उन्नाव रेप पीड़िता के पिता हत्याकांड में कुलदीप सेंगर को बड़ा झटका !

 दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में सजा काट रहे पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर की सजा माफी याचिका खारिज कर दी है.

उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए दोषी ठहराए जा चुके उन्नाव के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने सेंगर की सजा पर रोक और सजा माफी से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि सेंगर को फिलहाल जेल में रहकर अपनी सजा पूरी करनी होगी।

उन्नाव रेप पीड़िता के पिता हत्याकांड में कुलदीप सेंगर को बड़ा झटका !
उन्नाव रेप पीड़िता के पिता हत्याकांड में कुलदीप सेंगर को बड़ा झटका !

दरअसल, कुलदीप सिंह सेंगर ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपनी सजा पर रोक लगाने की मांग की थी। उन्होंने अदालत से यह आग्रह किया था कि उनकी सजा को निलंबित किया जाए या उसमें राहत दी जाए। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस रविंदर डुडेजा ने इसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सजा में किसी तरह की राहत नहीं दी जा सकती।

गौरतलब है कि उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में कुलदीप सेंगर को 10 साल की सजा सुनाई गई है। यह मामला देशभर में सुर्खियों में रहा था और इसे न्याय व्यवस्था की एक बड़ी परीक्षा के रूप में देखा गया था। पीड़िता के पिता की मौत पुलिस हिरासत में हुई थी, जिसे अदालत ने बेहद गंभीर अपराध माना था।

इससे पहले, 13 मार्च 2020 को अधीनस्थ अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कुलदीप सेंगर को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही अदालत ने उन पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। अधीनस्थ अदालत ने अपने फैसले में साफ शब्दों में कहा था कि पीड़िता के पिता परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे और उनकी हिरासत में हुई मौत के मामले में किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जा सकती।

उन्नाव रेप पीड़िता के पिता हत्याकांड में कुलदीप सेंगर को बड़ा झटका !
उन्नाव रेप पीड़िता के पिता हत्याकांड में कुलदीप सेंगर को बड़ा झटका !

अदालत ने यह भी माना था कि यह मामला सत्ता के दुरुपयोग और कानून व्यवस्था के गंभीर उल्लंघन से जुड़ा हुआ है। इसलिए दोषियों को कड़ी सजा देना जरूरी है, ताकि समाज में यह संदेश जाए कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो।

इस केस में कुलदीप सेंगर अकेले दोषी नहीं पाए गए थे। अदालत ने सेंगर के भाई अतुल सिंह सेंगर सहित पांच अन्य लोगों को भी 10-10 साल की जेल की सजा सुनाई थी। जांच और सुनवाई के दौरान यह सामने आया था कि पीड़िता के पिता को शस्त्र अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था और यह गिरफ्तारी सेंगर के इशारे पर हुई थी। पुलिस हिरासत में उनके साथ कथित रूप से बर्बरता की गई, जिसके चलते 9 अप्रैल 2018 को उनकी मौत हो गई थी।

हालांकि, अधीनस्थ अदालत ने यह भी कहा था कि इस मामले में हत्या का सीधा इरादा साबित नहीं हो पाया है। इसी वजह से अदालत ने कुलदीप सेंगर को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत हत्या का दोषी नहीं ठहराया। इसके बजाय, उन्हें आईपीसी की धारा 304 के तहत गैर-इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए अधिकतम सजा दी गई।

यह पूरा मामला साल 2017 के उन्नाव रेप केस से जुड़ा हुआ है, जिसमें एक नाबालिग लड़की के अपहरण और बलात्कार का आरोप लगा था। उस मामले में भी कुलदीप सेंगर को दोषी ठहराया गया था और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। रेप केस के बाद पीड़िता और उसके परिवार को लगातार धमकियों और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था, जिसकी कड़ी के रूप में पीड़िता के पिता की गिरफ्तारी और फिर हिरासत में मौत का मामला सामने आया।

दिल्ली हाई कोर्ट के ताजा फैसले को पीड़िता और उसके परिवार के लिए न्याय की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इस फैसले से यह संदेश भी जाता है कि गंभीर अपराधों में दोषी पाए गए लोगों को सजा से राहत दिलाना आसान नहीं है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगे इस मामले में कोई और कानूनी कदम उठाया जाता है या नहीं, लेकिन फिलहाल कुलदीप सेंगर की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं।

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