इंग्लैंड में हुई वैभव की असली परीक्षा…

आईपीएल में वैभव सूर्यवंशी ने गेंदबाजों पर राज किया. चौके-छक्कों की बरसात ने उन्हें कुछ ही महीनों में भारतीय क्रिकेट का सबसे चर्चित चेहरा बना दिया, लेकिन इंग्लैंड के इस दौरे ने उन्हें क्रिकेट का दूसरा और कहीं ज्यादा कठिन चेहरा दिखाया है, 14, 13 और 15 रनों की तीन पारियां भले निराशाजनक हों, लेकिन इन्हीं स्कोरों में वह सीख छिपी है, जो किसी भी छोटी उम्र बल्लेबाज को महान बनने की राह दिखाती है|

वैभव अभी सिर्फ 15 साल के हैं,  इसलिए तीन पारियों के आधार पर उनके भविष्य का फैसला सुनाना जल्दबाजी होगी. क्रिकेट का इतिहास गवाह है कि प्रतिभा आपको पहचान दिला सकती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लंबी सफलता तकनीक, धैर्य और परिस्थितियों के मुताबिक खुद को ढालने की क्षमता से मिलती है. इंग्लैंड में वैभव अभी यही सबक सीख रहे हैं|

इंग्लैंड ने दिखाया कि असली परीक्षा क्या होती है|

भारतीय बल्लेबाजों के लिए इंग्लैंड हमेशा सबसे कठिन दौरों में रहा है, यहां नई गेंद लगातार हरकत करती है, उछाल अलग होती है और छोटी-सी तकनीकी गलती भी विकेट बन जाती है, यही वजह है कि दुनिया के बड़े-बड़े बल्लेबाज भी यहां संघर्ष करते रहे हैं|

ऐसे में यह उम्मीद करना कि 15 साल का एक किशोर बल्लेबाज आते ही 35-40 गेंदों में शतक जड़ देगा, क्रिकेट की वास्तविकता से ज्यादा हमारी कल्पना थी|

महत्वपूर्ण यह भी है कि सिर्फ वैभव ही नहीं जूझ रहे हैं… पूरी भारतीय बल्लेबाजी लय में नहीं दिखी. अभिषेक शर्मा और कप्तान श्रेयस अय्यर को छोड़ दें तो लगभग सभी बल्लेबाज रन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, इसलिए तीन पारियों का पूरा बोझ अकेले वैभव के कंधों पर डालना न तो न्यायसंगत है और न ही व्यावहारिक|