्याप्त अधिकार मिलने चाहिए।

कुल मिलाकर, MNREGA में बदलाव को लेकर पंजाब में राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। यह मुद्दा आने वाले दिनों में राज्य और केंद्र के बीच टकराव का बड़ा कारण बन सकता है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर ग्रामीण गरीबों और दलित समुदाय के हित जुड़े हुए हैं।

Also Read :

साइबर सेफ्टी में बड़ा कदम: Noida Airport–IT कंपनी गठबंधन !