अयोध्या में जहां पर रावण की प्रतिमा लगेगी। उसी जगह पर भगवान राम, हनुमान, सुग्रीव और विभीषण की भी प्रतिमा लगेगी। अयोध्या के मेयर ने इसको लेकर पूरा प्लान बताया है।
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद शहर का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में अयोध्या नगर निगम ने एक नया सांस्कृतिक प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिसके तहत रामायण के पात्रों की भव्य प्रतिमाएँ स्थापित की जाएंगी। खास बात यह है कि इन प्रतिमाओं में रावण की 25 फुट ऊंची प्रतिमा भी शामिल होगी। यह प्रतिमा अयोध्या को धार्मिक पर्यटन के लिहाज से और अधिक आकर्षण का केंद्र बनाएगी।

अयोध्या के मेयर ने बताया कि भगवान श्रीराम, भगवान हनुमान, सुग्रीव और विभीषण की प्रतिमाएँ भी एक ही स्थल पर स्थापित की जाएंगी। उद्देश्य यह है कि आने वाले श्रद्धालु रामायण के चरित्रों और घटनाओं को संतुलित और ऐतिहासिक दृष्टि से भी समझ सकें।
क्यों लगाई जा रही है रावण की प्रतिमा?
मेयर के अनुसार, अक्सर रामायण को केवल अच्छाई बनाम बुराई की कथा की तरह देखा जाता है, जिसमें रावण को मात्र एक खलनायक के रूप में प्रस्तुत कर दिया जाता है। जबकि रावण एक विद्वान, शिव भक्त, संगीत ज्ञान में पारंगत और कई कलाओं में दक्ष व्यक्तित्व भी था। सरकार और नगर निगम की योजना यह है कि रावण के चरित्र को संतुलित और अध्यात्मिक दृष्टि से समझाया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ इतिहास और धर्म दोनों को व्यापक रूप में जान सकें।
मेयर ने स्पष्ट किया कि यह प्रतिमा रावण दहन की प्रतीक नहीं, बल्कि ज्ञान और तपस्या के प्रतीक रावण के रूप में स्थापित की जाएगी। इसके साथ एक सूचना पट्टिका भी लगाई जाएगी, जिसमें रावण के विद्वत्तापूर्ण और सांस्कृतिक योगदानों का वर्णन होगा।
कहाँ लगेगी यह प्रतिमा?
प्रतिमाएँ अयोध्या के नवनिर्मित सांस्कृतिक पर्यटन कॉरिडोर क्षेत्र में लगाई जाएँगी। यह जगह राम मंदिर परिसर और सरयू तट से जुड़ी होगी, ताकि श्रद्धालु दर्शन और भ्रमण के दौरान इस स्थल तक आसानी से पहुँच सकें। क्षेत्र को आकर्षक लाइटिंग, भव्य लैंडस्केपिंग और विश्राम स्थलों से सजाया जाएगा।
5 प्रमुख प्रतिमाएँ होंगी शामिल
| पात्र | उद्देश्य | मुख्य संदेश |
|---|---|---|
| भगवान श्रीराम | धर्म और मर्यादा का प्रतीक | आदर्श जीवन का मार्गदर्शन |
| भगवान हनुमान | भक्ति और वीरता का प्रतीक | निष्ठा और कर्तव्यपरायणता |
| सुग्रीव | मित्रता और संधि का प्रतीक | सहयोग और नेतृत्व |
| विभीषण | सत्य और नीति का प्रतीक | अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस |
| रावण | ज्ञान और तपस्या का प्रतीक | बुद्धि का दुरुपयोग न करने की सीख |
पर्यटन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

मेयर ने कहा कि राम मंदिर के दर्शन के लिए हर दिन लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुँच रहे हैं। ऐसे में शहर में सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों की संख्या बढ़ाना आवश्यक है। यह प्रोजेक्ट पर्यटकों के लिए नया आकर्षण केंद्र बनेगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
स्थानीय कलाकारों और शिल्पियों को मिलेगा अवसर
प्रतिमाओं के निर्माण में अयोध्या के स्थानीय मूर्तिकारों, कारीगरों और कलाकारों को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे क्षेत्र की पारंपरिक कला और शिल्प को बढ़ावा मिलेगा।
निष्कर्ष
अयोध्या में रामायण थीम आधारित यह भव्य प्रतिमा परियोजना केवल धार्मिक महत्व नहीं, बल्कि संस्कृति, इतिहास और शिक्षा को एक साथ समाहित करने वाला प्रयास है। रावण की प्रतिमा लगाने का निर्णय इस बात का प्रतीक है कि अयोध्या अब रामायण को केवल एकपक्षीय दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि समग्र भारतीय सांस्कृतिक दर्शन के रूप में प्रस्तुत करने की ओर बढ़ रही है।
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