पितृ पक्ष के पहले दिन भाद्रपद पूर्णिमा पर 7 सितंबर को चंद्र ग्रहण लग रहा है, जो भारत में दृश्यमान होगा
आज की रात भारतवासियों के लिए बेहद खास होने वाली है, क्योंकि आसमान में एक अद्भुत खगोलीय नज़ारा देखने को मिलेगा। यह अवसर होगा पूर्ण चंद्रग्रहण का, जिसे आम बोलचाल में “ब्लड मून” कहा जाता है। खगोल विज्ञानियों के मुताबिक यह ग्रहण न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि यह इस दशक का सबसे लंबा पूर्ण चंद्रग्रहण होगा। भारत में यह दृश्य साफ तौर पर दिखाई देगा और लोग अपनी आंखों से इस प्राकृतिक अद्भुत घटना के गवाह बन सकेंगे।

ब्लड मून क्या है?
जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तब सूर्य की रोशनी सीधे चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती। इस दौरान पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है और वह अंधेरा दिखाई देने लगता है। लेकिन पूरी तरह काला होने के बजाय, चंद्रमा हल्का लाल-नारंगी रंग में चमक उठता है। इस प्रभाव को ही “ब्लड मून” कहा जाता है। यह रंग पृथ्वी के वायुमंडल से छनकर गुजरने वाली सूर्य की रोशनी की वजह से दिखाई देता है।

भारत में कब और कैसे दिखेगा ग्रहण?
भारतीय समयानुसार चंद्रग्रहण की शुरुआत आज रात 8:58 बजे होगी, जब पेनुम्ब्रल ग्रहण शुरू होगा। इसके बाद 9:57 बजे आंशिक ग्रहण की स्थिति आएगी। रात 11:00 बजे पूर्ण ग्रहण शुरू होगा और ठीक 11:41 बजे यह अपने चरम पर होगा। यह चरण सबसे खास होगा क्योंकि उसी समय चंद्रमा गहरा लाल रंग का दिखेगा। पूर्ण ग्रहण रात 12:22 बजे समाप्त होगा और अंततः 2:25 बजे ग्रहण पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
ग्रहण की अवधि
पूर्ण चंद्रग्रहण लगभग 82 मिनट तक चलेगा, जो इसे इस दशक का सबसे लंबा ब्लड मून बनाता है। हालांकि पूरा ग्रहण चक्र (पेनुम्ब्रल से लेकर अंत तक) लगभग 5 घंटे 27 मिनट का होगा।
कहाँ से देखा जा सकेगा?
इस ग्रहण को भारत के लगभग हर हिस्से से साफ-साफ देखा जा सकता है। चाहे आप दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई या बेंगलुरु में हों, यह दृश्य समान रूप से साफ रहेगा। ग्रामीण क्षेत्रों और पहाड़ी इलाकों में, जहां प्रदूषण और कृत्रिम रोशनी कम होती है, वहां यह नज़ारा और भी स्पष्ट नजर आएगा।
खगोल प्रेमियों के लिए खास अवसर
खगोल विज्ञान के शौकीनों के लिए यह एक सुनहरा मौका है। दूरबीन या टेलिस्कोप की मदद से ब्लड मून का दृश्य और भी शानदार लगेगा। हालांकि, इसे नंगी आंखों से देखना भी बिल्कुल सुरक्षित है और बिना किसी विशेष उपकरण के भी इस अद्भुत नजारे का आनंद लिया जा सकता है।
ज्योतिषीय और सांस्कृतिक पहलू
भारत जैसे देश में चंद्रग्रहण केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी रखता है। परंपरा के अनुसार ग्रहण काल में सूतक लगता है, जिसके दौरान पूजा-पाठ और भोजन करने से परहेज किया जाता है। कई लोग इस दौरान ध्यान और मंत्रोच्चारण करना शुभ मानते हैं। वहीं, वैज्ञानिकों का कहना है कि यह केवल एक प्राकृतिक घटना है और इससे डरने या अंधविश्वास फैलाने की जरूरत नहीं है।
वैज्ञानिकों की राय
खगोल वैज्ञानिकों का कहना है कि यह चंद्रग्रहण लोगों को ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने का बेहतरीन अवसर देता है। ऐसे खगोलीय नज़ारे हमें याद दिलाते हैं कि पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य का आपसी तालमेल कितना अद्भुत है।
निष्कर्ष
आज रात भारत के लोगों को एक दुर्लभ और अद्भुत खगोलीय दृश्य देखने का मौका मिलेगा। 82 मिनट तक लाल रंग में डूबा चंद्रमा न केवल वैज्ञानिकों और खगोल प्रेमियों के लिए, बल्कि आम लोगों के लिए भी यादगार होगा। यह ब्लड मून आने वाले वर्षों तक लोगों की स्मृतियों में अंकित रहेगा।