मध्य प्रदेश के सीएम डॉक्टर मोहन यादव ने बड़ी पहल करते हुए वैदिक घड़ी और ऐप का उद्घाटन किया है। लोगों को 7000 वर्षों का पंचांग अब मोबाइल पर मिलेगा। भारत की पहली वैदिक घड़ी और एप–परंपरा और तकनीक का संगम हुआ है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने परंपरा और तकनीक का अनूठा संगम करते हुए एक बड़ी पहल की है। इंदौर में आयोजित एक विशेष समारोह में उन्होंने वैदिक घड़ी और वैदिक पंचांग ऐप का उद्घाटन किया। इस ऐप की खासियत यह है कि इसमें 7000 वर्षों का पंचांग उपलब्ध होगा, जिसे लोग अब आसानी से अपने मोबाइल पर देख सकेंगे। इस अनोखे इनोवेशन के जरिए भारत की प्राचीन ज्योतिषीय और खगोल विज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रयास किया गया है।

वैदिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का मेल
भारत सदियों से अपने खगोल विज्ञान और वैदिक गणनाओं के लिए जाना जाता है। प्राचीन काल में समय का निर्धारण सिर्फ सूर्य, चंद्र और नक्षत्रों की गति से किया जाता था। उस समय बनाए गए पंचांग न केवल धार्मिक क्रियाओं के लिए बल्कि कृषि, मौसम और जीवन की महत्वपूर्ण गतिविधियों के लिए भी मार्गदर्शक थे। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह वैदिक ऐप और घड़ी, परंपरा और आधुनिकता का बेहतरीन मेल है, जो युवाओं को हमारी जड़ों से जोड़ने का काम करेगा।
7000 वर्षों का पंचांग – एक अनोखी उपलब्धि

इस वैदिक ऐप में पंचांग सिर्फ वर्तमान वर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें 7000 साल का विस्तृत पंचांग शामिल किया गया है। इसका अर्थ यह है कि उपयोगकर्ता प्राचीन समय से लेकर आने वाले हजारों वर्षों तक के ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति, तिथियां, वार, नक्षत्र, योग और करण की जानकारी हासिल कर सकेंगे। यह कदम भारतीय वैदिक गणना पद्धति की महत्ता को और अधिक उजागर करता है।
धार्मिक और सामाजिक जीवन में मददगार
पंचांग का भारतीय समाज में हमेशा से विशेष महत्व रहा है। विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, व्रत, उपवास और पर्व-त्योहार जैसे सभी कार्य पंचांग देखकर ही किए जाते हैं। अब तक लोग इसके लिए पंडितों और किताबों पर निर्भर रहते थे। लेकिन अब इस ऐप के जरिए कोई भी व्यक्ति अपने मोबाइल पर ही शुभ मुहूर्त और धार्मिक तिथियों की जानकारी प्राप्त कर सकेगा। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी होगा, जो विदेशों में रहते हैं और भारतीय पंचांग से जुड़े रहते हुए अपने संस्कारों और परंपराओं को निभाना चाहते हैं।
वैदिक घड़ी की विशेषताएँ
मोहन यादव द्वारा लॉन्च की गई वैदिक घड़ी भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी। यह घड़ी सिर्फ सेकेंड, मिनट और घंटे नहीं बताती, बल्कि इसमें घटी, पल और प्रहर जैसे प्राचीन समय मापने की इकाइयों का उपयोग किया गया है। घड़ी में सूर्य और चंद्र की स्थिति के आधार पर समय का निर्धारण किया जाता है। इससे लोग समझ पाएंगे कि भारतीय परंपरा में समय को कैसे देखा और मापा जाता था।
विज्ञान और संस्कृति को बढ़ावा
कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि भारतीय सभ्यता का खजाना सिर्फ धार्मिक परंपराओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तार्किक गणनाओं से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि यह वैदिक ऐप और घड़ी आधुनिक पीढ़ी को दिखाएंगे कि कैसे हमारे ऋषि-मुनियों ने बिना किसी आधुनिक तकनीक के ही समय और ग्रहों की गणना की थी।
लोगों में उत्साह
ऐप और वैदिक घड़ी लॉन्च होते ही लोगों में उत्साह देखने को मिला। सोशल मीडिया पर इस पहल की जमकर सराहना हो रही है। ज्योतिष और खगोल विज्ञान से जुड़े लोग इसे भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे ले जाने का एक बड़ा कदम मान रहे हैं। युवाओं ने भी इसे तकनीक और परंपरा को जोड़ने का शानदार उदाहरण बताया।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री मोहन यादव की इस पहल ने एक बार फिर यह साबित किया है कि भारत की परंपराएं केवल अतीत की धरोहर नहीं हैं, बल्कि आधुनिक समय में भी उनका महत्व उतना ही है। वैदिक ऐप और घड़ी के जरिए 7000 वर्षों का पंचांग मोबाइल पर उपलब्ध होना भारत के गौरवशाली इतिहास और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की झलक देता है। यह न केवल धार्मिक और सामाजिक कार्यों में सहायक होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान का एक अमूल्य स्रोत भी बनेगा।