मायावती का बयान: योगी सरकार को सराहा, अखिलेश पर बोलीं कड़ी बातें !

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कांशीराम की पुण्यतिथि पर मायावती ने गुरुवार को लखनऊ में बड़ी रैली की। इस दौरान उन्होंने सपा-कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। 2021 के बाद मायावती पहली बार कांशीराम की पुण्यतिथि पर बड़ा आयोजन किया।

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो मायावती ने गुरुवार को अपने राजनीतिक गुरु और पार्टी संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर लखनऊ में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान मायावती ने जहां कांशीराम को भावभीनी श्रद्धांजलि दी, वहीं राजनीतिक मंच से कई अहम संदेश भी दिए। अपने भाषण में उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से योगी आदित्यनाथ सरकार की कुछ नीतियों की तारीफ की और साथ ही समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखे सवाल दागे। मायावती के इस बयान ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नई हलचल मचा दी है। आइए जानते हैं उनके भाषण की 10 बड़ी बातें—

मायावती का बयान: योगी सरकार को सराहा, अखिलेश पर बोलीं कड़ी बातें !
मायावती का बयान: योगी सरकार को सराहा, अखिलेश पर बोलीं कड़ी बातें !

1. कांशीराम को भावभीनी श्रद्धांजलि

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कांशीराम को भावभीनी श्रद्धांजलि

मायावती ने अपने भाषण की शुरुआत में कांशीराम को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन दलित, पिछड़े और गरीब वर्गों के अधिकारों की लड़ाई में समर्पित था। उन्होंने कहा कि “कांशीराम जी ने जो मिशन शुरू किया था, उसे पूरा करना हमारा कर्तव्य है। मैं उनकी सोच और संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहूंगी।”

2. योगी सरकार के काम की तारीफ

योगी सरकार के काम की तारीफ
योगी सरकार के काम की तारीफ

मायावती ने पहली बार सार्वजनिक रूप से यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार की कानून-व्यवस्था और कुछ विकास योजनाओं की तारीफ की। उन्होंने कहा, “यह बात सच है कि मौजूदा सरकार में अपराध पर कुछ हद तक नियंत्रण हुआ है। पहले जैसी अराजकता नहीं दिखती।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि सरकार निष्पक्षता बनाए रखे तो जनता का भरोसा और बढ़ेगा।

3. अखिलेश यादव पर तीखा हमला

अखिलेश यादव पर तीखा हमला
अखिलेश यादव पर तीखा हमला

भाषण के दौरान मायावती ने अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “जो लोग अब बहुजन समाज के हितैषी बनने की बात करते हैं, उन्होंने अपनी सरकार में दलितों और पिछड़ों के साथ क्या व्यवहार किया था, यह जनता अच्छी तरह जानती है।” उन्होंने सवाल उठाया कि “क्या अखिलेश यादव ने अपने कार्यकाल में दलितों के लिए एक भी ठोस कदम उठाया?”

4. BSP के मिशन पर जोर

BSP के मिशन पर जोर
BSP के मिशन पर जोर

मायावती ने कहा कि बसपा का मिशन किसी व्यक्ति या जाति के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता के लिए है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे “कांशीराम के सिद्धांतों को अपनाकर दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समाज को एकजुट करें।”

5. 2027 के विधानसभा चुनाव का संदेश

अपने भाषण में मायावती ने संकेत दिया कि बसपा 2027 के विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत से मैदान में उतरेगी। उन्होंने कहा कि “हम किसी पार्टी के सहारे नहीं, बल्कि अपने संगठन और जनसमर्थन के बल पर सत्ता में वापसी करेंगे।”

6. भाजपा के प्रति सावधानी की नसीहत

भले ही मायावती ने योगी सरकार के कुछ कामों की तारीफ की, लेकिन उन्होंने भाजपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “बीजेपी की नीतियों में गरीबों और दलितों की भलाई की बात कम और प्रचार ज्यादा होता है। लोगों को इन चालों से सतर्क रहना चाहिए।”

7. बसपा की संगठनात्मक मजबूती पर फोकस

मायावती ने अपने भाषण में कहा कि आने वाले महीनों में पार्टी का बड़ा पुनर्गठन किया जाएगा। उन्होंने कहा, “जिन कार्यकर्ताओं ने संगठन के प्रति ईमानदारी से काम किया है, उन्हें आगे लाया जाएगा। अब बसपा में निष्क्रियता की कोई जगह नहीं होगी।”

8. सपा-भाजपा की मिलीभगत का आरोप

मायावती ने एक बार फिर सपा और भाजपा पर एक-दूसरे के हित में राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “दोनों पार्टियां एक-दूसरे को कमजोर दिखाने का नाटक करती हैं, लेकिन असल में दोनों का लक्ष्य बसपा को रोकना है।”

9. दलित अत्याचारों पर चिंता

मायावती ने कहा कि देश में आज भी दलितों और कमजोर वर्गों पर अत्याचार की घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने मांग की कि केंद्र और राज्य सरकारें ऐसे मामलों में “फास्ट ट्रैक कोर्ट” के जरिए तुरंत न्याय सुनिश्चित करें।

10. कांशीराम की विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प

भाषण के अंत में मायावती ने कहा कि “कांशीराम जी का मिशन अधूरा नहीं रहेगा। जब तक देश में दलित, पिछड़ा और गरीब वर्ग पूरी तरह से सम्मानजनक जीवन नहीं जीता, तब तक बहुजन आंदोलन चलता रहेगा।”

निष्कर्ष:
मायावती का यह भाषण न केवल कांशीराम की पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि का प्रतीक था, बल्कि आगामी चुनावों से पहले एक रणनीतिक सियासी संकेत भी था। योगी सरकार की तारीफ और अखिलेश यादव पर हमला—इन दोनों ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। बसपा प्रमुख ने एक बार फिर साफ कर दिया कि उनकी राजनीति “सत्ता नहीं, सम्मान” के लिए है।

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