लखनऊ/नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद सांसद और आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद अब उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की तैयारी में हैं। 25 जुलाई को प्रस्तावित आंदोलन के जरिए वह योगी सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति बना रहे हैं। हाल के दिनों में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में उनकी सक्रिय मौजूदगी ने उन्हें विपक्षी राजनीति में नई ऊर्जा दी है।
चंद्रशेखर का कहना है कि प्रदेश में दलितों, पिछड़ों, युवाओं, छात्रों और बेरोजगारों की आवाज़ को दबाया जा रहा है। उनका आरोप है कि कानून-व्यवस्था, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर राज्य सरकार पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा कि जनता के अधिकारों की लड़ाई अब सड़क से लेकर सदन तक लड़ी जाएगी।
सरकार पर क्या बोले चंद्रशेखर?
25 जुलाई के आंदोलन से पहले चंद्रशेखर ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि:
- उत्तर प्रदेश में दलितों और कमजोर वर्गों पर अत्याचार की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
- युवाओं को रोजगार और छात्रों को पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया नहीं मिल रही।
- सरकार जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटका रही है।
- लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने वालों पर कार्रवाई की जा रही है।
- उनकी पार्टी सामाजिक न्याय और संविधान की रक्षा के लिए प्रदेशव्यापी संघर्ष करेगी।
यूपी की राजनीति में कितना असर?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जंतर-मंतर पर मिले समर्थन से चंद्रशेखर को राजनीतिक ऊर्जा जरूर मिली है, लेकिन उसे उत्तर प्रदेश में वोटों में बदलना आसान नहीं होगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दलित युवाओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है, जबकि पूरे प्रदेश में संगठन का विस्तार अभी भी बड़ी चुनौती है। ऐसे में 25 जुलाई का प्रदर्शन उनकी राजनीतिक ताकत और जनसमर्थन की अहम परीक्षा माना जा रहा है।
आगे की रणनीति
चंद्रशेखर ने संकेत दिए हैं कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। पार्टी कार्यकर्ताओं को जिला स्तर तक जनसंजंतर-मंतर से मिले बूस्टर को यूपी में कितना कैश करा पाएंगे चंद्रशेखर? 25 जुलाई को सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारीपर्क अभियान चलाने और जनता के मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरने के निर्देश भी दिए गए हैं।