पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती के लिए समिति का गठन किया गया है। इस समिति में 100 से ज्यादा नेता और हस्तियां शामिल हैं।
भारतीय राजनीति के सबसे करिश्माई नेताओं में गिने जाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती वर्ष 2025 में मनाई जाएगी। उनकी शताब्दी को ऐतिहासिक और भव्य स्वरूप देने के लिए केंद्र सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति में 100 से अधिक वरिष्ठ नेता, मंत्री, सांसद, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियों को शामिल किया गया है।

समिति में कौन-कौन शामिल
जानकारी के अनुसार, इस समिति में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के अलावा अन्य दलों के प्रतिनिधियों को भी जगह दी गई है। इसके साथ ही कला, साहित्य, शिक्षा, खेल और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े नामचीन लोग भी इसमें शामिल हैं। उद्देश्य यह है कि अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत और उनके विचारों को व्यापक रूप से देशभर में पहुंचाया जा सके।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, समिति में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, लोकसभा अध्यक्ष, कई राज्यों के मुख्यमंत्री और राज्यपाल भी शामिल किए गए हैं। इसके अलावा पूर्व नौकरशाहों, शिक्षाविदों और सांस्कृतिक जगत की हस्तियों को भी इसमें जगह दी गई है।
शताब्दी समारोह की रूपरेखा
समिति का मुख्य उद्देश्य अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती वर्ष (2025-26) के दौरान देशभर में कार्यक्रमों का आयोजन करना है। इसमें राष्ट्रीय स्तर से लेकर जिला और ब्लॉक स्तर तक सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगोष्ठियां, साहित्यिक गोष्ठियां, कवि सम्मेलन और प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाएगा।
इसके साथ ही वाजपेयी जी की कविताओं, भाषणों और संसदीय जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को भी प्रदर्शित करने की योजना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संकेत दिए हैं कि इस शताब्दी वर्ष को देश की जनता के लिए प्रेरणादायक रूप में पेश किया जाएगा।
वाजपेयी की विरासत
अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति में अपनी सौम्य छवि, बेबाक भाषणों और सर्वस्वीकार्य नेतृत्व शैली के लिए जाने जाते हैं। वे तीन बार देश के प्रधानमंत्री बने और उनके कार्यकाल में भारत ने कई ऐतिहासिक फैसले लिए। पोखरण परमाणु परीक्षण, दिल्ली-लाहौर बस यात्रा, स्वर्णिम चतुर्भुज योजना और कश्मीर मसले पर उनका संतुलित दृष्टिकोण उनके कार्यकाल की बड़ी उपलब्धियां मानी जाती हैं।
इसके अलावा, वाजपेयी एक प्रख्यात कवि और वक्ता भी थे। उनके भाषणों में साहित्यिक मिठास और राजनीतिक दृढ़ता का अनूठा संगम देखने को मिलता था। उनकी कविताएं आज भी युवाओं को प्रेरित करती हैं।
विपक्ष की भूमिका और सर्वदलीय माहौल
गौरतलब है कि इस समिति में सिर्फ भाजपा ही नहीं बल्कि विपक्षी दलों के नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है। इसका उद्देश्य अटल बिहारी वाजपेयी की उस छवि को जीवित रखना है, जिसमें वे सभी दलों के बीच स्वीकार्य नेता के रूप में माने जाते थे। वाजपेयी का राजनीतिक जीवन संवाद और सहमति की राजनीति का उदाहरण रहा है, इसलिए उनकी शताब्दी समारोह को सर्वदलीय स्वरूप दिया जा रहा है।
स्मारक और प्रकाशन
सूत्रों की मानें तो अटल जी की स्मृति में कई नई योजनाएं भी घोषित की जा सकती हैं। देशभर में उनकी याद में विशेष स्मारक, पुस्तकालय और सांस्कृतिक केंद्र स्थापित करने की तैयारी है। इसके साथ ही उनके भाषणों और कविताओं पर आधारित विशेष प्रकाशन और डॉक्यूमेंट्री फिल्में भी रिलीज की जाएंगी।
निष्कर्ष
अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती सिर्फ एक राजनीतिक आयोजन नहीं बल्कि राष्ट्र की उस भावना का उत्सव होगी, जिसमें लोकतंत्र, संवाद, सहिष्णुता और विकास की गूंज सुनाई देती है। समिति का गठन इस बात का संकेत है कि देश उनकी विरासत को नए सिरे से याद करेगा और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएगा।