उत्तर भारत में मॉनसून की तेज बारिश और बाढ़ से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। दिल्ली, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल और यूपी में हालात गंभीर हैं। यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है।
उत्तर भारत में मॉनसून ने इस बार कहर बरपा दिया है। अगस्त के आखिरी दिनों में शुरू हुई तेज बरसात ने कई राज्यों को अपनी चपेट में ले लिया है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और बिहार समेत कई हिस्सों में लगातार हो रही भारी बारिश ने आम लोगों की जिंदगी अस्त-व्यस्त कर दी है। कहीं सड़कें तालाब में तब्दील हो गई हैं, तो कहीं नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि प्रशासन को अलर्ट जारी करना पड़ा है और कई जिलों में स्कूल-कॉलेज तक बंद करने पड़े हैं।

दिल्ली-एनसीआर में जलजमाव से हाहाकार
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर क्षेत्र में भारी बारिश ने यातायात व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। सुबह-शाम ऑफिस जाने वाले लोगों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ रहा है। कई इलाकों में सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया है। गाजियाबाद, नोएडा और गुरुग्राम में नालों के उफान पर आने से जलजमाव की समस्या और भी गंभीर हो गई है। दिल्ली सरकार ने आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखा है और राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
उत्तराखंड और हिमाचल में भूस्खलन का खतरा

पर्वतीय राज्यों में स्थिति और भी चिंताजनक है। उत्तराखंड के कई जिलों में लगातार हो रही मूसलधार बारिश से नदियां उफान पर हैं। चारधाम यात्रा मार्ग पर कई जगह भूस्खलन होने की खबर है, जिसके चलते यात्री फंसे हुए हैं। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनज़र यात्रियों को रुकने की अपील की है। वहीं, हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं से दर्जनों सड़कें बंद हो गई हैं। स्थानीय लोग और पर्यटक दोनों परेशान हैं। कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है।
उत्तर प्रदेश और बिहार में गंगा-यमुना का जलस्तर बढ़ा
मैदानी इलाकों में भी हालात कम गंभीर नहीं हैं। उत्तर प्रदेश में गंगा, यमुना और घाघरा जैसी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर और बलिया जैसे शहरों में निचले इलाकों में पानी भर गया है। हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हुए हैं। वहीं, बिहार में गंडक, कोसी और बागमती नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। कई जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति बन चुकी है और लोग ऊंचाई वाले स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
पंजाब-हरियाणा में फसलों को नुकसान

पंजाब और हरियाणा में लगातार हो रही बारिश से किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। धान और सब्जियों की फसलें पानी में डूब गई हैं। खेतों में खड़ा पानी निकल नहीं रहा, जिससे कृषि अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है। कई जगहों पर बिजली आपूर्ति ठप है और गांवों में संचार सेवाएं बाधित हुई हैं।
जनजीवन पर असर
लगातार हो रही बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। शहरों में लोग ऑफिस और स्कूल तक नहीं पहुंच पा रहे, तो गांवों में लोग बाढ़ और बिजली कटौती से जूझ रहे हैं। ट्रेनों और फ्लाइट्स की सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। कई मार्गों पर ट्रेनें घंटों लेट चल रही हैं, जबकि एयरपोर्ट पर उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं। सड़कों पर जगह-जगह गड्ढों और जलभराव के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
प्रशासन की तैयारी और अलर्ट
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले 48 घंटे तक उत्तर भारत के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को तैनात किया है। जिन क्षेत्रों में नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, वहां नावों और रेस्क्यू टीमों की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
निष्कर्ष
उत्तर भारत में मॉनसून की तेज रफ्तार ने इस बार लोगों को भारी मुसीबत में डाल दिया है। जहां एक ओर बारिश जलसंकट से जूझते इलाकों के लिए राहत बनकर आती है, वहीं दूसरी ओर इसकी अधिकता ने तबाही मचा दी है। सड़क से लेकर खेत तक और गांव से लेकर शहर तक, हर जगह लोग प्रभावित हो रहे हैं। अब सबकी निगाहें मौसम विभाग की भविष्यवाणी और प्रशासन की तैयारियों पर टिकी हैं, ताकि जल्द से जल्द सामान्य जीवन पटरी पर लौट सके।
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