सरकारी नौकरियों में आरक्षण नियम सख्त, योगी ने ACS को दिए निर्देश !

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सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जारी शासनादेश में ओबीसी, एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस के साथ दिव्यांग, महिला और पूर्व सैनिकों के आरक्षण को सख्ती से लागू करने के आदेश दिए गए हैं.

उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी भर्तियों में आरक्षण नियमों के पालन को लेकर बड़ा और सख्त कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य में आरक्षण से संबंधित एक महत्वपूर्ण शासनादेश जारी किया गया है। इस आदेश के तहत स्पष्ट कर दिया गया है कि प्रदेश में होने वाली सभी सरकारी भर्तियों में आरक्षण नियमों का कड़ाई से पालन अनिवार्य होगा और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सरकारी नौकरियों में आरक्षण नियम सख्त, योगी ने ACS को दिए निर्देश !
सरकारी नौकरियों में आरक्षण नियम सख्त, योगी ने ACS को दिए निर्देश !

जारी शासनादेश के अनुसार, प्रदेश के सभी अपर मुख्य सचिव (ACS) और प्रमुख सचिवों को सीधे तौर पर जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे अपने-अपने विभागों में चल रही और भविष्य में होने वाली सभी भर्ती प्रक्रियाओं की निगरानी करें। सरकार ने साफ कहा है कि यदि किसी भर्ती में आरक्षण नियमों के उल्लंघन की शिकायत सामने आती है, तो इसके लिए संबंधित विभाग और अधिकारी जिम्मेदार माने जाएंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि आरक्षण व्यवस्था सामाजिक न्याय की मूल भावना से जुड़ी है और इसमें किसी भी प्रकार की चूक या मनमानी समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों पर सीधा असर डालती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है कि अब भर्ती प्रक्रिया के हर चरण—विज्ञापन जारी करने से लेकर अंतिम चयन सूची तक—आरक्षण के प्रावधानों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए।

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शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भर्ती से पहले पदों का स्पष्ट वर्गीकरण किया जाए और आरक्षित श्रेणियों के लिए निर्धारित रोस्टर का सही तरीके से पालन हो। किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी या तकनीकी त्रुटि पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इससे पहले कई बार भर्ती प्रक्रियाओं में आरक्षण को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं, जिनके चलते नियुक्तियां रद्द तक करनी पड़ी थीं।

सरकार का कहना है कि इस सख्ती का उद्देश्य न केवल आरक्षण नियमों को लागू करना है, बल्कि भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी और विवादमुक्त बनाना भी है। शासनादेश में विभागों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे समय-समय पर भर्ती प्रक्रियाओं का ऑडिट करें और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन न हो।

आरक्षण से जुड़े इस फैसले को सामाजिक और राजनीतिक दोनों ही दृष्टिकोण से अहम माना जा रहा है। विपक्षी दल लंबे समय से यह आरोप लगाते रहे हैं कि कई भर्तियों में आरक्षण नियमों का सही ढंग से पालन नहीं किया जाता। ऐसे में सरकार का यह आदेश विपक्ष के आरोपों का जवाब भी माना जा रहा है। वहीं, सरकार समर्थकों का कहना है कि यह फैसला समाज के वंचित और पिछड़े वर्गों के हितों की रक्षा के लिए जरूरी था।

शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री स्वयं इस पूरे मामले की निगरानी करेंगे। जरूरत पड़ने पर भर्ती से जुड़े मामलों की समीक्षा बैठकें भी की जाएंगी। इसके अलावा, सभी विभागों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी भर्ती को लेकर कोर्ट में मामला विचाराधीन है, तो संबंधित कानूनी प्रावधानों और आदेशों का भी पूरी तरह पालन किया जाए।

प्रदेश में शिक्षा, पुलिस, स्वास्थ्य, राजस्व और अन्य विभागों में बड़ी संख्या में भर्तियां प्रस्तावित हैं। ऐसे में यह आदेश इन सभी भर्तियों पर सीधा असर डालेगा। अब किसी भी विभाग के लिए यह संभव नहीं होगा कि वह आरक्षण नियमों को नजरअंदाज कर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ा दे।

कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह फैसला यह संकेत देता है कि प्रदेश सरकार आरक्षण व्यवस्था को लेकर पूरी तरह गंभीर है। सरकार की मंशा साफ है कि सामाजिक न्याय के सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस सख्ती का असर भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और विवादों में कमी के रूप में कितना नजर आता है।

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