अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर पीएम मोदी का संबोधन— ‘योग बना वैश्विक सेतु’ !

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आज पूरी दुनिया योग कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज विशाखापत्तनम में योग दिवस का नेतृत्व कर रहे हैं। विशाखापत्तनम में 3 लाख लोगों के साथ सामूहिक योग का आयोजन किया गया है।

21 जून 2025, को दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का 11वां संस्करण धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों और वैश्विक समुदाय को संबोधित करते हुए योग के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनका संबोधन भारत सहित अनेक देशों में लाइव प्रसारित हुआ, जिसे करोड़ों लोगों ने देखा और सराहा।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर पीएम मोदी का संबोधन— 'योग बना वैश्विक सेतु' !
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर पीएम मोदी का संबोधन— ‘योग बना वैश्विक सेतु’ !

पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा:
“योग केवल भारत की प्राचीन परंपरा नहीं है, यह आज के युग में भी उतना ही प्रासंगिक है। योग शरीर, मन और आत्मा को जोड़ने का माध्यम है, और आज यह पूरे विश्व को जोड़ने वाला एक सेतु बन चुका है।”

विश्वभर में योग की गूंज

प्रधानमंत्री ने इस बात पर गर्व जताया कि आज दुनिया के 190 से अधिक देशों में योग दिवस मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि योग ने भाषा, भूगोल, संस्कृति और सीमाओं से ऊपर उठकर मानवता को एक सूत्र में पिरोया है।
“आज योग केवल व्यक्तिगत साधना नहीं रहा, बल्कि वैश्विक चेतना का आधार बन गया है,” उन्होंने कहा।

सामूहिक योगाभ्यास का आयोजन

इस वर्ष योग दिवस की थीम थी — “Yoga for Self and Society” (स्वयं और समाज के लिए योग)। इस थीम को केंद्र में रखते हुए देशभर में लाखों स्थानों पर सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें स्कूली बच्चों से लेकर जवानों, डॉक्टरों, कर्मचारियों और आम नागरिकों ने हिस्सा लिया।

प्रधानमंत्री ने खुद भी एक प्रमुख स्थल पर योगाभ्यास में हिस्सा लिया और विभिन्न योगासन कर लोगों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा:
“जब हम योग करते हैं, तो हम न केवल अपने भीतर के संतुलन को पाते हैं, बल्कि समाज और प्रकृति से भी गहराई से जुड़ते हैं।”

संयुक्त राष्ट्र में योग की भूमिका

पीएम मोदी ने 2014 में संयुक्त राष्ट्र में दिए गए अपने उस ऐतिहासिक प्रस्ताव को भी याद किया, जिसमें उन्होंने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित करने की अपील की थी। उन्होंने बताया कि उस प्रस्ताव को रिकॉर्ड संख्या में देशों का समर्थन मिला और सिर्फ 90 दिनों में इसे पारित कर दिया गया — जो संयुक्त राष्ट्र इतिहास में एक मिसाल है।

युवाओं और समाज के लिए संदेश

प्रधानमंत्री ने युवाओं से आग्रह किया कि वे डिजिटल युग में तनाव और असंतुलन से निपटने के लिए योग को अपनाएं। उन्होंने कहा कि योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य, बल्कि मानसिक स्पष्टता, आत्म-संयम और अनुशासन का भी माध्यम है।

उन्होंने कहा:
“भारत ने दुनिया को शांति और संतुलन का रास्ता दिखाया है, और योग उस रास्ते की रोशनी है।”

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देहरादून में आयोजित योग सत्र में लिया हिस्सा

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर देहरादून में आयोजित योग सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हिस्सा लिया

निष्कर्ष:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर दिया गया संबोधन न सिर्फ योग के महत्व को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत किस तरह आध्यात्मिक ज्ञान और जीवनशैली के माध्यम से वैश्विक नेतृत्व कर रहा है।
योग अब भारत की सीमाओं से बाहर निकलकर पूरी दुनिया के जीवन का हिस्सा बन गया है — और यही है ‘योग का वैश्विक सेतु’।

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