संगम तट पर बाबा का जलवा, लग्ज़री कारों के काफिले ने खींचा सबका ध्यान !

प्रयागराज में आयोजित माघ मेला 2026 इस बार आध्यात्मिक आस्था के साथ-साथ एक अनोखे आकर्षण को लेकर भी चर्चा में है। माघ मेला क्षेत्र में पहुंचे एक बाबा अपने अलग अंदाज़ और शाही ठाठ-बाट के कारण श्रद्धालुओं के बीच खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। साधारण वेश में रहने वाले संतों के बीच इस बाबा का लग्ज़री लाइफस्टाइल लोगों के लिए कौतूहल का विषय बन गया है।

संगम तट पर बाबा का जलवा, लग्ज़री कारों के काफिले ने खींचा सबका ध्यान !
संगम तट पर बाबा का जलवा, लग्ज़री कारों के काफिले ने खींचा सबका ध्यान !

मेला क्षेत्र में जब बाबा का काफिला दाखिल हुआ, तो हर किसी की नजरें ठहर गईं। बाबा के साथ महंगी गाड़ियों का लंबा काफिला नजर आया, जिसमें लग्ज़री कारें और हाई-एंड एसयूवी शामिल थीं। बताया जा रहा है कि इन गाड़ियों की कीमत करोड़ों रुपये में है। आमतौर पर संत-महात्माओं को सादगी और त्याग के प्रतीक के रूप में देखा जाता है, लेकिन इन बाबा का अंदाज़ बिल्कुल अलग है। यही वजह है कि श्रद्धालु ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भी इनकी खूब चर्चा हो रही है।

माघ मेला क्षेत्र में बाबा के शिविर को देखने के लिए रोजाना बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। कुछ लोग इसे आधुनिक समय का संत-संस्कृति का बदलता रूप मान रहे हैं, तो कुछ इसे आस्था और वैभव के अनोखे मेल के तौर पर देख रहे हैं। बाबा के अनुयायियों का कहना है कि वे साधना के साथ-साथ समाज सेवा और धार्मिक आयोजनों में भी सक्रिय रहते हैं और उनके पास जो संसाधन हैं, वह भक्तों की श्रद्धा और सहयोग का परिणाम हैं।

संगम तट पर बाबा का जलवा, लग्ज़री कारों के काफिले ने खींचा सबका ध्यान !
संगम तट पर बाबा का जलवा, लग्ज़री कारों के काफिले ने खींचा सबका ध्यान !

बाबा की चर्चा उस वक्त और तेज हो गई, जब उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम भी उनके बारे में सार्वजनिक तौर पर बात करते नजर आए। डिप्टी सीएम द्वारा दिए गए बयान के बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक छा गया। कई लोग बाबा के प्रभाव और उनकी लोकप्रियता को माघ मेला 2026 की एक बड़ी पहचान के रूप में देख रहे हैं।

माघ मेला वैसे भी साधु-संतों, अखाड़ों और कल्पवासियों के कारण विशेष महत्व रखता है। हर साल लाखों श्रद्धालु संगम तट पर स्नान कर पुण्य अर्जित करते हैं। लेकिन इस बार बाबा की मौजूदगी ने मेले को अलग ही रंग दे दिया है। उनके साथ फोटो खिंचवाने और उनके दर्शन के लिए लोगों की भीड़ लगी रहती है। सोशल मीडिया पर बाबा के काफिले और उनके शिविर की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें महंगी गाड़ियां, सुरक्षा व्यवस्था और भव्य टेंट साफ नजर आते हैं।

हालांकि, बाबा को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। कुछ लोग यह सवाल कर रहे हैं कि संत जीवन और इतनी भव्यता के बीच तालमेल कैसे बैठता है। वहीं, उनके समर्थकों का कहना है कि आध्यात्म और आधुनिक सुविधाएं एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। उनका तर्क है कि आज के दौर में अगर कोई संत समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बना रहा है और संसाधनों का इस्तेमाल धर्म और सेवा के लिए कर रहा है, तो इसमें गलत क्या है।

प्रशासन की ओर से भी बाबा के काफिले और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नजर रखी जा रही है। मेला प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी को भी नियमों से ऊपर नहीं रखा जाएगा। बाबा के शिविर में भी सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो।

कुल मिलाकर, माघ मेला 2026 में यह बाबा आस्था, वैभव और चर्चा का ऐसा संगम बन चुके हैं, जिसने पूरे मेले का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। श्रद्धालुओं के बीच जहां इन्हें देखने की उत्सुकता बनी हुई है, वहीं राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी इन पर बहस जारी है। यही वजह है कि इस साल माघ मेला सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि चर्चाओं का बड़ा मंच बन गया है।

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